मेरठ में 16 हजार संपत्तियों पर संकट, सड़क पर उतरे लोग, मंत्री बोले- टेंशन ना लें, हम रि-सर्वे कराएंगे


मेरठ में 16 हजार संपत्तियों पर एक्शन
सुप्रीम कोर्ट के अवैध और अनधिकृत निर्माणों के बारे में आदेश के बाद मेरठ में हलचल बढ़ गई है. कोर्ट ने जोन-A में पहचाने गए 16,726 ढांचों को खाली कराने, सील करने और गिराने का निर्देश दिया है. इस आदेश के बाद प्रभावित निवासियों के बीच चिंता और विरोध की आवाजें उठने लगी हैं.
लोगों ने इस मामले को लेकर आंदोलन शुरू कर दिया है. विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे डॉ. रविंद्र तोमर ने जिलाधिकारी डॉ. वी.के. सिंह से मुलाकात की. उनके अनुसार, बैठक के दौरान डीएम ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का विरोध करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि जनता की कोई भी मांग लिखित रूप में सौंपी जाए ताकि उन्हें सरकार के स्तर पर भेजा जा सके.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जनता में चिंता
21 सितंबर के सुप्रीम कोर्ट के आदेश में एक सर्वे का ज़िक्र है जिसमें मेरठ को चार ज़ोन में बांटा गया था. रिपोर्ट के अनुसार, जोन-A में 16 टीमों द्वारा किए गए निरीक्षण और सर्वे में 16,726 ढांचों की पहचान अवैध या अनधिकृत के तौर पर की गई. इनमें 12,907 आवासीय, 874 मिश्रित-उपयोग और 2,945 गैर-आवासीय ढांचे शामिल हैं. कोर्ट ने निर्देश दिया है कि इन निर्माणों के संबंध में तुरंत कार्रवाई की जाए.
कोर्ट ने यह भी आदेश दिया है कि अगली सुनवाई में जोन B, C और D की स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट पेश की जाए. इस बीच, मेरठ के बाहरी इलाके उल्देपुर में अवैध आवासीय कॉलोनियों के विकास से जुड़े पहलुओं की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस सुधांशु धूलिया की अध्यक्षता में एक न्यायिक आयोग का गठन किया गया है.
मंत्री सोमेंद्र तोमर ने लोगों को दिलाया भरोसा
मंत्री सोमेंद्र तोमर का कहना है कि लोगों की चिंताओं को समझा जा सकता है. दोबारा सर्वे किया जाएगा. सरकार का रुख स्पष्ट करते हुए, उत्तर प्रदेश के मंत्री डॉ. सोमेंद्र तोमर ने माना कि लोगों की चिंताएं जायज हैं. उन्होंने कहा कि MDA (मेरठ विकास प्राधिकरण) दोबारा सर्वे करेगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जनता को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े. डॉ. सोमेंद्र तोमर ने पहले मेरठ में प्रभावित संपत्तियों के दोबारा सर्वे के बारे में बात की थी. उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया है कि सरकार प्रभावित निवासियों और व्यापारियों के पुनर्वास के लिए प्रयास करेगी.
प्रशासन के सामने चुनौती
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद, प्रशासन के सामने कोर्ट के निर्देशों को लागू करने की चुनौती है, साथ ही प्रभावित लोगों की समस्याओं और उनके दस्तावेजों की स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं. इस लेकर दोबारा सर्वे की घोषणा को प्रभावित लोगों की स्थिति का फिर से आकलन करने की दिशा में एक कदम के रूप में देखा जा रहा है.
क्या दोबारा होगा सर्वे?
प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों से अपनी मांगें लिखित रूप में देने को कहा है, जबकि मंत्री ने दोबारा सर्वे के बारे में भरोसा दिलाया है. अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि दोबारा सर्वे की प्रक्रिया कब शुरू होती है और उससे मिलने वाली रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन आगे क्या कदम उठाता है.





