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जब देश सो रहा होता है, कानपुर में गूंजते हैं आजादी के नारे… 14 अगस्त की रात मनता है जश्न

जब देश सो रहा होता है, कानपुर में गूंजते हैं आजादी के नारे... 14 अगस्त की रात मनता है जश्न

कानपुर के मेस्टन रोड पर फहराया जाता है तिरंगा.

Independence Day 2026: देशभर में स्वतंत्रता दिवस का जश्न आमतौर पर 15 अगस्त की सुबह ध्वजारोहण और राष्ट्रगान के साथ शुरू होता है, लेकिन उत्तर प्रदेश के कानपुर में आजादी का उत्सव एक रात पहले ही शुरू हो जाता है. यहां 14 अगस्त की रात को ही लोग एक जगह जुटकर आजादी का जश्न मनाते हैं. यह परंपरा देश की आजादी के समय से चली आ रही है और आज भी उसी उत्साह के साथ निभाई जा रही है.

14 अगस्त की रात जुटते हैं आजादी के दीवाने

कानपुर के मेस्टन रोड स्थित सुभाष चौक पर 14 अगस्त की शाम से ही लोगों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो जाता है. रात करीब 8 बजे से देशभक्त, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिवार और शहर के गणमान्य लोग यहां एकत्रित होने लगते हैं. पूरा इलाका देशभक्ति के रंग में रंग जाता है. लोग देशभक्ति के गीत गाते हैं और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी यादों को साझा करते हैं.

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रात 12 बजे होता है ध्वजारोहण

इस आयोजन की सबसे खास बात आधी रात को होने वाला ध्वजारोहण है. 14 अगस्त की रात 12 बजे के बाद, करीब 12:01 बजे सुभाष चौक पर झंडारोहण किया जाता है. इसके बाद राष्ट्रगान होता है और पूरा इलाका भारत माता की जय के नारों से गूंज उठता है. आतिशबाजी के साथ लोग आजादी के इस खास पल को उत्सव की तरह मनाते हैं.

1947 से चली आ रही है परंपरा

बताया जाता है कि यह परंपरा 14 अगस्त 1947 से चली आ रही है. उस समय देश को आजादी मिलने की पहली खबर कानपुर पहुंचने पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी शिवनारायण टंडन ने यहां ध्वजारोहण कर आजादी का जश्न मनाया था. इस आयोजन को महात्मा गांधी की सहमति से शुरू किए जाने की बात भी सामने आती है. इसके बाद से ही कानपुर में 14 अगस्त की रात आजादी का जश्न मनाने की परंपरा कायम है.

मेस्टन रोड का स्वतंत्रता आंदोलन से गहरा रिश्ता

कानपुर का मेस्टन रोड स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास से भी जुड़ा रहा है. आंदोलन के दौर में यहां बड़ी संख्या में क्रांतिकारी और स्वतंत्रता सेनानी जुटते थे. इसी इलाके में कांग्रेस का तिलक हाल भी स्थित है, जहां स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान बैठकों और चर्चाओं का दौर चलता था. यही वजह है कि आज भी इस स्थान पर होने वाले स्वतंत्रता दिवस समारोह को खास महत्व दिया जाता है.

तिरंगे और गुब्बारों से सजता है पूरा इलाका

14 अगस्त की रात होने वाले कार्यक्रम के लिए मेस्टन रोड को तिरंगे झंडों, झालरों और गुब्बारों से सजाया जाता है. सड़क पर जगह-जगह तिरंगे लगाए जाते हैं. जैसे-जैसे रात आगे बढ़ती है, लोगों में उत्साह बढ़ता जाता है. आधी रात को ध्वजारोहण के बाद देशभक्ति के गीतों की धुन और भारत माता के जयकारों से माहौल पूरी तरह देशभक्तिमय हो जाता है.

स्वतंत्रता सेनानियों के परिवार भी होते हैं शामिल

इस आयोजन में आज भी स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिवार के सदस्य हिस्सा लेते हैं. बुजुर्ग स्वतंत्रता सेनानी और उनके परिवार के लोग मंच से आजादी के दौर की यादें साझा करते हैं. पुरानी पीढ़ी की बातें सुनकर नई पीढ़ी को स्वतंत्रता आंदोलन और देश की आजादी के संघर्ष से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिलती हैं.

पूर्व केंद्रीय मंत्री भी निभाते रहे हैं परंपरा

कानपुर कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष और बाद में केंद्रीय मंत्री रहे श्रीप्रकाश जायसवाल भी इस परंपरा में लंबे समय तक शामिल होते रहे हैं. बताया जाता है कि अपनी व्यस्तता के बावजूद वह 14 अगस्त की रात सुभाष चौक पहुंचते थे और ध्वजारोहण कार्यक्रम में हिस्सा लेते थे.

आज भी त्योहार की तरह मनता है आजादी का जश्न

कानपुर की यह परंपरा सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आजादी के संघर्ष की यादों को जिंदा रखने का जरिया बन गई है. आजादी के दीवानों और उनके परिवारों के लिए 14 अगस्त की रात का यह जश्न किसी त्योहार से कम नहीं है. देश जब 15 अगस्त की सुबह स्वतंत्रता दिवस मनाता है, उससे पहले ही कानपुर में आधी रात को तिरंगा फहराकर आजादी की खुशी मनाने की यह अनूठी परंपरा इतिहास और वर्तमान को एक साथ जोड़ती है.

प्रभाकर श्रीवास्तव

प्रभाकर श्रीवास्तव

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