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असीम मुनीर करेंगे श्रीलंका और इंडोनेशिया का दौरा, भारत की बढ़ती ताकत से डरा ‘ड्रैगन’ कर रहा PAK आर्मी का इस्तेमाल

पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर 20 जुलाई से 3 देशों के एक सप्ताह के दौरे पर जाएंगे, जिसे ग्लोबल साउथ (वैश्विक दक्षिण) में इस्लामाबाद के घटते प्रभाव को पुनर्जीवित करने की एक हताश कोशिश माना जा रहा है. सीएनएन-न्यूज़18 ने पाकिस्तानी सेना के सूत्रों के हवाले से बताया कि मुनीर 20-22 जुलाई तक श्रीलंका की यात्रा करेंगे, चीन में रुकेंगे और फिर 24-26 जुलाई तक इंडोनेशिया की यात्रा पर रहेंगे.

मुनीर की ये यात्रा भले ही एक सामान्य सैन्य कूटनीति लग रही हो, लेकिन पाकिस्तान और चीन दोनों ही वैश्विक दक्षिण में भारत के बढ़ते कद से घबराए हुए हैं. ऐसे में मुनीर का ये यात्रा कार्यक्रम नई दिल्ली के बढ़ते प्रभाव को कम करने की एक बेचैन कोशिश है.

इस्लामाबाद पर दबाव डाल रहा चीन
दरअसल जी-20, ब्रिक्स और आईएमईसी जैसे मंचों पर भारत की नेतृत्वकारी भूमिका से चीन हताश है. इसलिए चुपचाप इस्लामाबाद पर दबाव डाल रहा है. यह कोई छुपी बात नहीं है कि भारतीय प्रभाव का मुकाबला करने के मामले में चीन और पाकिस्तान अक्सर मिलकर काम करते हैं और मुनीर की यात्रा योजनाएं इसी तालमेल को दर्शाती हैं.

इस्लामाबाद भले ही इसे सद्भावना यात्रा या रक्षा सहयोग प्रयास के रूप में पेश करे, लेकिन हकीकत यह है कि वैश्विक दक्षिण में पाकिस्तान की विश्वसनीयता दशकों में अपने सबसे निचले स्तर पर है. चरमराती अर्थव्यवस्था, घरेलू राजनीति, अराजकता और आतंकवाद से संबंधों के कारण अपनी वैश्विक छवि पर दाग लगने के कारण पाकिस्तानी सेना प्रासंगिक बने रहने के लिए ये कोशिश कर रही है.

भारत के खास दोस्त श्रीलंका और इंडोनेशिया को क्यों चुना ?
श्रीलंका और इंडोनेशिया को चुनकर पाकिस्तान स्पष्ट रूप से भारत के व्यापक प्रभाव क्षेत्र में खुद को शामिल करने की कोशिश कर रहा है. भारत के इन दोनों देशों के साथ अच्छे संबंध हैं. कोविड-19 के दौरान वैक्सीन कूटनीति और श्रीलंका को वित्तीय सहायता भारत द्वारा दी गई थी. 

जैसे-जैसे भारत के अमेरिका, फ्रांस और यहां तक कि अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के कुछ हिस्सों सहित प्रमुख शक्तियों से लगातार अच्छे ताल्लुकात बन रहे हैं, इन सबसे पाकिस्तान और चीन खुद को लगातार अलग-थलग महसूस कर रहे हैं. भारत ने एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के देशों के साथ रक्षा और आर्थिक साझेदारी स्थापित की है. 

ग्लोबल साउथ में भारत का बढ़ता असर
पाकिस्तान के सैन्य अभिजात वर्ग का मानना ​​है कि उच्च-स्तरीय दौरे और तस्वीरें खिंचवाने के अवसर निरंतर विकास साझेदारी और दीर्घकालिक विश्वसनीयता की जगह ले सकते हैं, लेकिन वैश्विक दक्षिण के देश अब दिखावे से प्रभावित नहीं होते. वे तेजी से उन देशों की ओर झुक रहे हैं जो स्थिरता, विकास और वास्तविक सहयोग प्रदान कर सकते हैं, जबकि पाकिस्तान ऐसा कुछ नहीं कर पाता.

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