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ये कहां लिखा है चार्टर में हराम वाले ही चलेंगे, राम वाले नहीं… 40-50 लाख में कथा पर बोले कुमार विश्वास

ये कहां लिखा है चार्टर में हराम वाले ही चलेंगे, राम वाले नहीं… 40-50 लाख में कथा पर बोले कुमार विश्वास

TV9 नेटवर्क के मंच पर ‘व्हाट इंडिया थिंक्स टुडे समिट-2026’ कार्यक्रम में कथावाचक कुमार विश्वास ने अपनी कथा की फीस को लेकर बात की. कुमार से पूछा गया कि ​राम कथा के लिए कुमार विश्वास को बुलाना है तो 40-50 लाख रुपए का इंतजाम तो होना चाहिए. तो क्या आपके माध्यम से भगवान राम एलीट हो गए हैं? इस सवाल पर उन्होंने कहा कि मेरे किसी कार्यक्रम में पैसा या टिकट नहीं लगता है, जनता फ्री में आती है.

कुमार विश्वास ने साहित्य में गरीबी का जिक्र करते हुए कहा, ‘1940-50 में हिंदी साहित्य में एक बड़ी बीमारी पैदा हुई, वह यह थी कि अगर आप दरिद्र नहीं हैं तो अच्छे साहित्यकार नहीं हैं. आपके पास गरीबों के किस्से होने चाहिए कि आखिर दोनों में तो, भाई साहब, दवा के लिए भी पैसे नहीं थे. अगर आपने अच्छा खाना खा लिया तो हाउ डेयर यू, आपने खाना कैसे खा लिया.’

उन्होंने आगे कहा कि इसी दिल्ली में किसी स्टेडियम में एक गायक आता है, वह अपने गानों में शराब का बार-बार नाम लेता है और 6-6 लाख का टिकट बिकता है, तो आप कभी नहीं पूछते कि उसने ऐसा क्यों किया.

इसी कड़ी में उन्होंने अयोध्या का एक किस्सा सुनाया. कुमार विश्वास ने कहा, ‘हम अयोध्या पहुंचे तो किसी ने कहा कि ये राम वाले चार्टर में आए हैं, तो मैंने उनसे पूछा कि यह किस शास्त्र में लिखा है कि चार्टर में हराम वाले चलेंगे, राम वाले नहीं. पहले रोडवेज में चलते थे, फिर थर्ड क्लास में चलते थे, अब आयोजक कह रहा है कि चार्टर ले जाओ तो मुझे क्या फर्क पड़ता है.’

उन्होंने कहा कि राम का नाम लेने वाले दिव्य होने के साथ-साथ भव्य हो गए हैं, इससे किसी को परेशानी हो रही है तो वह रोता रहे, हमें क्या.

इस कार्यक्रम में उन्होंने धर्म पर बात करते हुए कहा कि लोग अक्सर पूछते हैं कि धर्म क्या है. उनके मुताबिक इसे समझने के लिए आंख का उदाहरण लिया जा सकता है- आंख मिलाई भी जाती है, आंख दिखाई भी जाती है और आंख फंसाई भी जाती है, यानी एक ही चीज के कई उपयोग हो सकते हैं. लेकिन अगर आंख देख ही न सके तो उसका कोई अर्थ नहीं रह जाता.

इसी तरह मनुष्य भी पहले एक सामान्य जीव था, लेकिन जब समाज बना तो उसकी आध्यात्मिक चेतना के लिए कुछ नियम तय किए गए. उन्हीं नियमों और मर्यादाओं को धर्म कहा गया, जो इंसान को इंसान बनाए रखते हैं और उसे पशुता से दूर रखते हैं. बाकी जो कुछ भी हो रहा है, वह उसी के आसपास का विस्तार भर है.

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