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ट्रंप के टैरिफ बम से अमेरिका घायल, अमेरिकन्स का हो गया तगड़ा नुकसान, जानें कैसे

डोनाल्ड ट्रंप का टैरिफ अब अमेरिका पर ही भारी पड़ रहा है. ट्रंप ने अप्रैल 2025 में दुनिया के तमाम देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ लगाना शुरू किया था और फिर लगातार इसके बढ़ने के चलते दुनियाभर में ट्रेड वॉर की स्थिति पैदा हो गई थी. ट्रंप के इस टैरिफ बम के खिलाफ दायर की गई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें बड़ा झटका दिया.अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (IEEPA) के तहत लगाए गए टैरिफ के एक बड़े हिस्से को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया था. इसके साथ ही ट्रंप प्रशासन को रिफंड का आदेश भी दिया गया था. 

अमेरिकी सीमा शुल्क के अधिकारियों ने अदालत में दायर याचिका में ट्रंप टैरिफ रिफंड को लेकर जानकारी शेयर की है. उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के बाद ट्रंप प्रशासन ने लगभग 100 अरब डॉलर की वापसी कर दी है, जिसमें IEEPA के तहत ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ को रद्द कर दिया गया था. अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय व्यापार न्यायालय में दायर याचिका में कहा गया है कि ब्याज सहित रिफंड की प्रक्रिया सरकार की सीमा शुल्क रिफंड प्रणाली के माध्यम से पूरी कर ली गई है और ये रकम वित्त विभाग को भेज दी गई है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रीय सुरक्षा आपात स्थितियों से निपटने के लिए 1977 में बनाए गए कानून का इस्तेमाल करके अमेरिकी व्यापारिक साझेदारों से आयात पर तगड़ा टैरिफ लगाकर अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन किया. जजों ने निष्कर्ष निकाला कि ये कानून राष्ट्रपति को व्यापक व्यापार शुल्क लगाने का एकतरफा अधिकार नहीं देता है.

अमेरिकन्स को तगड़ा नुकसान
अमेरिका में ट्रंप टैरिफ रिफंड का मुद्दा नया राजनीतिक विवाद बन गया है. रिपोर्ट के अनुसार आलोचकों ने तर्क देते हुए कहा है कि ये पैसा उन आयातकों और निगमों को लौटाया जा रहा है, जिन्होंने टैरिफ का भुगतान किया था. उन्होंने आगे कहा कि अमेरिकी उपभोक्ताओं ने ट्रंप के इस टैरिफ वॉर के चलते बढ़ी हुई कीमतों की मार झेली. उन्होंने अधिक पैसा चुकाया लेकिन ये अब ये भुगतान उनको नहीं किया जा रहा है.

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