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Explained: $138.8 बिलियन के कर्ज में डूबा पाकिस्तान क्यों बना UN के ‘ग्लोबल बॉरोअर्स क्लब’ का चीफ

पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र समर्थित ‘बॉरोअर्स प्लेटफॉर्म’ की गवर्निंग काउंसिल की अध्यक्षता संभाल ली है. यह मंच संप्रभु ऋण संकट का सामना कर रहे विकासशील और कमजोर अर्थव्यवस्था वाले देशों की आवाज बुलंद करने के उद्देश्य से गठित किया गया है. 12 अक्टूबर को बैंकॉक में आयोजित अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक की वार्षिक बैठकों के दौरान पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने आधिकारिक तौर पर इस समूह की कमान स्वीकार की.

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के साथ बार-बार बेलआउट पैकेज लेने का लंबा इतिहास रखने वाले पाकिस्तान के पास भारी-भरकम कर्ज को संभालने, आर्थिक मितव्ययिता लागू करने और कड़े संरचनात्मक सुधारों से गुजरने का एक व्यापक व्यावहारिक अनुभव मौजूद है. यही वजह है कि संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास सम्मेलन (UNCTAD) के सहयोग से बने इस मंच में पाकिस्तान की यह भूमिका कूटनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

क्या है ‘ग्लोबल बॉरोअर्स प्लेटफॉर्म’ और इसका उद्देश्य?

‘बॉरोअर्स प्लेटफॉर्म’ 30 से अधिक विकासशील और कर्ज में डूबे देशों का एक वैश्विक समूह है. वैश्विक वित्तीय प्रणाली में अब तक कर्ज देने वाले देशों के पास आपसी तालमेल और रणनीति बनाने के लिए ‘पेरिस क्लब’ जैसे लंबे समय से स्थापित और शक्तिशाली संगठन मौजूद रहे हैं. लेकिन कर्ज लेने वाले विकासशील देशों के पास अपने हितों की रक्षा और अनुभवों के आदान-प्रदान के लिए कोई स्थायी व समर्पित मंच उपलब्ध नहीं था. UNCTAD के समर्थन से यह मंच इसी कमी को पूरा करने का प्रयास करता है.

इस प्लेटफॉर्म के मुख्य कार्य और उद्देश्य है

ज्ञान और तकनीकी जानकारी का आदान-प्रदान: यह मंच अत्यधिक कर्ज के दबाव से जूझ रही कमजोर अर्थव्यवस्थाओं को ऋण प्रबंधन, पुनर्गठन और राजकोषीय सुधारों से जुड़े डेटा और रणनीतियों के आदान-प्रदान की सुविधा देता है.

सामूहिक सौदेबाजी नहीं: पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने स्पष्ट किया है कि यह समूह कर्जदाताओं के खिलाफ किसी ‘कार्टेल’  या आक्रामक सामूहिक सौदेबाजी के लिए काम नहीं करेगा. इसका ध्यान पूरी तरह से आपसी तकनीकी सहयोग, नीतिगत समझ और दीर्घकालिक सीखने पर केंद्रित है.

कोई स्वचालित ऋण राहत नहीं: गवर्निंग काउंसिल की कुर्सी संभालने से पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक दृश्यता जरूर मिलती है, लेकिन इससे पाकिस्तान को अपनी खुद की अरबों डॉलर की देनदारियों से कोई स्वचालित ऋण माफी या भुगतान अवकाश नहीं मिलने वाला है.

पाकिस्तान का अनुभव और 2026-27 का रोडमैप

दशकों से आर्थिक संकटों का सामना करने के कारण पाकिस्तान के पास बहुपक्षीय और द्विपक्षीय कर्जदाताओं के साथ बातचीत करने का अनूठा अनुभव है.

IMF के कड़े निर्देशों के तहत कई दशकों तक कठोर बचत उपायों, कर प्रणाली में व्यापक बदलावों और ऊर्जा क्षेत्र के घाटे को कम करने वाले सुधारों को लागू करने की व्यावहारिक जानकारी.

पाकिस्तान इस मंच के माध्यम से अगले दो वर्षों की कार्य-योजना का नेतृत्व करेगा. इसमें विकास के लिए नए वित्तीय मॉडलों पर जोर दिया जाएगा, ताकि कर्ज किसी देश के लिए आर्थिक जाल  बनने के बजाय टिकाऊ विकास का साधन बन सके.

पाकिस्तान ने बहुपक्षीय संस्थानों (विश्व बैंक, IMF) और ‘पेरिस क्लब’ से बाहर के देशों (जैसे चीन) से लिए गए भारी द्विपक्षीय ऋणों के बीच एक जटिल संतुलन बनाने का तरीका सीखा है.

पाकिस्तान के कर्ज का पूरा बही-खाता

पाकिस्तान इस समय अत्यधिक वित्तीय दबाव और विदेशी मुद्रा संकट के दौर से गुजर रहा है. देश का कुल बाहरी कर्ज और देनदारियां $138.8 अरब डॉलर के विशाल आंकड़े तक पहुंच चुकी हैं.

बहुपक्षीय कर्जदाता-विश्व बैंक का $22 अरब कर्ज, एशियाई विकास बैंक (ADB) का $16.8 अरब कर्ज और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) का $9.2 अरब है.

द्विपक्षीय कर्ज- कुल बाहरी कर्ज में द्विपक्षीय कर्ज की हिस्सेदारी 36% से अधिक है. इसमें ‘पेरिस क्लब’ से बाहर के देशों का बड़ा योगदान है. अकेले चीन का कर्ज $23.5 अरब (कुल का 22%) है. इसके बाद सऊदी अरब का नंबर आता है, जिसका कर्ज लगभग $5.5 अरब है.

व्यावसायिक व बॉन्ड कर्ज: वाणिज्यिक कर्ज (मुख्यतः चीनी बैंकों से) लगभग $7.5 अरब है, जबकि अंतरराष्ट्रीय यूरोबॉन्ड और सुकुक (इस्लामिक बॉन्ड) की हिस्सेदारी $7 अरब के करीब है.

रीपेमेंट की गंभीर चुनौती 

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल कर्ज का विशाल आकार नहीं, बल्कि इसे चुकाने की दैनिक व वार्षिक लागत है. पाकिस्तान को अपने विदेशी कर्ज की किस्तें और ब्याज चुकाने के लिए सालाना $21.5 अरब से $23 अरब की तत्काल जरूरत होती है.

इस सालाना देनदारी का लगभग $12 अरब का हिस्सा मुख्य रूप से चीन, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से मिलने वाली द्विपक्षीय “फ्रेंडली डिपॉजिट्स” पर निर्भर करता है. इन फंडों को वास्तव में लौटाने के बजाय नए करारों के जरिए बार-बार आगे बढ़ा दिया जाता है.

वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों में हुई बढ़ोतरी के कारण पाकिस्तान के विदेशी सार्वजनिक कर्ज के केवल ब्याज भुगतान में 80% से ज्यादा का उछाल आया है, जो $3.59 अरब तक पहुंच गया है. घरेलू मोर्चे पर स्थिति और भी गंभीर है. सरकार के कुल बजटीय राजस्व का लगभग 40% से 50% हिस्सा केवल पुराने कर्ज का ब्याज चुकाने में खर्च हो जाता है.

पाकिस्तान का ‘ग्लोबल बॉरोअर्स प्लेटफॉर्म’ की कमान संभालना एक विरोधाभास और अवसर दोनों को दर्शाता है. एक तरफ जहां यह स्थिति दिखाती है कि अत्यधिक कर्ज के भंवर में फंसा देश अपने व्यावहारिक कड़वे अनुभवों के बल पर विकासशील दुनिया का प्रतिनिधि बन रहा है, वहीं दूसरी तरफ यह बढ़ती वैश्विक ब्याज दरों और सख्त शर्तों के खिलाफ वैश्विक दक्षिण की एकजुटता की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है. पाकिस्तान के लिए आगामी वर्ष अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी साख सुधारने और घरेलू स्तर पर अपने राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने का एक बड़ा इम्तिहान साबित होंगे.

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