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’31 फरवरी 2023 को कल्लू की हुई मौत…’ महोबा में सरकारी कागजों में तारीख देखकर बुजुर्ग विधवा पत्नी का चकराया दिमाग

’31 फरवरी 2023 को कल्लू की मौत हो गई है…’ आपको यह पढ़कर थोड़ा अटपटा लगेगा, लेकिन उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में प्रशासनिक लापरवाही की वजह से कुछ ऐसा ही हुआ है. यहां एक बुजुर्ग विधवा महिला अपने पति की मौत के ढाई साल बाद भी मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है. लेकिन अफसरों ने बुजुर्ग महिला की परेशानी तब और बढ़ा दी, जब अपने आदेश में उन्होंने महिला के पति की मौत की तारीख 31 फरवरी 2023 लिख दी.

महिला के पति कल्लू का निधन काफी समय पहले हो चुका है, लेकिन तमाम आवेदन और गुहार के बावजूद अब तक उसे आधिकारिक मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं मिल पाया. जब मामला अधिकारियों के संज्ञान में आया और आदेश जारी हुआ, तो उसमें ऐसी गंभीर गलती कर दी गई, जिसने पूरे सिस्टम की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए.आदेश में पति की मृत्यु की तारीख 31 फरवरी 2023 दर्ज कर दी गई, जबकि फरवरी महीने में 31 तारीख होती ही नहीं है. इस चूक के कारण महिला की परेशानी और बढ़ गई है.

मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए बुजुर्ग पत्नी विभागों के लगा रही चक्कर

पीड़िता का कहना है कि पति की मौत के बाद से ही वह आर्थिक और मानसिक रूप से परेशान है. मृत्यु प्रमाण पत्र न मिलने के कारण उसके कई जरूरी काम अटके हुए हैं. हर बार दफ्तर जाने पर उसे सिर्फ आश्वासन मिलते हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो रहा.

इस मामले ने प्रशासन की कार्यप्रणाली और लापरवाही को उजागर कर दिया है. स्थानीय लोगों का कहना है कि जब अधिकारी साधारण सी तारीख तक सही नहीं लिख पा रहे हैं, तो आम आदमी को समय पर न्याय और सुविधाएं कैसे मिलेंगी. पीड़ित महिला ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द सही तारीख के साथ मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया जाए, ताकि वह सम्मानपूर्वक अपना जीवन आगे बढ़ा सके.

यह पूरा मामला सदर तहसील क्षेत्र के मवई खुर्द गांव का है. यहां की निवासी बुजुर्ग महिला पाना के पति कल्लू की मृत्यु 31 जनवरी 2023 को हो गई थी. पति की मौत के बाद पाना ने नियमानुसार मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए ग्राम पंचायत सचिव के पास आवेदन किया. पंचायत सचिव से होते हुए मामला सहायक खंड विकास अधिकारी और खंड विकास अधिकारी तक पहुंचा, जहां जांच के बाद रिपोर्ट उपजिलाधिकारी कार्यालय भेज दी गई.

लेकिन यहां से शुरू हुई लापरवाही की सबसे बड़ी कड़ी. उपजिलाधिकारी न्यायालय की ओर से मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने के लिए जो आदेश दिए गए, उनमें मृतक की मृत्यु तिथि 31 फरवरी 2023 दर्शाई गई, जबकि फरवरी महीने में 31 तारीख होती ही नहीं है. इस त्रुटिपूर्ण आदेश की जानकारी मिलने के बाद पीड़ित महिला सही तारीख का प्रमाण पत्र बनवाने के लिए लगातार अधिकारियों के चक्कर काट रही है, लेकिन उसे सिर्फ आश्वासन ही मिल रहे हैं.

मृतक की भाभी क्या बोली?

मृतक की भाभी भगवतिया और ग्राम प्रधान विपिन सिंह का कहना है कि कल्लू की मौत 31 जनवरी 2023 को हुई थी, इसके बावजूद पंचायत सचिव की लापरवाही से कभी न आने वाली तारीख दर्ज कर दी गई. हैरानी की बात यह है कि निचले स्तर की इस गलती पर उच्च अधिकारियों ने भी बिना ध्यान दिए हस्ताक्षर कर दिए.

मृतक के बेटे रवि, बहू नीलम और पत्नी पाना ने बताया कि पंचायत सचिव ने पहले उन्हें काफी परेशान किया और बाद में गलत तारीख के साथ आवेदन आगे बढ़ा दिया. ढाई साल से ज्यादा समय बीतने के बावजूद मृत्यु प्रमाण पत्र न मिलने से परिवार को किसी भी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और बदतर हो गई है.

मामला सामने आने के बाद सदर विधानसभा से भाजपा विधायक राकेश गोस्वामी ने एसडीएम सदर शिवध्यान पांडेय से फोन पर बात कर कड़ी नाराजगी जताई. विधायक ने सवाल उठाया कि जब 31 फरवरी जैसी कोई तारीख होती ही नहीं, तो इस तरह का आदेश कैसे जारी किया गया. उन्होंने पूरे मामले की जांच कर लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने और मृतक की सही मृत्यु तिथि अंकित कर तत्काल प्रमाण पत्र जारी करने के निर्देश दिए हैं.

रिपोर्ट- विराग पचौरी

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