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बरेली: PCS अधिकारी दिनेश प्रताप सिंह के घर ED का छापा, 240 करोड़ घोटाले का आरोप; उत्तराखंड में हैं तैनात

बरेली: PCS अधिकारी दिनेश प्रताप सिंह के घर ED का छापा, 240 करोड़ घोटाले का आरोप; उत्तराखंड में हैं तैनात

बरेली में PCS अधिकारी दिनेश प्रताप सिंह के घर ED का छापा.

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में उस वक्त हड़कप मच गया, जब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने गुरुवार सुबह उत्तराखंड के वरिष्ठ PCS अधिकारी दिनेश प्रताप सिंह के घर छापा मारा. दिनेश प्रताप सिंह इस समय उत्तराखंड की डोईवाला चीनी मिल में अधिशासी निदेशक के पद पर तैनात हैं. छापेमारी बरेली के इंटरनेशनल सिटी स्थित उनके आवास पर की गई, जो लंबे समय से बंद बताया जा रहा है. मामला उत्तराखंड के बहुचर्चित राष्ट्रीय राजमार्ग-74 भूमि अधिग्रहण घोटाले से जुड़ा है. टीम अभी भी लगातार छापेमारी कर रही है. जब टीवी9 संवाददाता मनवीर सिंह ने टीम के अधिकारियों से बात करने की कोशिश की तो उन्होंने बात नहीं की.

दरअसल, गुरुवार सुबह करीब नौ बजे ईडी की टीम पांच गाड़ियों में सवार होकर दिनेश प्रताप सिंह के बरेली वाले घर पर पहुंची. टीम को घर पर कोई नहीं मिला, जिससे ईडी अधिकारियों ने मेन गेट का ताला तोड़ा और अंदर घुसे. इसके बाद घर के मुख्य दरवाजे का कुंडा भी निकाला गया और क्रमवार कमरों, अलमारियों और लॉकरों की तलाशी शुरू हुई. ईडी की कार्रवाई कार्रवाई खबर लिखने तक जारी है. इस दौरान आसपास के लोग भी दंग रह गए और इलाके में चर्चा का माहौल बन गया. टीम ने फिलहाल मीडिया को कोई जानकारी नहीं दी है, लेकिन सूत्रों के अनुसार, कई जरूरी दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए हैं. जांच के बाद टीम सारे दस्तावेज अपने साथ ले जाएगी. घर पर भारी पुलिस बल तैनात है. अंदर आने की किसी को भी अनुमति नहीं दी जा रही है.

भूमि अधिग्रहण घोटाले में मुख्य आरोपी रहे हैं दिनेश प्रताप

जानकारी के मुताबिक, दिनेश प्रताप सिंह पर साल 2011 से 2016 के बीच गदरपुर और आसपास के इलाकों में किसानों की कृषि भूमि को गलत तरीके से गैर-कृषि बताकर भारी मुआवजा दिलाने का आरोप है. इस घोटाले में करीब 240 करोड़ रुपए की अनियमितता सामने आई थी. साल 2017 में इस मामले की जांच कर रही एसआईटी ने उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा था. वे 15 महीने जेल में रहे और फिर हाईकोर्ट से उन्हें जमानत मिली. जांच में सामने आया कि इस जमीन घोटाले से कई लोगों को गलत तरीके से फायदा पहुंचाया गया था.

राजनीति से भी जुड़ाव, पत्नी अलका सिंह कांग्रेस प्रत्याशी रह चुकीं

दिनेश प्रताप सिंह की पत्नी अलका सिंह भी राजनीति में सक्रिय रही हैं. वे वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में बिथरी चैनपुर सीट से कांग्रेस के टिकट पर प्रत्याशी रही थीं. इससे पहले वे भाजपा में थीं, लेकिन टिकट न मिलने पर कांग्रेस में शामिल हो गईं. चुनाव के दौरान भारी खर्च की बात भी सामने आई थी, जिसके बाद यह संदेह जताया गया कि अवैध कमाई का पैसा चुनाव में लगाया गया. इसके अलावा करोड़ों रुपए की चल-अचल संपत्तियों की भी जांच हो रही है. बताया जा रहा है कि उनके परिवार का यह बरेली स्थित घर पिछले एक साल से खाली पड़ा था. वहीं, इनकी बेटी हार्वर्ड यूनिवर्सिटी, अमेरिका में पढ़ाई कर रही है.

अभी आगे और जांच की संभावना

ईडी की कार्रवाई से अफसरशाही और राजनीतिक गलियारों में हलचल है. सूत्रों के मुताबिक, ये छापा सिर्फ शुरुआती कार्रवाई है. आने वाले दिनों में और भी ठिकानों पर जांच हो सकती है. फिलहाल ईडी इस बात की तह में जा रही है कि भूमि अधिग्रहण घोटाले से जुड़े पैसे को कहां-कहां और कैसे लगाया गया.

जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, इस मामले में कई और बड़े नामों के सामने आने की उम्मीद है. वहीं जानकारी के मुताबिक, दिनेश प्रताप सिंह राष्ट्रीय राजमार्ग-74 भूमि अधिग्रहण घोटाले में मुख्य आरोपी रहे हैं. वर्ष 2011 से 2016 के बीच गदरपुर और आसपास की कृषि भूमि को गैरकृषि दिखाकर करोड़ों के मुआवजे का 240 करोड़ रुपए से अधिक का खेल किया. नवंबर 2017 में एसआईटी ने गिरफ्तार कर जेल भेजा और 15 माह बाद हाईकोर्ट से जमानत पर रिहा हुए. अब बरेली और उत्तराखंड दोनों ही जगह प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है.



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