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2022 के एआईएडीएमके निष्कासन मामले में याचिका वापस लेने की अर्जी, 4 जून को मद्रास HC करेगा सुनवाई

मद्रास हाईकोर्ट गुरुवार (4 जून, 2026) को उस याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें 2022 में एआईएडीएमके के कई वरिष्ठ नेताओं को पार्टी से निष्कासित किए जाने के खिलाफ दायर मामले को वापस लेने की अनुमति मांगी गई है. यह मामला जस्टिस एन. कुमारेश बाबू की अदालत में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है. बुधवार को प्रक्रिया संबंधी देरी के कारण अदालत इस अनुरोध पर विचार नहीं कर सकी थी.

यह विवाद 2022 में एआईएडीएमके के भीतर शुरू हुए नेतृत्व संघर्ष से जुड़ा है, जब पार्टी दो गुटों में बंट गई थी. एक गुट का नेतृत्व एडप्पादी के. पलानीस्वामी (EPS) और दूसरे का नेतृत्व ओ. पन्नीरसेल्वम (OPS) कर रहे थे. पार्टी के भीतर चल रही इस खींचतान के बीच 11 जुलाई 2022 को एआईएडीएमके की महत्वपूर्ण जनरल काउंसिल बैठक आयोजित की गई थी.

बैठक से पहले ओ. पन्नीरसेल्वम ने मद्रास हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इस बैठक पर रोक लगाने की मांग की थी. हालांकि, अदालत ने अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद बैठक निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार हुई.

जनरल काउंसिल की बैठक में कई प्रस्ताव पारित किए गए, जिन्होंने पार्टी की नेतृत्व व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया. इनमें एक प्रमुख प्रस्ताव के तहत ओ. पन्नीरसेल्वम, मनोज पांडियन, जे.सी.डी. प्रभाकर और वैथिलिंगम को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था. इसके बाद इन चारों नेताओं ने अपने निष्कासन को चुनौती देते हुए मद्रास हाईकोर्ट का रुख किया था. तब से यह मामला एआईएडीएमके के नेतृत्व विवाद से जुड़े अन्य मामलों के साथ लंबित है.

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बाद के राजनीतिक घटनाक्रमों ने इस मामले की परिस्थितियों को बदल दिया. जे.सी.डी. प्रभाकर बाद में तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) में शामिल हो गए और वहां स्पीकर बनाए गए. वहीं ओ. पन्नीरसेल्वम और उनके कुछ सहयोगी बाद में द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) में शामिल हो गए. इन बदली हुई परिस्थितियों को देखते हुए जे.सी.डी. प्रभाकर और अन्य याचिकाकर्ताओं ने हाल ही में हाईकोर्ट को पत्र लिखकर मामले को वापस लेने की अनुमति मांगी है.

बुधवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस कुमारेश बाबू को बताया गया कि याचिका वापस लेने संबंधी पत्र हाईकोर्ट रजिस्ट्री से अदालत तक नहीं पहुंचा है. इसी कारण अदालत इस अनुरोध पर कोई फैसला नहीं ले सकी. स्थिति को देखते हुए जज ने मामले की सुनवाई गुरुवार तक के लिए स्थगित कर दी और इसे फिर से सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया. अब उम्मीद है कि मद्रास हाईकोर्ट याचिकाकर्ताओं के मामले को वापस लेने के अनुरोध पर विचार करेगा और उचित आदेश जारी करेगा.

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