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दिलकुशा, अफीम कोठी और अब ‘साकेत भवन’… नवाब शुजाउद्दौला के महल में होंगे देवी-देवताओं के दर्शन

दिलकुशा, अफीम कोठी और अब 'साकेत भवन'... नवाब शुजाउद्दौला के महल में होंगे देवी-देवताओं के दर्शन

अयोध्या के दिलकुशा महल की नई पहचान अब ‘साकेत भवन’ है.

उत्तर प्रदेश की सत्ता पर बीजेपी के शासन और मुख्यमंत्री के रूप में योगी आदित्यनाथ के शपथ लेने के बाद कई जिलों के नाम बदले गए, जिसमें फैजाबाद का नाम भी बदला गया, जो अब अयोध्या के नाम से जाना जाता है. यही नहीं फैजाबाद जंक्शन का नाम बदलकर अयोध्या कैंट किया गया. यहीं पर दिलकुशा महल से अफीम कोठी हुई एक ऐतिहासिक इमारत का नाम ‘साकेत भवन’ कर दिया गया. यही साकेत भवन अब चर्चा में है. चर्चा में इसलिए है, क्योंकि मुगल शासन काल में इस दिलकुशा महल को नवाब शुजाउद्दौला ने बनवाया था और अब यहां देवी-देवाताओं की मूर्ति रखी जाएगी. आइए जानते हैं दिलकुशा महल के बारे में…

नवाब शुजाउद्दौला 1754 में अवध के नवाब बने और 1775 में निधन तक अपने पद पर रहे. फैजाबाद को उन्होंने सूबे की राजधानी तब बनाया, जब 22-23 अक्टूबर 1764 को बक्सर में अंग्रेजों से हुई लड़ाई में शिकस्त के बाद उन्हें रणनीतिक तौर पर ऐसा करना मुफीद लगा. उन्हीं दिनों उन्होंने अयोध्या जिले में सरयू के तट पर कई एकड़ में आलीशान महल बनवाकर उसका नाम दिलकुशा महल रखा. 1857 की जंग जीतने के बाद अंग्रेजों ने नवाबों के वारिसों को अपमानित करने के लिए उनकी शान व शौकत के प्रतीक इस महल को अफीम की खरीद-बिक्री का केंद्र बना दिया.

‘अफीम कोठी’ के नाम से फेमस

अंग्रेजी शासन काल में भवन का नाम यहां अफीम रखे जाने के कारण ‘अफीम कोठी’ नाम से यह प्रचलित हो गया था. हालांकि आजादी के बाद से इस भवन पर किसी भी सरकार ने विशेष ध्यान नहीं दिया. न ही इसका जीर्णोद्धार कराया गया. साल 2017 में बीजेपी के सरकार में आने के बाद जब अयोध्या में विकास कार्य शुरू हुए तो सरकार का ध्यान इस महल पर भी गया. चूंकि तब यह महल अफीम कोठी के नाम से जाना जाता था तो सरकार ने इसे ‘साकेत भवन’ कर दिया और इसके जीर्णोद्धार के लिए 16़ 82 करोड़ जारी किए, ताकि यह भी पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो सके.

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अयोध्या डीएम ने दी जानकारी

साकेत भवन में अब एक म्यूजियम का निर्माण किया जा रहा है. अयोध्या के जिलाधिकारी निखिल टीकाराम फुंडे ने बताया कि ये भवन पहले नारकोटिक्स विभाग के अंडर में था. बाद में इसको टेकओवर करके पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है. इसको नया नाम ‘साकेत भवन’ दिया गया है. डीएम ने बताया कि इसके अंदर एक इंटरप्रिटेशन वॉल लगाई जाएगी, जिसमें 14 कोसी परिक्रमा मार्ग और 5 कोसी परिक्रमा मार्ग पर पड़ने वाले जितने भी धार्मिक और पौराणिक स्थल हैं, उनकी बारे में सूचना रहेगी. देवी-देवताओं की मूर्तियां भी होंगी.

डीएम निखिल टीकाराम फुंडे ने बताया कि यहां पर्यटकों के लिए मनोरंजन के लिए ओपेन एयर थियेटर होगा. एक भवन में म्यूजियम काम्पलेक्स भी बनाया जा रहा है, जिसमें ऐतिहासिक वस्तुओं एवं साहित्यों को संजोया जाएगा. साकेत सदन में इंटर प्रटेशन वॉल, इंट्रेंस प्लाजा के साथ ही परिसर में लैंड स्केपिंग कर आकर्षक फूल-पौधे व कोवोल स्टोन के पाथ-वे सहित विभिन्न कार्य किए जा रहे हैं.

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