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गोरखपुर से वाराणसी तक… पिछली हार का हिसाब बराबर करने मैदान में उतरे CM योगी

MLC चुनाव: गोरखपुर से वाराणसी तक… पिछली हार का हिसाब बराबर करने मैदान में उतरे CM योगी

सीएम योगी आदित्यनाथ (File)

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले विधान परिषद की 11 सीटों पर होने वाले चुनाव ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और समाजवादी पार्टी (सपा) के बीच सियासी मुकाबला काफी अहम है. भाजपा ने इन चुनावों के लिए संगठन से लेकर सरकार तक के स्तर पर सक्रियता बढ़ा दी है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद प्रचार अभियान की कमान संभाल रहे हैं. गोरखपुर और बरेली में चुनावी कार्यक्रमों के बाद अब उनकी नजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी पर है.

भाजपा के लिए गोरखपुर और वाराणसी की सीटें खास अहमियत रखती हैं. गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गृह क्षेत्र है, जबकि वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र. काशी की शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की सीटों पर पिछले चुनाव में समाजवादी पार्टी ने जीत दर्ज की थी. ऐसे में इस बार भाजपा के सामने इन सीटों पर जीत की चुनौती है.

पिछले दिनों वाराणसी में हुई बैठक में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने भी क्षेत्रीय नेताओं के साथ चुनावी तैयारियों पर चर्चा की थी. पार्टी नेताओं को दोनों सीटों पर जीत के लिए पूरी ताकत लगाने का संदेश दिए जाने की बात सामने आई थी. अब मुख्यमंत्री के चुनावी कार्यक्रमों को इसी रणनीति के हिस्से के तौर पर देखा जा रहा है.

गोरखपुर में योगी ने खुद संभाला मोर्चा

गोरखपुर-फैजाबाद मंडल शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का मुकाबला भाजपा और सपा दोनों के लिए अहम है. भाजपा ने यहां मौजूदा विधान परिषद सदस्य ध्रुव कुमार त्रिपाठी को उम्मीदवार बनाया है. ध्रुव कुमार त्रिपाठी पिछला चुनाव निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में लड़े थे. जबकि समाजवादी पार्टी ने डॉ. संजयन त्रिपाठी को मैदान में उतारा है. संजयन त्रिपाठी पहले भाजपा से जुड़े रहे हैं और अब सपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 12 अक्टूबर को गोरखपुर में चुनाव प्रचार किया और शिक्षक मतदाताओं से संवाद किया. इस निर्वाचन क्षेत्र का दायरा कई जिलों तक फैला है. भाजपा की रणनीति शिक्षक मतदाताओं तक सीधे पहुंच बनाने और बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने की है. पार्टी ने इन चुनावों के लिए संगठनात्मक प्रबंधन पर भी जोर दिया है.

काशी की दोनों सीटों पर भाजपा की नजर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से जुड़ी शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की सीटें भाजपा के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं. पिछले चुनाव में दोनों सीटों पर सपा ने जीत दर्ज की थी. इस बार भाजपा इन सीटों पर मुकाबले को लेकर सक्रिय है. वाराणसी खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से समाजवादी पार्टी ने मौजूदा MLC लाल बिहारी यादव को फिर उम्मीदवार बनाया है. इस बार भाजपा ने डॉ. प्रमोद मिश्रा को प्रत्याशी बनाया है.

वहीं, वाराणसी खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से सपा ने आशुतोष सिन्हा को उम्मीदवार बनाया है, जबकि भाजपा ने केदारनाथ सिंह को मैदान में उतारा है. इस सीट पर भी दोनों दलों ने अपने-अपने मतदाता आधार को मजबूत करने के लिए प्रचार तेज किया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज वाराणसी में शिक्षक और स्नातक मतदाताओं के सम्मेलन को संबोधित करेंगे. भाजपा की कोशिश है कि काशी की दोनों सीटों पर पिछली हार के बाद इस बार अपना प्रदर्शन सुधारा जाए.

11 सीटों पर भाजपा का बड़ा लक्ष्य

उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों में पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की हैं. मतदान 23 अक्टूबर को होना है और मतगणना 27 अक्टूबर को निर्धारित है. भाजपा ने सभी 11 सीटों के लिए उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं. पार्टी के वरिष्ठ नेता और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य समेत संगठन के पदाधिकारी भी प्रचार अभियान में जुटे हैं.

योगी आदित्यनाथ ने 12 अक्टूबर को गोरखपुर और 13 अक्टूबर को बरेली में चुनावी कार्यक्रमों में हिस्सा लिया. इसके बाद वाराणसी में उनका कार्यक्रम तय है. पार्टी की रणनीति शिक्षक और स्नातक मतदाताओं से सीधा संपर्क स्थापित करने, स्थानीय समीकरणों को साधने और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने की है.

इन चुनावों में भाजपा की कोशिश केवल विधान परिषद में अपनी स्थिति मजबूत करने की नहीं, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले संगठन की तैयारियों को भी परखने की है. इसके लिए पार्टी बूथ प्रबंधन और मतदाता संपर्क पर जोर दे रही है.

पंकज चतुर्वेदी

पंकज चतुर्वेदी

पंकज चतुर्वेदी को पत्रकारतिा के क्षेत्र में एक दशक से ज्यादा का अनुभव है. देश और उत्तरप्रदेश की राजनीति को कवर करते आ रहे हैं. दिल्ली में अमर उजाला और पंजाब केसरी से पत्रकारिता की यात्रा की शुरुआत हुई.  दिल्ली में 2 साल की पत्रकारिता के बाद मिट्टी की खुशबू यूपी खींच लाई और तब से राजधानी लखनऊ में ही पत्रकारिता हो रही है. 2017 में यात्रा को विस्तार देते हुए इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े. राजनीतिक खबरों में गहरी रुचि और अंदर की खबर को बाहर लाने का हुनर, साथ ही यूपी की ब्यूरोकेसी में खास पकड़.  पत्रकारिता का फलसफा खबरों को खबर के रूप में ही जनता तक पहुंचाना.

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