2027 के यूपी चुनाव को अखिलेश यादव जीवन-मरण का इलेक्शन क्यों बता रहे हैं?


सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव.
समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो अखिलेश यादव ने 2027 के यूपी चुनाव को जीवन-मरण का चुनाव बताया है. कार्यकर्ताओं से बात करते हुए अखिलेश ने कहा कि यह चुनाव जीवन-मरण का है. सभी कार्यकर्ता बूथ पर फोकस करें, तभी जीत मिल सकती है. देश के सबसे बड़े राज्य यूपी में मई 2027 से पहले विधानसभा के चुनाव होने हैं. अखिलेश यादव की पार्टी सपा इस वक्त यूपी में विपक्ष की भूमिका में है. वहीं लोकसभा सांसदों के लिहाज से यूपी में सबसे बड़ी पार्टी है.
इसके बावजूद अखिलेश 2027 के विधानसभा चुनाव को जीवन-मरण का चुनाव बता रहे हैं. सवाल उठ रहा है कि आखिर अखिलेश यादव ऐसा क्यों कह रहे हैं?
समाजवादी पार्टी के फंड की भारी कमी
एडीआर के मुताबिक 2016 में जब उत्तर प्रदेश में समाजावादी पार्टी की सरकार थी, तब उसकी कुल संपत्ति 634 करोड़ के आसपास थी, लेकिन अब हालात बदल गए हैं. 2025 के आंकड़ों के मुताबिक अब समाजवादी पार्टी की कुल संपत्ति 503 करोड़ के आसपास है. यानी पिछले 9 सालों में इसमें करीब 131 करोड़ की कमी आई है.
अखिलेश यादव कई मौकों पर फंड कमी की बात कह चुके हैं. हाल ही में उद्योगपतियों को साधने के लिए अखिलेश यादव ने रिलायंस समूह से जुड़े धनराज नथवानी को राज्यसभा भेजा है. अगले चुनाव में अगर पार्टी की हार होती है तो उसकी आर्थिक स्थिति और ज्यादा कमजोर हो सकती है.
समाजवादी पार्टी में टूट का डर एक अहम कारण
2022 के बाद क्षेत्रीय पार्टियां लगातार टूट रही है. चुनाव में कमजोर होने के बाद शिवसेना, एनसीपी और तृणमूल कांग्रेस जैसी मजबूत क्षेत्रीय पार्टियां टूट चुकी है. वहीं वाईएसआर कांग्रेस, बीजेडी और एआईएडीएमके जैसी पार्टियों में बगावत हो चुकी है.
अखिलेश यादव को भी यह डर सता रहा है. उन्होंने पिछले दिनों एक बयान में कहा था कि मेरी पार्टी इसलिए नहीं टूटी, क्योंकि, यहां पर कई पुराने वफादार नेता हैं और परिवार के लोग सांसद हैं.
लगातार 3 चुनाव हारने के बाद BSP साइडलाइन
उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की तरह बहुजन समाज पार्टी भी मुख्यधारा की पार्टी रही है. हालांकि, 2012, 2017 और 2022 के चुनाव में हारने के बाद पार्टी साइडलाइन है. इस वक्त बीएसपी के पास न तो एक भी विधायक हैं और न ही एक भी सांसद.
बीएसपी के अधिकांश पुराने नेता या तो बीजेपी में चले गए या समाजवादी पार्टी और कांग्रेस में. काडर स्तर पर भी पार्टी की स्थिति कमजोर है. समाजवादी पार्टी को भी यह डर सता रहा है.
दलितों को साधने के लिए आखिरी चुनाव का दांव
2024 के लोकसभा चुनाव के वक्त भी अखिलेश यादव ने आखिरी चुनाव का नारा दिया था. अखिलेश यादव ने उस चुनाव का नाम संविधान मंथन दिया. अखिलेश का कहना था कि अगर इस चुनाव में बीजेपी जीतती है तो आगे से चुनाव नहीं होंगे. संविधान खत्म हो जाएंगे.
इसका फायदा समाजवादी पार्टी गठबंधन को मिला. यूपी की 43 सीटों पर सपा गठबंधन ने जीत हासिल की. सपा यूपी की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. ऐसे में जीवन-मरण वाला दांव भी इसी से जोड़कर देखा जा रहा है.
जनता में अविश्वास पैदा होने का डर
अखिलेश यादव ने एनडीए को पीडीए ही हराएगा का नारा दिया है. अगर अखिलेश 2027 के चुनाव में भी बीजेपी को नहीं हरा पाते हैं तो यह संदेश जाएगा कि विधानसभा चुनाव में अखिलेश बीजेपी को नहीं हरा सकते हैं.यह स्थिति समाजवादी पार्टी के लिए ठीक नहीं है.





