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‘कमर्शियल गतिविधियों की जगह बन गए हैं पुलिस स्टेशन’, HC की फटकार, DGP से मांगी रिपोर्ट

'कमर्शियल गतिविधियों की जगह बन गए हैं पुलिस स्टेशन', HC की फटकार, DGP से मांगी रिपोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्टImage Credit source: PTI (फाइल फोटो)

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस स्टेशनों के कामकाज पर चिंता जताई है. कोर्ट ने कहा कि ये जगहें अब कमर्शियल गतिविधियों का केंद्र बन गई हैं और पुलिसकर्मी राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के बजाय लगातार बिजनेस की गतिविधियों में व्यस्त रहते हैं. इस बात को ध्यान में रखते हुए जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल ने उत्तर प्रदेश के डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (DGP) को बलिया के एक पुलिस कॉन्स्टेबल के कथित ट्रांसपोर्ट बिजनेस की जांच करने का निर्देश दिया है.

कोर्ट ने DGP और एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (होम) को बलिया जिले के रसरा पुलिस स्टेशन के सभी पुलिस अधिकारियों और कॉन्स्टेबलों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने का भी निर्देश दिया. डीजीपी को निर्देश दिया गया है कि वो 10 दिनों के भीतर की गई कार्रवाई का ब्यौरा देते हुए कोर्ट में हलफनामा दाखिल करें.

कोर्ट ने कॉन्स्टेबल संतोष कुमार से की बात

कोर्ट ने ये टिप्पणी याचिकाकर्ता हरेंद्र यादव के ट्रक को असिस्टेंट रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिसर (ARTO), बलिया द्वारा ब्लैकलिस्ट किए जाने से जुड़ी याचिका पर सुनवाई के दौरान की. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्लैकलिस्टिंग की कार्रवाई एक सब-इंस्पेक्टर द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट के आधार पर की गई थी, जो हरेंद्र यादव और रसरा पुलिस स्टेशन में तैनात कॉन्स्टेबल संतोष कुमार के बीच मालिकाना हक के विवाद से संबंधित थी.

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कॉन्स्टेबल से बात की, जिसने बताया कि उसने अपने GPF अकाउंट से पैसे निकाले थे और अपने भाई के नाम पर हरेंद्र यादव के साथ बिजनेस शुरू किया था, जिसमें एक ट्रक खरीदा गया और उसे हरेंद्र यादव द्वारा चलाया गया. कोर्ट ने पाया कि ARTO ने मालिकाना हक के विवाद के बारे में सब-इंस्पेक्टर शिव मूर्ति तिवारी द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट के आधार पर ही गाड़ी को ब्लैकलिस्ट किया था.

बलिया के एसपी पर भी उठे सवाल

कोर्ट ने यह भी गौर किया कि बलिया के एसपी ने अपने हलफनामे में कहीं भी यह नहीं बताया था कि पुलिस स्टेशन में तैनात रहते हुए ट्रांसपोर्ट बिजनेस चलाने के लिए कॉन्स्टेबल के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई थी. हालात पर हैरानी जताते हुए कोर्ट ने कहा, ‘यह कोर्ट हैरान है कि पुलिस स्टेशन कमर्शियल गतिविधियों की जगह बन गए हैं और पुलिसकर्मी राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के बजाय बिजनेस की गतिविधियों में शामिल हो रहे हैं. अगर यही स्थिति रही तो कानून-व्यवस्था बनाए नहीं रखी जा सकती, क्योंकि पुलिस स्टेशन बिजनेस की जगह बन गए हैं’.

‘पूरा पुलिस स्टेशन कमर्शियल गतिविधियों में शामिल’

कोर्ट ने यह भी कहा कि रसड़ा पुलिस स्टेशन के इंचार्ज और बलिया के SP ने कॉन्स्टेबल के पक्ष में ARTO को रिपोर्ट सौंपकर उसे बचाया था, जबकि ARTO ने उस गाड़ी को ब्लैकलिस्ट कर दिया था और उसके ट्रांसफर पर रोक लगा दी थी. इस स्थिति को देखते हुए कोर्ट ने कहा कि ऐसा लगता है कि पूरा पुलिस स्टेशन कमर्शियल गतिविधियों में शामिल है, जैसा कि अलग-अलग अधिकारियों द्वारा दाखिल हलफनामे और उसमें कही गई बातों से साफ होता है.

11 अगस्त को मामले की अगली सुनवाई

ऐसे में कोर्ट ने 27 जुलाई के अपने आदेश में DGP को निर्देश दिया कि वो रसड़ा पुलिस स्टेशन में कथित तौर पर हो रही कमर्शियल गतिविधियों की जांच करें और वहां तैनात सभी पुलिस अधिकारियों और कॉन्स्टेबलों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का आदेश दें. कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 11 अगस्त की तारीख तय की है.

ये भी पढ़ें: खालिस्तानी आतंकी सुखविंदर ढिल्लो को इलाहाबाद HC से जमानत, 31 साल बाद हुई थी गिरफ्तारी

सोनू शर्मा

सोनू शर्मा

TV9 भारतवर्ष डिजिटल में बतौर सीनियर सब एडिटर कार्यरत हैं. यहां ट्रेंडिंग डेस्क पर काम करते हैं. न्यूज चैनल और डिजिटल मीडिया में 8 साल से अधिक का अनुभव है. पश्चिम बंगाल राज्य के कोलकाता स्थित NSHM कॉलेज से जर्नलिज्म की पढ़ाई की है. उसके बाद IBN7 (अब न्यूज18 इंडिया) में इंटर्नशिप की. फिर बतौर असिस्टेंट प्रोड्यूसर सुदर्शन न्यूज चैनल से जुड़े.

यहां स्पोर्ट्स टीम के साथ काम किया. फिर बिहार के पटना स्थित आर्यन न्यूज (बतौर प्रोड्यूसर), दिल्ली स्थित नेड्रिक न्यूज (बतौर सब एडिटर) और अमर उजाला जैसे संस्थानों में काम किया. अमर उजाला डिजिटल में बतौर सब एडिटर नेशनल और इंटरनेशनल बीट के साथ-साथ ट्रेंडिंग, ऑड, स्पोर्ट्स, लाइफस्टाइल और हेल्थ बीट पर काम किया.

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