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तैयार थी सरेंडर की पूरी स्क्रिप्ट, फिर कैसे UP पुलिस को गच्चा दे गई श्रद्धा दुबे? इंस्पेक्टर और डीसीपी पर गिरी गाज

तैयार थी सरेंडर की पूरी स्क्रिप्ट, फिर कैसे UP पुलिस को गच्चा दे गई श्रद्धा दुबे? इंस्पेक्टर और डीसीपी पर गिरी गाज

श्रद्धा दुबे और शिवा शर्मा

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के शिवा शर्मा हत्याकांड में मुख्य आरोपी श्रद्धा दुबे के आगे पुलिस एक बार फिर गच्चा खा गई. श्रद्धा को पुलिस रायबरेली से लखनऊ तक और गोरखपुर से नेपाल तक तलाश रही है, जबकि श्रद्धा तीन दिन से पुलिस की नाक के नीचे ना केवल लखनऊ में बैठी है, बल्कि एक मॉल के बेसमेंट में मीडिया को बुलाकर बयान तक दे दिया. सूचना मिलने पुलिस जबतक वहां पहुंची, वह कर फिर फरार होने में सफल हो गई.

अब आप के मन में यह सवाल आ सकता है कि क्या श्रद्धा के लिए यह इतना आसान था? तो इसका जवाब होगा ‘नहीं’. आइए, बताते हैं कि श्रद्धा इस बार कैसे पुलिस को गच्चा देने में सफल हुई, जिसका खामियाजा लखनऊ पुलिस के सबसे ताकतवर इंस्पेक्टर विक्रम सिंह और डीसीपी सेंट्रल विक्रम वीर को भुगतनी पड़ी. पुलिस सूत्रों के मुताबिक रविवार को श्रद्धा के सरेंडर की पूरी स्क्रिप्ट तैयार थी. वह मीडिया को बयान देने के बाद थाने में सरेंडर करने वाली थी.

शर्तों पर बिगड़ी बात

पुलिस सूत्रों के मुताबिक नौ दिनों से फरार श्रद्धा ने कोर्ट में सरेंडर की अर्जी डालकर पुलिस के इकबाल को चुनौती दे दी. ऐसे में पुलिस ने अपना इकबाल बचाने के लिए स्क्रिप्ट तैयार कराया कि वह अपने बचाव में मीडिया को बयान दे, तभी नाटकीय रूप से पुलिस पहुंचकर उसे अरेस्ट कर लेगी. बाद में उसे शिवा हत्याकांड को सुसाइड का मामला बनाकर श्रद्धा को सरकारी गवाह बना दिया जाएगा. श्रद्धा और उसके संरक्षकों को यह शर्त मंजूर नहीं था, इसलिए श्रद्धा नियत समय से पहले ही मीडिया से बात कर ली और पुलिस के आने से पहले ही फरार हो गई.

कहीं इसलिए तो नहीं बिगड़ी डील

श्रद्धा के सरेंडर की डील बिगड़ने को लेकर कई तरह की बातें कही जा रही हैं. पुलिस सूत्रों के मुताबिक तय स्क्रिप्ट में मामला हत्या के बजाय गैर इरादतन हत्या में तब्दील किया जाना था. इसमें श्रद्धा और उसकी बहन रश्मि को आरोपी करार दिया जाना था. जबकि श्रद्धा चाहती थी कि मामले को सुसाइड करार देते हुए उसे गवाह बनाया जाए. साथ ही इस मामले से रश्मि को पूरी तरह बाहर रखा जाए.

नौ दिन बाद क्यों नपे इंस्पेक्टर और डीसीपी

लखनऊ के हजरतगंज थाने में पोस्टिंग पाने वाले इंस्पेक्टरों को शहर के सबसे प्रभावशाली, पहुंच वाले और ताकतवर इंस्पेक्टरों में गिना जाता है. उनकी जिम्मेदारी थी कि श्रद्धा दुबे को जल्द से जल्द से अरेस्ट कर मामले का खुलासा करें. लेकिन नौ दिन बीतने के बाद भी वह कोई सुराग तक नहीं ढूंढ पाए. ऊपर से पुलिस की नाक के नीचे प्रेस कांफ्रेंस कर श्रद्धा फिर फरार हो गई. इससे पुलिस की काफी किरकिरी हुई और इंस्पेक्टर हजरतंगज को लाइन हाजिर कर दिया गया. चूंकि मामले की मॉनिटरिंग डीसीपी सेंट्रल विक्रम वीर कर रहे थे, इसलिए उन्हें भी वेटिंग में डाला गया है.

सफी अहमद

सफी अहमद

सफी अहमद, राजधानी लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार हैं और करीब डेढ़ दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. पत्रकारिता उनके लिए सिर्फ पेशा नहीं, बल्कि एक जुनून है. इसी जुनून को जमीन पर उतारते हुए उन्होंने लखनऊ की जमीनी हकीकत से लेकर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों तक की खबरों को करीब से कवर किया है. सफी अहमद की खास पकड़ क्राइम रिपोर्टिंग पर रही है. अपराध की खबरों की तह तक जाना, घटनाओं के पीछे की कहानी सामने लाना और सबसे पहले सटीक जानकारी पाठकों और दर्शकों तक पहुंचाना उनकी पत्रकारिता की प्रमुख पहचान रही है.

कई बड़ी और चर्चित घटनाओं की कवरेज में सफी अहमद की सक्रिय भूमिका रही है. 2020 के कानपुर बिकरू कांड, 2022 के अलाया होटल अग्निकांड और 2026 के अलीगंज अग्निकांड जैसी घटनाओं पर उन्होंने लगातार नजर बनाए रखी और घटनाक्रम से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां सबसे पहले साझा करने का प्रयास किया. ऐसी घटनाओं में 24 घंटे लगातार अपडेट रहने और खबर की तह तक पहुंचने का उनका अनुभव उनकी पत्रकारिता की महत्वपूर्ण ताकत है.

सफी अहमद ने पत्रकारिता की शुरुआत एक साप्ताहिक पत्रिका और न्यूज पोर्टल के साथ की. इसके बाद उन्हें PPN न्यूज़, APN न्यूज़ और K न्यूज़ जैसे संस्थानों में काम करने का अवसर मिला. विभिन्न संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने रिपोर्टिंग के अलग-अलग आयामों को करीब से समझा और अपनी पत्रकारिता को लगातार मजबूत किया. करीब चार वर्षों के अनुभव के बाद उन्हें TV9 भारतवर्ष के साथ काम करने का अवसर मिला. पिछले 6 वर्षों से TV9 भारतवर्ष के साथ जुड़े हुए सफी अहमद लखनऊ से लगातार पत्रकारिता कर रहे हैं. इस दौरान उन्होंने पूरी ईमानदारी, निष्पक्षता और निष्ठा के साथ खबरों को जमीन से उठाकर दर्शकों तक पहुंचाने का प्रयास किया है.

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