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‘एंबुलेंस से निकालना मेरी शव यात्रा’… भाई की अंतिम इच्छा थी, पूरा करने के लिए मंगाई 16 गाड़ियां

‘एंबुलेंस से निकालना मेरी शव यात्रा’… भाई की अंतिम इच्छा थी, पूरा करने के लिए मंगाई 16 गाड़ियां

भाई जब मैं मर जाऊं तो, एंबुलेंस के काफिले में मेरी अंतिम यात्रा निकालना… यह कथन यूपी के उन्नाव जिले के रहने वाले कमलेश के थे, जो कि पेशे से राजमिस्त्री थे. काफी समय से वह लिवर की गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे. शनिवार को उनकी मौत हो गई. हालांकि, एंबुलेंस चालक भाई वो वादा जर भी नहीं भूला, जो उन्होंने अपने भाई कमलेश से किया था. वादे के अनुसार, भाई की अंतिम यात्रा में करीब 16 एम्बुलेंस सायरन बजाते हुए शामिल हुई.

दरअसल, लिवर की बीमारी से जूझ रहे एक कमलेश (50) ने अपने एंबुलेंस चालक छोटे भाई से अंतिम इच्छा जाहिर की थी कि जब उनकी अंतिम यात्रा निकले तो, उसमें में अधिक से अधिक एंबुलेंस शामिल हो. भाई ने भाई की अंतिम इच्छा पूरी करते हुए अपना वादा निभाया और एंबुलेंस की लाइन लगा दी. बता दें कि गंभीर बीमारी से जूझ रहे कमलेश की शनिवार रात मौत हो गई रविवार को उनकी यात्री निकाली गई.

16 एम्बुलेंस का काफिला

भाई से किया आखिरी वादा पूरा करने के लिए एंबुलेंस चालक भाई विमलेश ने अपने अन्य एंबुलेंस चालक दोस्तों को एंबुलेंस के साथ अपने घर पर बुलाया और अपने भाई की अंतिम इच्छा के बारे में बताया. मृतक कमलेश के सम्मान में सभी एम्बुलेंस ड्राइवर इस अंतिम यात्रा में शामिल होने के लिए राजी हो गए. रविवार को 16 एम्बुलेंस सायरन बजाते हुए कमलेश की अंतिम यात्रा में शामिल हुई, जो कि शुक्लागंज श्मशान घाट पहुंची.

हर किसी की आंखें हुईं नम

बड़ी संख्या में हूटर बजाते हुए निकली एंबुलेंस को देख आसपास के लोग अनहोनी की आशंका पर घरों से बाहर निकल आए. माजरा समझने के बाद सभी ने राहत की सांस ली. भाई के प्रति भाई को प्यार देख हर किसी की आंखें नम हैं. दोपहर करीब 1:20 बजे कतार में 16 एंबुलेंस जैसे ही बालूघाट मोड़ पार कर मिश्रा कालोनी स्थित श्मशान घाट की तरफ बढ़ीं तो आसपास के लोग सकते में आ गए थे. विमलेश ने बताया कि वह तीन भाई थे, जिसमें बड़े महेश, मझले कमलेश और वह सबसे छोटे हैं. विमलेश ने बताया कि कई एंबुलेंस चालक उनके मित्र हैं.

‘कोई पैसे नहीं लिए…’

भाई ने अंतिम इच्छा जताई थी कि उसके अंतिम संस्कार में ज्यादा से ज्यादा एंबुलेंस श्मशान घाट तक पहुंचे. उनकी इच्छा पूरी करने को दोस्तों को एंबुलेंस के साथ ले गया था. कमलेश की मौत से पत्नी सरला, बड़ी बेटी रुचि और छोटे बेटे तनिष्क बेहाल हैं. एंबुलेंस चालक राजेश कुमार सिंह ने बताया कि हमारे जानने वाले एक एंबुलेंस चालक के भाई की मौत हुई थी, जिसमें उनकी इच्छा थी कि जब वह मरे तो उनकी अंतिम यात्रा में एम्बुलेंस भी शामिल हो. हम लोग उनकी अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए अपनी गाड़ी ले गए थे और इसके लिए कोई भी पैसे नहीं लिए गए थे.

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