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दान पेटियों में घटी कीमती वस्तुएं… कर्मचारियों ने बताई अंदर की बात

राम मंदिर चढ़ावा चोरी: दान पेटियों में घटी कीमती वस्तुएं... कर्मचारियों ने बताई अंदर की बात

राम मंदिर चढ़ावा मामलाImage Credit source: TV9

अयोध्या स्थित राम मंदिर के प्रति भक्तों की आस्था और भक्ति तो अटूट है, लेकिन चढ़ावे की चोरी का मामला सामने आने के बाद वे सावधानी बरत रहे हैं. अब अपनी सारी संपत्ति दान करने के लिए बेताब भावुक भक्तों के दृश्य कम ही देखने को मिलते हैं. नतीजतन, दान पेटियों में अब गहने कम ही दिखाई देते हैं. मंदिर के एक कर्मचारी ने नाम न बताने की शर्त पर इस बारे में अहम जानकारी दी, और चढ़ावा गिनने में शामिल एक स्टाफ सदस्य ने भी इन दावों की पुष्टि की.

सूत्रों का कहना है कि चोरी का मामला सामने आने के बाद लोगों में जागरूकता बढ़ी है. ऐसा नहीं है कि लोगों ने दान देना बंद कर दिया है या वे अब चढ़ावा नहीं चढ़ाना चाहते. बल्कि, दान करने का तरीका बदल गया है. सोना और चांदी चढ़ाने का चलन काफी कम हो गया है. पहले, लोग अक्सर दान पेटियों में सोने-चांदी के सिक्के और गहने डालते थे. गिनती वाले कमरे में छंटाई की प्रक्रिया के दौरान जब पेटियां खाली की जाती थीं तो अक्सर ऐसे गहने और कीमती सिक्के मिलते थे और उन्हें एक अलग डिब्बे में रख दिया जाता था.

चंदा चोरी का पता चलने पर बदली स्थिति

सूत्रों के मुताबिक, इसी चरण में आरोपी गहने चुरा लेते थे. बताया जाता है कि कथित चंदा चोरी की बात सामने आने के बाद स्थिति बदल गई है. सोने-चांदी के सिक्कों या अन्य गहनों का मिलना कम हो गया है. हालांकि अंदर के कर्मचारियों को काउंटर पर सीधे किए गए दान के बारे में पता नहीं हो सकता है, लेकिन अब शायद ही कोई दान पेटियों में कीमती सामान डाल रहा हो.

13 लोग संभाल रहे गिनती का काम

राम मंदिर से 23 कर्मचारियों के एक साथ नौकरी छोड़ने के बाद से किसी नए कर्मचारी की भर्ती नहीं की गई है. बाकी बचे 13 कर्मचारी सुबह 10 बजे से शाम 7 बजे की शिफ्ट में काम का बोझ संभाल रहे हैं. काम के घंटे और दबाव दोनों बढ़ गए हैं, फिर भी वेतन वृद्धि के बारे में कोई चर्चा नहीं हुई है. एक कर्मचारी ने बताया कि 23 कर्मचारियों ने निराशा में एक साथ नौकरी छोड़ दी थी. हालात थर्ड-पार्टी हायरिंग की आड़ में श्रमिकों के शोषण जैसे हैं, कोई छुट्टी नहीं मिलती और वेतन केवल उन्हीं दिनों का दिया जाता है जब वास्तव में काम किया गया हो.

दिहाड़ी-स्तर के वेतन पर फुल-टाइम काम

कर्मचारी ने बताया कि पहले, काम को छह-छह घंटे की दो शिफ्टों में बांटा गया था, लेकिन अब सभी को एक ही शिफ्ट में आने के लिए कहा गया है. काम के घंटे भी बढ़ा दिए गए हैं. कई कर्मचारी पार्ट-टाइम काम करते हैं और साथ ही अपनी पढ़ाई या परीक्षा की तैयारी भी करते हैं. नतीजतन, दिहाड़ी-स्तर के वेतन पर फुल-टाइम काम करना उनके लिए मुश्किल था. और कर्मचारियों के नौकरी छोड़ने की संभावना है. यहां हमेशा से स्टाफ के बदलने (स्टाफ टर्नओवर) का चलन रहा है. मंदिर परिसर में काम करने वाले लोग बेहतर कामकाजी माहौल की उम्मीद करते हैं, लेकिन असलियत उन्हें काम शुरू करने के बाद ही पता चलती है।

चढ़ावे की चोरी के बाद परिवार और रिश्तेदारों के सवाल

गिनती के काम में शामिल एक कर्मचारी ने बताया कि काम की जगह पर हालात ऐसे लगते हैं जैसे ‘राष्ट्रपति शासन’ लागू हो, फिर भी घर लौटने पर भी मुश्किलें खत्म नहीं होतीं. जब से चढ़ावे की चोरी का मामला सामने आया है, परिवार के सदस्य और रिश्तेदार कई तरह के सवाल पूछ रहे हैं. यहां तक कि पड़ोसी भी उन्हें शक की नजर से देखते हैं. आरोपी के पुराने साथी भी अब उनसे कतराते हैं.

अभिजीत ठाकुर

अभिजीत ठाकुर

अभिजीत ठाकुर ने दिल्ली विश्वविद्यालय से पढ़ाई की है. 2014 में पत्रकारिता की शुरुआत Zee Media से हुई. दिल्ली में रिपोर्टिंग की. 2018 में ETV भारत के नेशनल ब्यूरो में बतौर रिपोर्टर जॉइन किया. इस दौरान संघ (RSS-VHP), शिक्षा, कृषि, पर्यटन के साथ किसान और मजदूरों के मुद्दों पर रिपोर्टिंग की. 2022 में TV9 भारतवर्ष जॉइन किया और दिल्ली ब्यूरो का हिस्सा रहे. इस दौरान उत्तराखंड, हिमाचल, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान,महाराष्ट्र, बिहार और झारखंड में कई बड़ी खबरों और इवेंट्स कवर करने का अवसर मिला. 2025 में लखनऊ ब्यूरो की जिम्मेदारी के साथ दिल्ली से लखनऊ भेजा गया. 17 साल दिल्ली में रहने के बाद अब कर्मस्थली यूपी की राजधानी है. अब उत्तर प्रदेश की राजनीति, सरकार और जनता से जुड़े मुद्दों की रिपोर्ट जनता तक पहुंचाते हैं.

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