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15 दंगे, 68 तीर्थ स्थलों पर कब्जे… संभल रिपोर्ट में कई बड़े दावे, UP विधानसभा में पेश होगी 450 पन्नों की रिपोर्ट

15 दंगे, 68 तीर्थ स्थलों पर कब्जे... संभल रिपोर्ट में कई बड़े दावे, UP विधानसभा में पेश होगी 450 पन्नों की रिपोर्ट

संभल हिंसा

24 नवंबर, 2024 को संभल में हुई हिंसा की जांच करने वाले न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट उत्तर प्रदेश विधानसभा के मॉनसून सत्र के दौरान सदन में पेश की जाएगी. आयोग ने लगभग 450 पन्नों की यह रिपोर्ट पिछले साल 28 अगस्त को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपी थी. रिपोर्ट में संभल की सामाजिक और डेमोग्राफिक स्थिति के बारे में कई गंभीर दावे किए गए हैं.

आयोग के अनुसार, पिछले कुछ दशकों में सम्भल के डेमोग्राफिक्स को बदलने की एक व्यवस्थित कोशिश की गई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि आजादी के समय संभल नगरपालिका क्षेत्र में हिंदू आबादी लगभग 45 प्रतिशत थी, जो अब घटकर लगभग 15 प्रतिशत रह गई है. आयोग ने इस गिरावट के मुख्य कारणों के तौर पर लगातार हिंसा, पलायन और सांप्रदायिक घटनाओं की पहचान की है.

कथित ‘लव जिहाद’ और धर्म परिवर्तन का दावा

रिपोर्ट का दावा है कि दंगे, कथित ‘लव जिहाद’ और धर्म परिवर्तन जैसी गतिविधियों के कारण हिंदू आबादी में कमी आई. इसमें यह भी बताया गया है कि जब हिंदू आबादी 20 प्रतिशत से कम हो गई, तो विदेशी मूल के मुसलमानों और स्थानीय (‘देसी’) मुसलमानों के बीच टकराव शुरू हो गए. आयोग ने तुर्क समुदाय और धर्म परिवर्तन करने वाले हिंदू मूल के पठानों के बीच विवादों का भी जिक्र किया है.

19 पवित्र कुओं पर कब्जा

जांच रिपोर्ट में पिछले सात दशकों में सम्भल में हुए 15 सांप्रदायिक दंगों का विवरण दिया गया है. इसके अलावा, इसमें 68 तीर्थ स्थलों और 19 पवित्र कुओं पर कथित कब्जे का भी जिक्र है. हरिहर मंदिर का हवाला देते हुए, रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वहां बाबर के दौर के सबूत मिले हैं.

आतंकवादी गतिविधियों का खुलासा

अपनी रिपोर्ट में, आयोग ने कुछ आतंकवादी संगठनों की कथित गतिविधियों और आसिम, उर्फ सना-उल-हक की भूमिका पर भी प्रकाश डाला है. रिपोर्ट के अनुसार, उसे अमेरिका पहले ही आतंकवादी घोषित कर चुका है. साथ ही, रिपोर्ट में संभल में अवैध हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी के तेजी से फैलने के बारे में भी बातें कही गई हैं.

पंकज चतुर्वेदी

पंकज चतुर्वेदी

पंकज चतुर्वेदी को पत्रकारतिा के क्षेत्र में एक दशक से ज्यादा का अनुभव है. देश और उत्तरप्रदेश की राजनीति को कवर करते आ रहे हैं. दिल्ली में अमर उजाला और पंजाब केसरी से पत्रकारिता की यात्रा की शुरुआत हुई.  दिल्ली में 2 साल की पत्रकारिता के बाद मिट्टी की खुशबू यूपी खींच लाई और तब से राजधानी लखनऊ में ही पत्रकारिता हो रही है. 2017 में यात्रा को विस्तार देते हुए इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े. राजनीतिक खबरों में गहरी रुचि और अंदर की खबर को बाहर लाने का हुनर, साथ ही यूपी की ब्यूरोकेसी में खास पकड़.  पत्रकारिता का फलसफा खबरों को खबर के रूप में ही जनता तक पहुंचाना.

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