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बिन मांगे नहीं… मेहनत से मिल रहे मोती! कानपुर की महिला किसान ने खेत के तालाब में उगाए डिजाइनर पर्ल

बिन मांगे नहीं... मेहनत से मिल रहे मोती! कानपुर की महिला किसान ने खेत के तालाब में उगाए डिजाइनर पर्ल

खेत के तालाब में उग रहे भगवान गणेश और स्वस्तिक वाले मोती.

Kanpur News: खेत का तालाब अब सिर्फ सिंचाई या वर्षा जल संचयन का साधन नहीं रह गया है. कानपुर नगर के बिधनू विकासखंड के ग्राम सम्भुआ में एक महिला किसान और उसके परीक्षणों ने खेत तालाब को आय का ऐसा माध्यम बना दिया है, जो आसपास के किसानों के लिए प्रेरणा बन रहा है. यहां तालाब में मत्स्य पालन के साथ-साथ डिजाइनर मोती का उत्पादन किया जा रहा है. इस अनोखे प्रयोग से लाखों रुपए की आमदनी होने की उम्मीद है.

राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत भूमि संरक्षण अनुभाग द्वारा ग्राम सम्भुआ निवासी रश्मि वर्मा के खेत में 22 मीटर लंबा, 20 मीटर चौड़ा और तीन मीटर गहरा खेत तालाब बनवाया गया. तालाब निर्माण पर उन्हें योजना के तहत 50 प्रतिशत, अधिकतम 52,500 रुपए का अनुदान डीबीटी के माध्यम से मिला. कृषि विभाग और मणि एग्रो हब से प्रशिक्षण लेने के बाद उन्होंने मोती उत्पादन की शुरुआत की.

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करीब 30 हजार सीपियों पर आधारित इस परियोजना में प्रत्येक सीपी से दो मोती तैयार किए जा रहे हैं. खास बात यह है कि चयनित सीपियों में विशेष मोल्ड प्रत्यारोपित किए गए हैं, जिनकी मदद से स्वस्तिक, भगवान गणेश, पुष्प, पत्तियों और अन्य आकर्षक आकृतियों वाले डिजाइनर पर्ल तैयार हो रहे हैं. इन कलात्मक मोतियों की आभूषण और सजावटी बाजार में अच्छी मांग रहती है, जिससे किसानों को सामान्य मोतियों की तुलना में अधिक कीमत मिलने की संभावना है.

18 महीने में तैयार हो जाता है मोती

करीब 18 से 20 लाख रुपए की लागत वाली इस परियोजना को नौ माह पूरे हो चुके हैं. करीब 18 माह में मोती पूरी तरह तैयार हो जाएंगे. अनुमान है कि तैयार मोतियों की बिक्री से लगभग 50 लाख रुपए तक का कारोबार हो सकता है. रश्मि वर्मा ने परियोजना के साथ मत्स्य पालन को भी जोड़ा है. उनके दूसरे खेत तालाब में अब तक तीन बार मछली उत्पादन किया जा चुका है.

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इससे प्रतिवर्ष लगभग चार लाख रुपए की अतिरिक्त आय होने की संभावना है. उनका कहना है कि किसान यदि खेत तालाबों का उपयोग केवल सिंचाई तक सीमित न रखकर मत्स्य पालन, मोती उत्पादन और अन्य आयवर्धक गतिविधियों से जोड़ें तो उनकी आमदनी कई गुना बढ़ सकती है.

निरीक्षण करने पहुंचे DM जितेंद्र प्रताप सिंह

परियोजना का निरीक्षण करने पहुंचे जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने निर्देश दिए कि जनपद के अन्य खेत तालाब लाभार्थियों को भी मोती उत्पादन, मत्स्य पालन और बहुउद्देशीय उपयोग के लिए प्रेरित किया जाए. उन्होंने कहा कि खेत तालाब जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण और सिंचाई के साथ किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन सकते हैं.

अनुराग अग्रवाल

अनुराग अग्रवाल

सोलो ट्रैवलिंग का शौक. सहारा समय, इंडिया वॉइस और न्यूज़ नेशन जैसी संस्थाओं में 18 साल से ज्यादा का टीवी जर्नलिज्म का अनुभव.

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