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Iran-US War: 13 दिन बाद रुके अमेरिकी अटैक ! जानें ट्रंप ने ईरान पर हमले टालने का क्यों लिया फैसला

अमेरिका के कई मीडिया संस्थानों की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लगातार 13 दिनों तक चले अमेरिकी हमलों के बाद ईरान पर नए सैन्य हमले रोकने का फैसला किया है. बताया जा रहा है कि इस फैसले के पीछे कई कारण थे, जिनमें कूटनीतिक प्रयासों को मौका देना, अमेरिका के मिसाइल डिफेंस स्टोर में कमी को लेकर चिंता और संघर्ष के और अधिक बढ़ने का खतरा शामिल है.

रिपोर्टों के मुताबिक, शुक्रवार को लिए गए इस फैसले के बाद लगभग दो सप्ताह से जारी रोजाना अमेरिकी हमलों में पहली बार रुकावट आई. एक्सियोस की रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रंप ने सेना को नए हमले की प्लानिंग मिलने के बावजूद फिलहाल कोई नया हमला न करने का आदेश दिया. इसे बातचीत और कूटनीतिक समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

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सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू की जा सकती है- अमेरिका

अमेरिका ने यह भी साफ किया है कि जरूरत पड़ने पर सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू की जा सकती है. व्हाइट हाउस ने इस फैसले पर कोई आधिकारिक विस्तृत टिप्पणी नहीं की है, लेकिन व्हाइट हाउस के संचार निदेशक स्टीवन चेउंग ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप हमेशा कूटनीतिक समाधान के पक्षधर रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि यदि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में गतिविधियां बढ़ाता है या अमेरिका के सहयोगी देशों के खिलाफ कार्रवाई करता है, तो सभी सैन्य विकल्प खुले रहेंगे.

बड़ा युद्ध छिड़ सकता है- ट्रंप

रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप का मानना था कि मौजूदा स्तर की सैन्य कार्रवाई अपनी प्रभावी सीमा तक पहुंच चुकी है और आगे बढ़ने पर बड़ा युद्ध छिड़ सकता है. सूत्रों ने बताया कि राष्ट्रपति बातचीत के लिए अधिक अवसर देना चाहते थे, लेकिन साथ ही यह विकल्प भी बनाए रखना चाहते थे कि यदि वार्ता विफल होती है तो कम समय में फिर से सैन्य कार्रवाई शुरू की जा सके. शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिका पूरी तरह तैयार है, लेकिन उनका मानना है कि ईरान के साथ समझौता करना अधिक समझदारी भरा रास्ता होगा. उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी है और उन्हें लगता है कि समय के साथ ईरान भी वार्ता को लेकर अधिक गंभीर हो रहा है.

अमेरिकी डिफेंस सिस्टम 

इस फैसले के पीछे एक बड़ी वजह अमेरिकी डिफेंस सिस्टम के भीतर बढ़ती चिंता भी बताई जा रही है. न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने चेतावनी दी थी कि अगर अभियान को और बढ़ाया गया तो अमेरिका की मिसाइल डिफेंस सिस्टम पर भारी दबाव पड़ सकता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों और अन्य डिफेंस सिस्टम का तेजी से इस्तेमाल हो रहा है. अगर संघर्ष लंबा चला तो मध्य पूर्व में तैनात अमेरिकी सैनिकों, सैन्य ठिकानों और सहयोगी देशों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है.  ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन ने ट्रंप को जानकारी दी कि सेना बड़े हमले करने में सक्षम है, लेकिन इससे मिसाइल रक्षा भंडार पर गंभीर असर पड़ सकता है. रिपोर्ट के अनुसार, हाल के महीनों में अमेरिका पहले ही 1,200 से अधिक पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों का उपयोग कर चुका है, जिससे रक्षा भंडार पर दबाव बढ़ गया है.

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