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कम से कम ईमानदारी से हारना तो सीखें… वाराणसी में स्लो काउंटिंग पर अखिलेश ने बीजेपी पर साधा निशाना

कम से कम ईमानदारी से हारना तो सीखें… वाराणसी में स्लो काउंटिंग पर अखिलेश ने बीजेपी पर साधा निशाना

समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव

उत्तर प्रदेश विधानपरिषद चुनाव में वाराणसी सीट पर जारी स्लो काउंटिंग को लेकर समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने जमकर निशाना साधा है. वाराणसी काउंटिंग को लेकर ताबड़तोड़ किए गए कई पोस्ट पर अखिलेश ने बीजेपी और चुनाव आयोग पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि वाराणसी में वोटिंग रोकने या धीमे कर देने के पीछे का षड्यंत्र सब समझ रहे हैं, लेकिन बीजेपी वाले इसमें कामयाब नहीं होंगे. बीजेपी ईमानदारी से जीतना नहीं जानती तो कम से कम ईमानदारी से हारना तो सीख लेना चाहिए.

रात 8 बजे तक प्रदेश के 11 शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव में जारी काउंटिंग के दौरान 2 सीटों पर काउंटिंग जारी है. इससे पहले अब तक 9 सीट के परिणाम घोषित कर दिए गए हैं, जिनमें से 6 सीट पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और 3 पर समाजवादी पार्टी (सपा) ने जीत हासिल की है. वाराणसी खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की प्रतिष्ठित सीट पर सपा के लाल बिहारी यादव ने अप्रत्याशित रूप से बड़ी जीत हासिल की है.

परिणाम तैयार लेकिन प्रमाणपत्र नहीं दे रहेः अखिलेश

वाराणसी में स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में सपा के डॉक्टर आशुतोष वर्मा आगे चल रहे हैं. लेकिन लंबे समय से जारी काउंटिंग के बाद भी परिणाम घोषित नहीं किया जा सका है. यहां पर जारी स्लो काउंटिंग पर हमला करते हुए सपा प्रमुख अखिलेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा, “वाराणसी में वोटिंग रोकने या धीमे कर देने के पीछे का षड्यंत्र सब समझ रहे हैं, लेकिन बीजेपी वाले इसमें कामयाब नहीं होंगे. वाराणसी में बीजेपी की हार नेशनल न्यूज न बन जाए, इसीलिए हर कुचक्र रचा जा रहा है. परिणाम तैयार है लेकिन प्रमाणपत्र नहीं दिया जा रहा है.”

उन्होंने आगे कहा, “चुनाव आयोग के पास अंतिम मौका है कि वो अपनी निष्पक्षता साबित करे नहीं तो इस्तीफा दे क्योंकि वो मतगणना करवाने में असफल रहा है. बीजेपी ईमानदारी से जीतना नहीं जानती तो क्या ईमानदारी से हारना तो सीखे.” अखिलेश के आरोप पर सफाई देते हुए वाराणसी के जिलाधिकारी ने X पर बताया कि वाराणसी खंड स्नातक के उमीदवारों द्वारा गणना के संबंध में आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं. आपत्तियों का समुचित निस्तारण कराते हुए काउंटिंग की प्रक्रिया अनवरत रूप से गतिमान है.

हार से हताश बीजेपी की हालत खराबः अखिलेश

इससे पहले एक अन्य पोस्ट में अखिलेश ने कहा, “वाराणसी में काउंटिंग रोक देने के पीछे रिजल्ट बदलने की पुरानी बीजेपी की चाल चली जा रही है. सुना है हार के डर से कोई इधर-उधर की चहलकदमी कर रहा है.”

पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश ने वाराणसी को लेकर एक अन्य पोस्ट में कहा, “वाराणसी में एमएलसी चुनाव में हार से हताश बीजेपी की हालत खराब है. लखनऊ वाले दिल्ली वालों का फोन नहीं उठा रहे हैं. सच तो ये है कि बीजेपी यूपी एमएलसी चुनाव में ऑल आउट हो गई है.

इस बीच वाराणसी में काउंटिंग को लेकर लगातार तनाव की स्थिति बनी रही. समाजवादी पार्टी के नेता और स्नातक एमएलसी प्रत्याशी आशुतोष सिन्हा ने भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी केदारनाथ सिंह और उनके समर्थकों पर मारपीट और गाली गलौज के आरोप लगाया है. साथ ही काउंटिंग को रोकने और व्यवधान पैदा करने का आरोप जड़ा. इसके लिए जिला चुनाव अधिकारी से लिखित शिकायत भी की गई. साथ ही पार्टी ने आशंका जताई कि रात में विद्युत व्यवस्था को ठप करके काउंटिंग को प्रभावित की जा सकती है.

दिन में भी वाराणसी के मतगणना स्थल के बाहर बीजेपी और सपा के कार्यकर्ताओं के बीच तनातनी का माहौल देखा गया. इस बीच लंबी काउंटिंग के बाद गोरखपुर से बीजेपी के प्रत्याशी ध्रुव त्रिपाठी ने संघर्षपूर्ण जीत हासिल की. उन्हें 276 मतों से जीत हासिल हुई. दूसरे स्थान पर निर्दलीय प्रत्याशी राजीव यादव रहे.

बीजेपी अब तक 6 सीटें पर चुनाव जीत चुकी है. मेरठ शिक्षक पद पर श्रीचन्द्र शर्मा, मेरठ स्नातक में दिनेश गोयल को जीत मिली तो बरेली-स्नातक में हरि सिंह ढिल्लों, लखनऊ-शिक्षक से उमेश द्विवेदी, आगरा-स्नातक से मानवेन्द्र सिंह को जीत मिली.

वहीं सपा अब तक 3 सीट जीत चुकी है. जबकि 2 पर आगे चल रही है. वाराणसी-शिक्षक से लाल बिहारी यादव जीत गए. झांसी-स्नातक से मान सिंह यादव और आगरा-शिक्षक से डॉक्टर आकाश अग्रवाल चुनाव जीत गए हैं. वहीं वाराणसी-स्नातक पर डॉक्टर आशुतोष और लखनऊ-स्नातक से कांति सिंह पटेल आगे चल रहे हैं.

पंकज चतुर्वेदी

पंकज चतुर्वेदी

पंकज चतुर्वेदी को पत्रकारतिा के क्षेत्र में एक दशक से ज्यादा का अनुभव है. देश और उत्तरप्रदेश की राजनीति को कवर करते आ रहे हैं. दिल्ली में अमर उजाला और पंजाब केसरी से पत्रकारिता की यात्रा की शुरुआत हुई.  दिल्ली में 2 साल की पत्रकारिता के बाद मिट्टी की खुशबू यूपी खींच लाई और तब से राजधानी लखनऊ में ही पत्रकारिता हो रही है. 2017 में यात्रा को विस्तार देते हुए इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े. राजनीतिक खबरों में गहरी रुचि और अंदर की खबर को बाहर लाने का हुनर, साथ ही यूपी की ब्यूरोकेसी में खास पकड़.  पत्रकारिता का फलसफा खबरों को खबर के रूप में ही जनता तक पहुंचाना.

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