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राम मंदिर में चढ़ावे की गिनती से चंपत राय के रोल तक… TV9 के सवालों पर क्या बोले नृपेंद्र मिश्रा?

राम मंदिर में चढ़ावे की गिनती से चंपत राय के रोल तक... TV9 के सवालों पर क्या बोले नृपेंद्र मिश्रा?

राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा.

अयोध्या के राम मंदिर में कथित दान घोटाले को लेकर राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने टीवी9 भारतवर्ष से खास बातचीत में बड़ी जानकारी दी. उन्होंने मंदिर की निगरानी व्यवस्था, काउंटिंग रूम के कामकाज और ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय पर लग रहे आरोपों पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि राम मंदिर आस्था का केंद्र है. आज इस्तेमाल किए जा रहे घोटाला शब्द की बात तो बहुत बड़ी है लेकिन वहां कुछ छोटी सी भी घटना हो तो बड़ी गंभीर बात है.

नृपेंद्र मिश्रा ने कहा, अगर वहां किसी व्यक्ति को जानवर से भी असुविधा हो जाए, उससे हमें बहुत दुख होता है. लोग वहां गहरी आस्था के साथ आते हैं. मैं अक्सर लोगों से पूछता हूं कि मंदिर आकर आपको कैसा लगा. जब मैं लोगों से पूछता हूं कि कोई परेशानी हुई? तो वो कहते हैं कि भगवान के दर्शन में क्या परेशानी. अभी जो जानकारी मिली है वो शुरुआती है. मैं समिति में हूं. काउंटिंग रूम में करीब 44 लोग काम करते हैं. इसमें से अधिकांश दैनिकसेवा में हैं.

काउंटिंग रूम की निगरानी जरूरी

उन्होने कहा, ये शब्द इसलिए इस्तेमाल कर रहा हूं क्योंकि काउंटिंग रूम में किसी तरह का समझौता ना हो. इनकी निगरानी जरूरी है. जांच चल रही है. मुझे ये सूचना मिली है कि कुछ धनराशि किसी कक्ष के पास टॉयलेट है, वहां मिली. इसकी सूचना चंपत राय को मिली तो वहां पहुंचे. उसके बाद जांच शुरू हुई. उन्होंने अपने सहयोगियों से मंत्रणा करके यह उचित समझा कि राज्य सरकार एसआईटी गठित करे और वो उसकी जांच करे.

सवाल है कि उसका हिसाब कैसा होगा?

चर्चा है कि आभूषण भी गायब हुए हैं? इस सवाल पर उन्होंने कहा, इसको दो हिस्से में देखा जाना चाहिए. एक तो जो लोग रसीद लेकर दान करते हैं, उसका हिसाब रहता है. ये दान बैंक में जमा होता है. दूसरा हिस्सा वो है जो दानपात्र में रुपये के अलावा भगवान के सामने लोग अपने आभूषण दान करते हैं, अगर वह काउंटिंग के समय पलटी गई होगी तो वहां निकलेगा. अब सवाल है कि उसका हिसाब कैसा होगा?

नृपेंद्र मिश्रा ने कहा, बाहर के लोग ये अनुमान लगाते हैं कि ऐसी परिस्थिति पैदा हुई कि जो पैसा ले जाना चाहता था उसे मौका नहीं मिला तो वह टॉयलट के पास छोड़ गया होगा. इन सबके बीच अहम बात ये है कि हमें श्रद्धालुओं की आस्था को कायम रखना होगा.

चंपत राय को लेकर क्या बोले नृपेंद्र मिश्रा?

चंपत राय को लेकर क्या धारणा बनाई जानी चाहिए? वो इसमें शामिल हैं या वो निष्कलंक हैं? इन सवालों पर उन्होंने कहा, वो मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे हैं. उन्होंने हर परिस्थिति का सामना किया है. उनका कोई बैंक अकाउंट नहीं है. मैं नहीं समझता कि अगर ऐसा हुआ है तो वो इसमें शामिल हैं. वो प्रबंधन के मुखिया हैं. मुखिया होने के कारण लोग आज कहने की स्थिति में हैं लेकिन ऐसा नहीं है. मुख्य कारण ये है कि पूरे मंदिर परिसर में निगरानी की जो व्यवस्था है वह या तो है नहीं, अगर है तो बहुत लचर है.

मंदिर परिसर में 800 सीसीटीवी कैमरे

नृपेंद्र मिश्रा ने कहा, मंदिर परिसम में करीब 800 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं. कंट्रोल रूम है, जिसे पुलिस देखती है लेकिन मैं ये नहीं समझता कि सीसीटीवी का सही उपयोग हुआ है. अगर काउंटिंग रूम में सीसीटीवी लगे हैं और कहा ये जा रहा है कि सीसीटीवी से ही पता लगा है कि ऐसा हुआ है तो सही बात ये है कि सीसीटीवी की निगरानी प्रभावित हुई है.

टीवी9 के सवाल- चंपत राय ने कई गुना ज्यादा कीमत पर जमीन खरीदी? इस पर उन्होंने कहा, जो जमीन खरीदी गई थी, वो पहली वार्निंग थी. जिस सावधानी से करना चाहिए थी वो नहीं हुई. कुछ जमीनें जो जरूरी थीं वो हमें लेनी थीं. अयोध्या में एक कठिनाई है कि वहां ज्यादातर जमीन नजूल की है. नतीजा क्या है कि नेगोशिएट तो मैं आपसे करूं लेकिन रिकॉर्ड में आपका नाम नहीं है. अब ट्रस्ट के सामने का विकल्प क्या है. कुछ कठिनाइयां थी लेकिन मैं कहूंगा कि उस समय नऔर ट्रांसपैरेंट होता तो और अच्छा था. अब जो ये सेकेंड वार्निंग है. वो अंतिम है. जमीन की खरीद में सावधानी नहीं बरती गई. खरीद की प्रक्रिया और पारदर्शी होना चाहिए था.

दान को लेकर सभी की जिम्मेदारी तय

उन्होंने कहा कि दान को लेकर सभी की जिम्मेदारियां तय है. बैंक की क्या जिम्मेदारी है. यह भी लिखा है कि ट्रस्ट की क्या जिम्मेदारी है. यहां तक कि ये है कि दान की काउंटिंग में शामिल लोगों के कपड़ों में जेब ना हो.

मिंट के साथ एग्रीमेंट पर क्या बोले?

टीवी9 के सवाल- बहुमूल्य धातुओं (सोना-चांदी आदि) को लेकर सिक्योरिटी और मिंट कॉरपोरेशन को भूमिका निभानी थी… इस पर नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि ये वित्त मंत्रालय के नियंत्रण में है. मिंट अनेक जगहों पर काम करता है. मिंट के पास ही तिरुपति की पूरी जिम्मेदारी है. वही बहुमूल्य धातुएं रिसीव करते हैं. वही उसका वेरिफिकेशन करते हैं. फिर उसको पैक करके वो हैदराबाद ले जाते हैं फिर पिघलाकर आप जिस तरह से लेना चाहते हैं वो देते हैं. यहां तक कि ये व्यवस्था है कि उसका मूल्य दे सकते हैं. ये एग्रीमेंट चल रहा है. ये व्यवस्था मिंट के साथ राम मंदिर के लिए भी प्रस्तावित थी. मिंट के अफसर तीन साल पहले यहां आए और देखने के बाद एग्रीमेंट का प्रारूप दिया. अब ये प्रस्ताव क्यों नहीं हुआ ये मैं नहीं जानता है.

जब निगरानी नहीं होगी तो अव्यवस्था होगी

मामले की जांच और एफआईआर को लेकर उठ रहे सवालों पर उन्होंने कहा कि अभी एसआईटी की जांच जारी है. जब निगरानी नहीं होगी तो अव्यवस्था होगी. अनेक प्रकार के ऐसे कार्य वहां होते हैं, जिसमें राजस्व मिल सकता है. बहुत सी चीजें नीलाम होती हैं. भगवान जो कपड़ा पहनते हैं वो नीलाम हो सकते हैं. अब वो कहां हैं वो नीलाम क्यों नहीं हो रहा है, नहीं पता.

एफआईआर क्यों नहीं हो रही है?

मैं व्यवस्था के अंदर नहीं हूं. आज की तारीख में 30 लोग जो भगवान के शृंगार का काम देखते हैं, मैंने जब भी वहां पुजारियों से पूछा सब ठीक है तो उन्होंने कहा कि सब ठीक है. सवाल उठ रहा है कि जब इतना सबकुछ सामने आ रहा है तो एफआईआर क्यों नहीं हो रही है? इस पर उन्होंने कहा कि इसका उत्तर शृद्धालु भी जानना चाहते हैं. मेरे अनुमान से अगर ट्रस्ट ने पहले दिन ही जानकारी के बाद एफआईआर कराई होती तो वो अधूरी होती. उसमें ये भी सवाल उठता कि किसी का नाम होगा या अज्ञात पर.

उन्होंने कहा, जो लोग उस समय उसकी प्रारंभिक जानकारी कर रहे थे, उन्होंने सोचा कि हम राज्य सरकार से अनुरोध करें कि वो एसआईटी बनाए. न्यायिक जांच शुरुआत करने में ही तीन महीने लग जाते. यहां ये एडवांटेज है कि जांच की रिपोर्ट आने के बाद उसे एफआईआर में कन्वर्ट कर सकते हैं. ये प्रोसेस से हटकर नहीं है. एफआईआर करते तो थाने की पुलिस जांच करती है. अभी जो जांच हो रही है उसमें बड़े अधिकारी हैं. सवाल किए जा सकते हैं, ये स्वाभिवक है. लोग कह सकते हैं कि सीधा-सीधा एफआईआर कर सकते हैं. अगर वो करते तो उसमें सप्लीमेंट्री एफआईआर होतीं.

क्या चंपत राय से दूरी रखी जा रही?

मुख्यमंत्री के अयोध्या पहुंचने पर चंपत राय नहीं बल्कि उनके प्रतिनिधि मौजूद रहेंगे, क्या वो जांच के दायरे में होंगे इसलिए उनसे दूरी रखी जा रही है? इस पर नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि ऐसा नहीं है, चंपत राय थोड़ा अस्वस्थ हैं. मैंने देखा है उनको. वह हर परिस्थिति में मुख्यमंत्री का स्वागत करेंगे. मैंने उनसे बात नहीं की है. ये बिल्कुल नहीं होगा कि उनको किसी दोष के कारण दूर रखा जाए. उनको दूर क्यों रखा जाएगा.बृजभूषण शरण सिंह के बयानों पर उन्होंने कहा कि मैं कोई टिप्पणी नहीं करूंगा. वो बहुत सम्मानित हैं और निष्ठावान हैं. ये जरूर कहूंगा कि शायद ये बात उन्होंने किसी व्यक्ति को ध्यान में रखकर न कहकर धनराशि को लेकर कही होगी.

प्रशांत द्विवेदी

प्रशांत द्विवेदी

प्रशांत कुमार द्विवेदी ने साल 2017 में अमर उजाला कानपुर से करियर की शुरुआत की. अगस्त 2019 से अक्टूबर 2021 तक अमर उजाला जम्मू कश्मीर में काम किया.

इसके बाद एक साल अमर उजाला नोएडा में काम करने का मौका मिला. साल 2022 में आज तक डिजिटल में बतौर चीफ सब एडिटर ज्वाइन किया.
सीएसजेएमयू कानपुर से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री हासिल कर चुके प्रशांत सुरक्षा, कश्मीर मामले, क्राइम और पॉलिटिक्स की खबरों पर काम करते हैं. वर्तमान में TV9 डिजिटल में चीफ सब एडिटर हैं.

नौकरी के अलावा खेल-कूद और किताबें पढ़ने में दिलचस्पी है. विशेष रूप से फिलासफी. इसके साथ ही ट्रेवलिंग पसंद है, खासतौर पर माउंटेन एरियाज में समय बिताना बहुत पसंद है. इन सबके बीच गांव, बेजुबानों और बुजुर्गों से विशेष लगाव रखते हैं.

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