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गुजारा भत्ता नहीं देने के बाद भी शख्स को मिली कोर्ट से राहत, जेल से रिहा करने का आदेश

गुजारा भत्ता नहीं देने के बाद भी शख्स को मिली कोर्ट से राहत,  जेल से रिहा करने का आदेश

पत्नी को मेंटेनेंस नहीं दे पाने की वजह से जेल में बंद पति को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने फौरन रिहा करने का आदेश दिया है. झांसी की फैमिली कोर्ट के आदेश के मुताबिक पति 22 महीने की जेल की सजा काट रहा है. वो 2025 से जेल में बंद है. ऐसे में पति तो बड़ी राहत मिली है और अब उसके जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है.

जानकारी के मुताबिक पति ताहिर उर्फ बबलू गिरफ्तारी वारंट की तामील होने के बाद 3 दिसंबर 2025 से जेल में है. 2 अप्रैल 2026 को पारित आदेश में जस्टिस प्रवीण कुमार गिरि ने कहा कि याचिकाकर्ता को कोई जमानत बांड जमा करने या मुचलका (Bail Bond) देने की जरुरत नहीं है क्योंकि वह नागरिक जेल में निरुद्ध है. कोर्ट ने निबंधक (अनुपालन) को फौरनल इस आदेश की जानकारी जेल अधिकारियों को देने का निर्देश दिया ताकि याचिकाकर्ता की रिहाई सुनिश्चित हो सके.

पत्नी ने मांगा 22 महीने से बकाया मेंटेनेंस

दरअसल ताहिर की पत्नी ने नवंबर, 2023 से सितंबर, 2025 तक 22 महीने से बकाया मेंटेनेंस की वसूली के लिए एक आवेदन दाखिल किया था. मेंटेनेंस की रकम 2,64,000 थी. इसके बाद जालौन पुलिस ने पति ताहिर को गिरफ्तार कर लिया गया और उसे कोर्ट में पेश किया गया, इस दौरान ताहिर ने कोर्ट में मेंटेनेंस की राशि जमा करने में असमर्थता जताई.

फैमिली कोर्ट ने पति को सुनाई 22 महीने की जेल की सजा

ताहिर ने कोर्ट में दलील दी कि वो एक गरीब शख्स है और वो इतनी रकम का नहीं दे सकता. इसलिए उसने कोर्ट से कम से कम सजा देने की प्रार्थना की. हालांकि फैमिली कोर्ट ने उसे 22 महीने की जेल की सजा सुनाई. कोर्ट ने कहा कि हर महीने की चूक के लिए अलग-अलग आवेदन दाखिल करना जरूरी नहीं है और एक समेकित आवेदन पर भी कोर्ट हर माह की चूक के लिए एक महीने की सजा दे सकती है. जिसके बाद ताहिर को 22 महीने की जेल की सजा सुनाई गई.

पति ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया

फैमिली कोर्ट के इस आदेश के खिलाफ ताहिर ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. सुनवाई के दौरान उसके वकील ने कोर्ट में दलील दी कि दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरसीपी) की धारा 125(3) के तहत अगर एक व्यक्ति बिना पर्याप्त कारण के भुगतान करने में विफल रहता है तो कोर्ट उसे केवल एक महीने के लिए नागरिक जेल भेज सकती है. इसके साथ ही वकील ने यह भी कहा कि वारंट की तामील के बाद बकाया किसी राशि की वसूली के लिए संपत्ति कुर्क की जा सकती है और एक महीने से ज्यादा की जेल की अवधि नहीं बढ़ाई जा सकती.

हाईकोर्ट ने पत्नी को नोटिस जारी किया

ताहिर के वकील की इन दलीलों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने ताहिर की पत्नी को नोटिस जारी किया और पति को तत्काल रिहा करने का आदेश पारित किया. कोर्ट इस मामले की अगली सुनवाई 18 मई को करेगा.

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