कभी भदोही, कभी संत रविदास नगर… तीन दशक में 5 बार बदला नाम


सीएम योगी और संत रविदास.
दुनिया के प्रमुख कालीन उत्पादक क्षेत्रों में गिने जाने वाले भदोही की पहचान सिर्फ उसके हस्तनिर्मित कालीनों से नहीं, बल्कि जिले के नाम को लेकर हुई राजनीतिक उठापटक से भी जुड़ी रही है. 30 जून 1994 को अलग जनपद बनने के बाद से जिले के नाम में कई बार बदलाव हुआ. कभी भदोही, कभी संत रविदास नगर और एक दौर में संत रविदास नगर भदोही नाम रखा गया. अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर भदोही का नाम संत रविदास नगर किए जाने की घोषणा की है.
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले सीएम योगी द्वारा भदोही का नाम बदला जाना राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है. इसके साथ ही इसका सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभाव भी है. आइए जानें कब-कब भदोही के नाम बदले गए थे.
मुलायम सरकार में बना था भदोही जिला
भदोही पहले वाराणसी जिले का हिस्सा था. लंबे समय से अलग जिला बनाने की मांग के बाद 30 जून 1994 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की सरकार में इसे अलग जनपद बनाया गया. उस समय इसका नाम भदोही रखा गया. बाद की सरकारों में जिले के नाम को लेकर लगातार बदलाव होते रहे.
मायावती सरकार ने बदला नाम
प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद 4 दिसंबर 1997 को मायावती सरकार ने भदोही का नाम बदलकर संत रविदास नगर कर दिया. इस फैसले के बाद जिले की प्रशासनिक पहचान संत रविदास के नाम से जुड़ गई.
1999 में फिर जुड़ा भदोही
नाम को लेकर अगला बदलाव 1999 में हुआ. 12 नवंबर 1999 को तत्कालीन मुख्यमंत्री रामप्रकाश गुप्ता की सरकार ने नाम को संत रविदास नगर भदोही कर दिया. रिपोर्टों के मुताबिक, कालीन निर्यातकों की मांग के बाद भदोही नाम को फिर साथ जोड़ा गया.
अखिलेश सरकार ने 2014 में वापस किया भदोही
समाजवादी पार्टी की सरकार बनने के बाद एक बार फिर नाम बदलने का फैसला हुआ. 6 दिसंबर 2014 को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में संत रविदास नगर का नाम फिर भदोही करने का निर्णय लिया गया. उस समय सरकारी प्रवक्ता ने बताया था कि यह फैसला जिला मजिस्ट्रेट की सिफारिश पर लिया गया था. बाद के वर्षों में मायावती ने इस फैसले का विरोध किया और 2020 में कहा था कि यदि उनकी पार्टी सत्ता में आती है तो भदोही का नाम फिर संत रविदास नगर किया जाएगा.
योगी ने फिर की संत रविदास नगर की घोषणा
अब करीब 12 वर्ष बाद नाम का मुद्दा फिर सुर्खियों में है. 29 जुलाई 2026 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वाराणसी में संत रविदास की 650वीं जयंती से जुड़े कार्यक्रम के दौरान भदोही का नाम फिर संत रविदास नगर किए जाने की घोषणा की. सीएम योगी ने 2014 में नाम बदले जाने का उल्लेख करते हुए समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा और कहा कि जिले को फिर संत रविदास नगर के नाम से पहचान दिलाई जाएगी.
अखिलेश ने कहा- नाम बदलने का खेल खत्म होगा
सीएम योगी की घोषणा के बाद सपा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि नाम बदलने की यह राजनीति अब खत्म होगी और 2027 में जनता सरकार बदलने के लिए तैयार है. यह प्रतिक्रिया मुख्यमंत्री की घोषणा के कुछ घंटे बाद सामने आई.
इस तरह भदोही के नाम को लेकर राजनीतिक मतभेद भी सामने आते रहे हैं. एक ओर योगी सरकार इसे संत रविदास के सम्मान से जोड़ रही है, वहीं अखिलेश यादव नाम बदलने की राजनीति पर सवाल उठा रहे हैं.
जनपद के पांच बड़े पड़ाव:
- 30 जून 1994 — भदोही अलग जिला बना.
- 4 दिसंबर 1997 — नाम बदलकर संत रविदास नगर किया गया.
- 12 नवंबर 1999 — नाम संत रविदास नगर भदोही हुआ.
- 6 दिसंबर 2014 — नाम फिर भदोही किया गया.
- 29 जुलाई 2026 — योगी आदित्यनाथ ने संत रविदास नगर नाम किए जाने की घोषणा की.
भदोही के नाम का यह सफर बताता है कि तीन दशक में जिले की प्रशासनिक पहचान कई बार बदली. अब 2026 की घोषणा के बाद अगला महत्वपूर्ण पड़ाव सरकार की औपचारिक प्रशासनिक प्रक्रिया और अधिसूचना होगी. हालांकि इस बयान के बाद यह भी तय है की आगामी 2027 विधानसभा चुनाव में सपा बसपा कांग्रेस के साथ भाजपा भी इस मुद्दे पर जुबानी जंग होनी तय है.
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