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Kartik Puja: कार्तिक मास में आप चाहते हैं पापों से मुक्त होना, करें ये काम

हिंदू धर्म में कार्तिक मास को अत्यंत पवित्र माना गया है. इस पावन माह में पूजा, दान, तुलसी पूजन और भगवान विष्णु की कथा-आराधना का विशेष महत्व होता है. यह महीना भगवान विष्णु को समर्पित होता है. आइए जानते हैं कि किन उपायों से आप पाप से मुक्ति पा सकते हैं-

हिंदू धर्म में कार्तिक मास को अत्यंत पवित्र माना गया है. इस पावन माह में पूजा, दान, तुलसी पूजन और भगवान विष्णु की कथा-आराधना का विशेष महत्व होता है. यह महीना भगवान विष्णु को समर्पित होता है. आइए जानते हैं कि किन उपायों से आप पाप से मुक्ति पा सकते हैं-

कार्तिक मास में सुबह जल्दी उठकर स्नान करना शुभ माना जाता है. यदि संभव हो तो पवित्र नदी में स्नान करें. आप घर में भी गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं. प्रतिदिन तुलसी को दूध मिश्रित जल अर्पित करें और उसकी परिक्रमा करें. तुलसी की मिट्टी का तिलक लगाने से पापों का नाश होता है. भगवान विष्णु को तिल अर्पित कर तुलसी सहित उनकी पूजा अवश्य करें.

कार्तिक मास में सुबह जल्दी उठकर स्नान करना शुभ माना जाता है. यदि संभव हो तो पवित्र नदी में स्नान करें. आप घर में भी गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं. प्रतिदिन तुलसी को दूध मिश्रित जल अर्पित करें और उसकी परिक्रमा करें. तुलसी की मिट्टी का तिलक लगाने से पापों का नाश होता है. भगवान विष्णु को तिल अर्पित कर तुलसी सहित उनकी पूजा अवश्य करें.

मान्यता है कि इसी समय भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा से जागते हैं. इस पवित्र महीने में भगवान विष्णु और माता पार्वती की आराधना करनी चाहिए. ऐसा करने से व्यक्ति को सुख और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है.

मान्यता है कि इसी समय भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा से जागते हैं. इस पवित्र महीने में भगवान विष्णु और माता पार्वती की आराधना करनी चाहिए. ऐसा करने से व्यक्ति को सुख और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है.

शास्त्रों में कार्तिक मास को दीपदान का महीना बताया गया है. रात के समय मंदिरों, चौराहों, पवित्र नदियों, तालाबों और तुलसी के नीचे दीप जलाना शुभ माना जाता है. पीपल के वृक्ष के नीचे दिया जलाने का भी विशेष महत्व है. ऐसा करने से व्यक्ति को पुण्य और ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है.

शास्त्रों में कार्तिक मास को दीपदान का महीना बताया गया है. रात के समय मंदिरों, चौराहों, पवित्र नदियों, तालाबों और तुलसी के नीचे दीप जलाना शुभ माना जाता है. पीपल के वृक्ष के नीचे दिया जलाने का भी विशेष महत्व है. ऐसा करने से व्यक्ति को पुण्य और ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है.

कार्तिक मास में सात्विक भोजन करना अत्यंत लाभदायक माना गया है. इस अवधि में मांस, मछली, लहसुन और प्याज जैसे तामसिक भोजन से दूर रहें. दूसरों की आलोचना या ईर्ष्या जैसे नकारात्मक विचारों से बचें और मन को शांत रखें.

कार्तिक मास में सात्विक भोजन करना अत्यंत लाभदायक माना गया है. इस अवधि में मांस, मछली, लहसुन और प्याज जैसे तामसिक भोजन से दूर रहें. दूसरों की आलोचना या ईर्ष्या जैसे नकारात्मक विचारों से बचें और मन को शांत रखें.

पीपल के वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश यानी त्रिदेव का वास माना गया है. कार्तिक मास में पीपल के नीचे दीप जलाने का विशेष महत्व होता है. ऐसा करने से व्यक्ति के सभी कष्ट दूर होते हैं.  उसे तीनों देवताओं का एक साथ आशीर्वाद प्राप्त होता है.

पीपल के वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश यानी त्रिदेव का वास माना गया है. कार्तिक मास में पीपल के नीचे दीप जलाने का विशेष महत्व होता है. ऐसा करने से व्यक्ति के सभी कष्ट दूर होते हैं. उसे तीनों देवताओं का एक साथ आशीर्वाद प्राप्त होता है.

कार्तिक मास में श्रीमद्भागवत का पाठ करना  शुभ माना जाता है. इस पवित्र समय में भगवान विष्णु या माता लक्ष्मी के स्तोत्रों का नियमित पाठ करें. साथ ही, “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” जैसे मंत्रों का जाप करने से मन को शांति और ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है.

कार्तिक मास में श्रीमद्भागवत का पाठ करना शुभ माना जाता है. इस पवित्र समय में भगवान विष्णु या माता लक्ष्मी के स्तोत्रों का नियमित पाठ करें. साथ ही, “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” जैसे मंत्रों का जाप करने से मन को शांति और ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है.

Published at : 18 Oct 2025 08:00 AM (IST)

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