उत्तर प्रदेशभारत

फर्जी बैनामा, मालिकाना हक और 28 लाख मुआवजा… मुरादाबाद SSP आवास पर कब्जे की गजब साजिश, 7 पर FIR

फर्जी बैनामा, मालिकाना हक और 28 लाख मुआवजा... मुरादाबाद SSP आवास पर कब्जे की गजब साजिश, 7 पर FIR

मुरादाबाद SSP आवास.

Moradabad News: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले से सरकारी संपत्ति पर कब्जे और जालसाजी का एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है. भू-माफियाओं ने इस बार किसी आम जमीन पर नहीं, बल्कि जिले के SSP के सरकारी आवास की भूमि पर ही मालिकाना हक का दावा कर दिया. मामले की जांच के लिए शासन के निर्देश पर गठित चार सदस्यीय विशेष जांच समिति (SIT) की रिपोर्ट में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े और धोखाधड़ी की पुष्टि होने के बाद थाना सिविल लाइंस में सात नामजद समेत अन्य अज्ञात आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है. पुलिस अब पूरे नेटवर्क की जांच में जुट गई है.

ब्रिटिश काल से सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है SSP आवास की जमीन

जांच में सामने आया कि ग्राम छावनी स्थित गाटा संख्या-455A पर बना SSP आवास अंग्रेजी शासनकाल से ही सरकारी संपत्ति के रूप में राजस्व अभिलेखों में दर्ज है. इसके बावजूद आरोपियों ने वर्ष 1900 का एक संदिग्ध और फर्जी बैनामा तैयार कर इस भूमि पर निजी स्वामित्व का दावा किया. जांच में यह भी पाया गया कि बैनामे में न तो गाटा संख्या का स्पष्ट उल्लेख था और न ही उसकी चौहद्दी सरकारी रिकॉर्ड से मेल खाती थी.

ये भी पढ़ें- साइड हटो हॉर्न बजाया तो युवक को मार दी गोली, बर्थडे पार्टी से लौट रहा था; भाई के सामने गोलियों से भूना

फर्जी दस्तावेजों के सहारे कोर्ट और प्रशासन को किया गुमराह

SIT जांच के अनुसार, मुख्य आरोपी सुधीर कुमार धवन ने अपने मालिकाना हक को साबित करने के लिए वर्ष 2002 का एक विभागीय पत्र भी तैयार कराया. यह पत्र तत्कालीन पुलिस अधीक्षक (ई), विशेष शाखा, अभिसूचना विभाग, लखनऊ के नाम से जारी दिखाया गया था. जब वर्तमान SSP ने इसकी सत्यता की जांच कराई तो लखनऊ मुख्यालय ने स्पष्ट कर दिया कि उनके रिकॉर्ड में ऐसा कोई पत्र कभी जारी ही नहीं हुआ. मुख्यालय ने लिखित रूप से इसे पूरी तरह फर्जी और कूटरचित दस्तावेज बताया, जिसे अवैध लाभ लेने के उद्देश्य से तैयार किया गया था.

सरकारी जमीन बताकर वसूला किराया, मुआवजा भी हड़पा

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने सरकारी भूमि को अपनी निजी संपत्ति बताकर वर्षों तक लोगों से अवैध रूप से किराया वसूला. इतना ही नहीं, आवास एवं विकास परिषद, लखनऊ से भी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी मुआवजा हासिल कर लिया. SIT की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2024 तक आरोपियों ने करीब 28.45 लाख रुपए की अवैध वसूली और मुआवजा प्राप्त किया. आरोप है कि इस राशि को आपस में बांट लिया गया. इसके अलावा सरकारी भूमि के फर्जी बैनामे भी अन्य लोगों के नाम कर दिए गए, जबकि ऐसा करने का उन्हें कोई कानूनी अधिकार नहीं था.

7 नामजद समेत अन्य के खिलाफ FIR

दारोगा हरेंद्र सिंह की तहरीर पर थाना सिविल लाइंस में सुधीर कुमार धवन, सुनील कुमार धवन समेत सात नामजद और अन्य अज्ञात आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और कूटरचना सहित विभिन्न गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है. पुलिस आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही है.

एसपी सिटी बोले- किसी रिकॉर्ड में नहीं मिला मालिकाना हक

एसपी सिटी कुमार रणविजय सिंह ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद राजस्व अभिलेखों और अन्य दस्तावेजों की विस्तृत जांच कराई गई. जांच में यह स्पष्ट हुआ कि सुधीर धवन और उनके परिवार के सदस्यों सहित सात लोगों ने गलत तरीके से सरकारी भूमि पर मालिकाना दावा कर मुआवजा लिया और वर्षों तक किराया भी वसूला.

एसपी सिटी कुमार रणविजय सिंह ने बताया कि राजस्व रिकॉर्ड या स्वामित्व संबंधी किसी भी दस्तावेज में आरोपियों का मालिकाना हक साबित नहीं हुआ है. SIT की रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है. पुलिस अन्य विभागों के साथ समन्वय कर अतिरिक्त साक्ष्य जुटा रही है. निष्पक्ष जांच के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी पुलिस

इस मामले को प्रदेश के सबसे गंभीर भूमि घोटालों में से एक माना जा रहा है. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने, सरकारी रिकॉर्ड से छेड़छाड़ करने और अवैध मुआवजा हासिल करने में किन-किन लोगों की भूमिका रही. जांच एजेंसियों का मानना है कि यह केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि एक संगठित जालसाजी नेटवर्क का मामला हो सकता है.

शारिक सिद्दिकी

शारिक सिद्दिकी

पिछले 4 सालों से पत्रकारिता के फील्ड में हूं, निष्पक्ष पत्रकारिता का पक्षधर और सच्चाई के साथ अपने कर्तव्य का पालन करना ही मेरा उद्देश्य.

Read More

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button