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10 साल के बच्चे को बचाने सेप्टिक टैंक में उतरे तीन लोग, तीनों की मौत… बच्चे की जान बची

10 साल के बच्चे को बचाने सेप्टिक टैंक में उतरे तीन लोग, तीनों की मौत... बच्चे की जान बची

हादसे के बाद सदमे में लोग

उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में सकरन थाना क्षेत्र ग्राम सुकेठा में रविवार को एक दर्दनाक हादसा हो गया. इस हादसे ने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया. घटना गांव में बने सैप्टिक टैंक में घटी, जहां 10 वर्षीय विवेक गुप्ता की जान तो बच गई लेकिन उसे बचाने के प्रयास में तीन लोगों की मौत हो गई. यह हादसा लापरवाही की वजह से हुआ है.

जानकारी के मुताबिक, 10 साल के विवेक गुप्ता टैंक से पन्नी निकालने के लिए उसमें उतरे थे. टैंक में जहरीली गैस होने की वजह से वह बेहोश होकर फंस गए. बच्चा चीख-पुकार करता रहा तो आसपास के लोग इकट्ठा हो गए. सबसे पहले गांव के ही अनिल गुप्ता उसे बचाने के लिए टैंक में उतरे, लेकिन जहरीली गैस की चपेट में आकर वह भी बेहोश हो गए. इसके बाद राजकुमार और रंगी लाल भी विवेक को निकालने के लिए एक-एक कर टैंक में कूद गए, लेकिन तीनों बेहोश हो गए.

दम घुटने से तीन लोगों की मौत

गांव में अफरा-तफरी मच गई. लोगों ने पुलिस को सूचना दी. कुछ समय बाद ग्रामीणों की मदद से सभी को बाहर निकाला गया और अस्पताल पहुंचाया गया. हालांकि, डॉक्टरों ने जांच के बाद अनिल गुप्ता, राजकुमार और रंगी लाल को मृत घोषित कर दिया. वहीं, 10 वर्षीय विवेक गुप्ता को गंभीर हालत में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है, जहां उसका उपचार जारी है.

सेप्टिक टैंक में फंसने से हुआ हादसा

घटना के बाद मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. पूरे गांव में मातम का माहौल है. पुलिस प्रशासन ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है. अधिकारियों का कहना है कि यह घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. पीड़ितों के परिजनों को डीएम अभिषेक आंनद के द्वारा राज्य आपदा राहत कोष से 4-4 रुपए की आर्थिक मदद दी गईं है.

यह हादसा एक बार फिर साफ करता है कि सैप्टिक टैंकों में बिना सुरक्षा उपकरणों के उतरना कितना खतरनाक साबित हो सकता है. जहरीली गैसें पल भर में जान ले लेती हैं और अक्सर लोग बिना सोचे-समझे जान बचाने की कोशिश में खुद शिकार हो जाते हैं.

10 साल के मासूम को बचाने में गई जान

सकरन थाना क्षेत्र की इस घटना ने पूरे सीतापुर जिले को झकझोर कर रख दिया है, जहां एक ओर तीन लोगों की मौत ने परिजनों को गहरे शोक में डाल दिया है. वहीं दूसरी ओर 10 साल के मासूम की जिंदगी बच जाना कुछ राहत जरूर देता है. यह हादसा सभी के लिए सबक है कि ऐसे मामलों में तुरंत प्रशासन और विशेषज्ञों को बुलाना चाहिए ताकि बेवजह की जानें न जाएं.

वहीं इस मामलें में सीओ लहरपुर नागेंद्र चौबे ने बताया कि 3 लोगों को बेहोसी की हालत में सीएचसी लाया गया था जहां पर डॉक्टरों ने उनको मृत घोषित कर दिया.

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