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पश्चिम एशिया में तनाव के बीच भारत में डामर की भारी कमी, दोगुने हुए दाम… बिजनौर में रुका 50 से ज्यादा सड़कों का काम

पश्चिम एशिया में तनाव के बीच भारत में डामर की भारी कमी, दोगुने हुए दाम... बिजनौर में रुका 50 से ज्यादा सड़कों का काम

सड़कों का काम अधूरा

पश्चिम एशिया में बढ़े ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच सैन्य और कूटनीतिक तनाव का सीधा असर अब देश के बुनियादी ढांचे पर दिखने लगा है. वैश्विक उथल-पुथल के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित होने से देश में बिटुमेन(डामर) का भारी संकट खड़ा हो गया है. नतीजतन, देश भर में निर्माण कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं. उत्तर प्रदेश के बिजनौर में लोक निर्माण विभाग (PWD) और अन्य सरकारी एजेंसियों, मंडी समिति और गन्ना समिति की करीब पचास से अधिक महत्वपूर्ण सड़कों का निर्माण कार्य पूरी तरह ठप हो गया है.

समय पर बिटुमेन न मिलने से बिजनौर जिले की प्रमुख और ग्रामीण सड़कें अधूरी पड़ी हैं, जिससे राहगीरों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. सड़क निर्माण का सबसे मुख्य घटक बिटुमेन होता है, जो कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) के रिफाइनिंग प्रोसेस से तैयार होता है. भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है. ईरान-इजरायल के बीच जारी युद्ध की स्थिति और लाल सागर (Red Sea) रूट पर जहाजों की आवाजाही में आ रही रुकावटों की वजह से बिटुमेन की सप्लाई चेन पूरी तरह चरमरा गई है.

Bijnor Road

सड़कों का काम रुका

आयात प्रभावित होने से घरेलू रिफाइनरियों से ठेकेदारों को पर्याप्त मात्रा में डामर नहीं मिल पा रहा है. बिजनौर जिले में लगभग 50 से ज्यादा ऐसी सड़कें हैं, जहां गिट्टी डालने (WBM) का काम तो पूरा हो चुका है, लेकिन अंतिम चरण यानी डामरीकरण (Bituminous Layer) का काम रुका हुआ है. आधी-अधूरी सड़कों पर गिट्टियां उखड़ रही हैं, जिससे उड़ने वाली धूल राहगीरों और किनारे रहने वाले गांव वालों के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा रही है.

Bijnor (4)

नहीं मिल रहा बिटुमेन

अधूरी सड़कों पर बिखरी गिट्तियों के कारण दोपहिया वाहन चालक फिसलकर चोटिल हो रहे है. विभागीय अधिकारियों की ओर से तय की गई समय सीमा बीत जाने के बाद भी काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है. ठेकेदारों का कहना है कि उन्होंने रिफाइनरियों को एडवांस भुगतान कर रखा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय संकट का हवाला देकर उन्हें बिटुमेन की डिलीवरी नहीं दी जा रही है. वहीं, दूसरी ओर बिटुमेनके रेट भी दोगुने हो गए हैं.

दोगुने हुए दाम

45 रुपये किलो मिलने वाला बिटुमेन 90 रुपये किलो की दर से मिल रहा है. वह भी जरूरत से आधा ही मिल पा रहा है. पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता हेमंत प्रताप सिंह ने बताया कि पीडब्ल्यूडी द्वारा करीब साढे तीन सौ करोड़ की लागत की बीस से अधिक सड़कों का निर्माण कराया जा रहा है, लेकिन रिफाइनरी भी इस युद्ध संकट के आगे बेबस नजर आ रहा है. रिफाइनरी कंपनियों को क्रूड ऑयल नहीं मिल पा रहा है,जिससे बिटुमेन का प्रोडक्शन भी नहीं हो पा रहा है. अगर जल्द ही सप्लाई सामान्य नहीं हुआ, तो आने वाले मानसून के सीजन में ये सड़कें अधूरी ही रह जाएगी.

अमित रस्तोगी

अमित रस्तोगी

अमित रस्तोगी पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उनकी पहचान वाइल्डलाइफ, एग्रोफोरेस्ट्री, हॉटिकल्चर, एनिमल हसबेंडरी फील्ड की विशेषज्ञता साथ-साथ इनवेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट के तौर पर की जाती है. उन्होंने मांस के लिए ऊंट, गाय, बैलों, गधों और खच्चरों की तस्करी, स्लाटरिंग के खूनी कारोबार का पर्दाफाश किया है.

उन्हें अपने काम के लिए कई सम्मान भी मिले हैं. अमित रस्तोगी ने एमआईटी कालेज औरंगाबाद से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है. इसके बाद फिल्म एंव टेलीविजन संस्थान नई दिल्ली से प्रशिक्षण प्राप्त कर 2 वर्ष दूरदर्शन और 19 वर्षो तक इंडिया टीवी के लिये बतौर रिपोर्टर काम कर चुके हैं. वर्तमान में टीवी 9 नेटवर्क से जुड़े हैं.

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