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मूंगफली बीज कहां गया? महोबा में 2000 क्विंटल बीज गायब, किसानों को बांटना था; DM ने दिए जांच के आदेश

मूंगफली बीज कहां गया? महोबा में 2000 क्विंटल बीज गायब, किसानों को बांटना था; DM ने दिए जांच के आदेश

डीएम को ज्ञापन सौंपते किसान

Mahoba News: उत्तर के महोबा में कृषि विभाग के जिम्मेदारों पर मूंगफली बीज वितरण में धांधली कर हजारों क्विंटल मूंगफली बीज गायब करने का सनसनीखेज आरोप लगा है. मामला सामने आने के बाद कृषि विभाग में हड़कंप मच गया है. जिले के जैतपुर ब्लॉक में 2500 क्विंटल मूंगफली के सापेक्ष महज 500 क्विंटल मूंगफली वितरित की गई. अब 2 हजार क्विंटल मूंगफली कहां चली गई यह सवाल कृषि विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्न खड़े कर रहा है. यह महज एक ब्लॉक का आकंड़ा सामने में आया है जबकि जिले में चार ब्लॉक हैं. फिलहाल डीएम ने एसडीएम के नेतृत्व में टीम गठित कर जांच के आदेश दिए हैं.

दरअसल, जिले के अन्नदाताओं को इस वर्ष 10 हजार क्विंटल मूंगफली का बीज वितरित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसमें सीएससीएआर डिस्ट्रिक्ट फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड जैतपुर को 2500 क्विंटल मूंगफली वितरण का लक्ष्य दिया गया था, लेकिन संगठन को लक्ष्य के सापेक्ष महज 500 क्विंटल मूंगफली दी गई है, जबकि 2 हजार क्विंटल मूंगफली अभी तक नहीं दी गई है. जैतपुर ब्लॉक के एफपीओ भुवेन्द्र चतुर्वेदी बताते हैं कि भारत सरकार द्वारा किसानों को जैतपुर ब्लॉक में 2500 क्विंटल मूंगफली वितरित किये जाने का लक्ष्य मिला था. लेकिन समय पर पूरा बीज नहीं मिलने के कारण इसे पूरा नहीं किया जा सका है.

किसानों तक नहीं पहुंचा बीज

वहीं, इस मामले में गोदाम प्रभारी से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि स्टॉक तो खत्म हो गया है. इसके अलावा जब इसकी अलग-अलग तरीकों से जांच की गई तो पता चला कि बीज को अन्य कर्मचारियों द्वारा बंटवा दिया है. अब सवाल यह है कि आखिर ये बीज कहां बाटा गया. सरकार द्वारा मूंगफली निःशुल्क दी गई है लेकिन एफपीओ अपनी सदस्यता शुल्क लेते हैं. मामला सामने आने के बाद जिलाधिकारी गजल भारद्वाज द्वारा एसडीएम के नेतृत्व में टीमों का गठन कर जांच के आदेश दिए गए हैं.

किसानों का कहना है कि मूंगफली बीज का जिले में बड़ा घोटाला हुआ है जिसका ज्ञापन आज जिलाधिकारी को दिया गया है. नियमानुसार एक हेक्टेयर में एक क्विंटल मूंगफली दी जानी है जबकि किसी किसान को 20 किलो तो किसी किसान को मूंगफली दी ही नहीं गई है. इसमें किसानों का शोषण किया गया जबकि कीटनाशक दवा में किसानों को ठगा गया है. इसकी जांच होनी चाहिए.

खुलासे के बाद मचा हड़कंप

मामले को लेकर जिले के उप कृषि निर्देशक बताते हैं कि मूंगफली बीज वितरण में स्पष्ट निर्देश था कि एफपीओ के माध्यम से बांटा जाएगा या हमारे यहां के कर्मचारी के माध्यम से. चूंकि मूंगफली का वितरण पहले ही शुरू करा दिया गया था ताकि किसानों को समय से मूंगफली मिल सके. लेकिन एफपीओ की बैठक लेट बुलाई गई थी, उसमें टारगेट दिया गया था. जैतपुर में 1500 का टारगेट दिया गया था, लेकिन 500 बंट पाई, जबकि पहले पॉस मशीन से बांटा जा चुका था. इसलिए उन्हें सिर्फ 500 क्विंटल दिया गया था.

किसानों के दो बार अगूंठा लगाने के आरोप को खारिज करते हुए कहा कि एक बार उर्द का और दूसरी बार मूंगफली का अंगूठा लिया गया था, जिसे बांट दिया गया है. लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि किसानों को मूंगफली मिली नहीं तो कहा बांट दी गई. वहीं, रसीद काटने के मामले को लेकर कहा कि एफपीओ द्वारा काटी जा रही है. इससे हमारा कोई लेना देना नहीं है.

डीएम ने जांच के दिए आदेश

बहरहाल प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की क्लेम राशि में हुए घोटाले के बाद जिले में किसानों के साथ एक बार फिर बड़ी धोखाधड़ी कर हजारों क्विंटल मूंगफली के बीज का घोटाला सामने आया है. इस घोटाले के बाद कृषि विभाग में हड़कंप मच गया है. मामला सामने आने के बाद जिलाधिकारी गजल भारद्वाज ने एसडीएम के नेतृत्व में टीमों का गठन कर जांच के आदेश दिए हैं.

विराग पचौरी

विराग पचौरी

विराग पचौरी ने पत्रकारिता के क्षेत्र में सन 2001 से सिटी लोकल न्यूज़ चैनल सी न्यूज़ के साथ शुरुआत की. इसके बाद सन 2008 में IBN7 चैनल में स्ट्रिंगर के रूप में काम किया और जमीनी स्तर की खबरों के साथ राजनीतिक खबरों में भी उनकी विशेष दिलचस्पी रही है. शुरू से ही पढ़ने-लिखने का शौक रहा है. इसके अलावा घूमने का शौक भी जीवन में शुमार है.

उन्होंने आईटीआई, सरीला, जिला हमीरपुर से इलेक्ट्रीशियन ट्रेड किया और BHEL झांसी में अप्रेंटिस करने के बाद पत्रकारिता क्षेत्र में रुचि बढ़ने के कारण अपना लोकल चैनल शुरू किया था, जिसे लगभग 10 वर्षों तक चलाया.

न्यूज़18 इंडिया चैनल के बाद वर्तमान में TV9 भारतवर्ष से जुड़कर काम कर रहे हैं.

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