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‘I Love My Bitiya’… तलाक के बाद ढोल-नगाड़ों से बेटी का स्वागत, रिटायर्ड जज पिता बोले- बेटियां बोझ नहीं

‘I Love My Bitiya’… तलाक के बाद ढोल-नगाड़ों से बेटी का स्वागत, रिटायर्ड जज पिता बोले- बेटियां बोझ नहीं

Meerut News: “बेटियां बोझ नहीं, बल्कि परिवार की ताकत और समाज की असली पहचान होती हैं. वे सिर्फ घर की जिम्मेदारियां नहीं निभातीं, बल्कि हर क्षेत्र में अपनी मेहनत, समझदारी और हौसले से नई मिसाल कायम करती हैं. वक्त बदल रहा है और अब बेटियां हर उस मुकाम तक पहुंच रही हैं, जहां कभी सिर्फ बेटों का अधिकार माना जाता था. ऐसे में यह समझना जरूरी है कि बेटियां बोझ नहीं, बल्कि हर घर की सबसे बड़ी पूंजी हैं”… ऐसा कहना है मेरठ के एक रिटायर्ड जज का, जिन्होंने अपनी बेटी के तलाक पर फूल-मालाओं से स्वागत किया. ढोल की थाप पर परिवार के लोग कोर्ट से घर तक नाचते-गाते नजर आए. मिठाइयां बांटी गईं.

दरअसल, मामला कंकरखेड़ा थाना क्षेत्र का है. थाना क्षेत्र के शास्त्रीनगर में उत्तराखंड कैडर के रिटायर्ड जिला जज डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा अपने परिवार के साथ रहते हैं. उन्होंने बेटी का विवाह कुछ साल पहले धूमधाम किया था, लेकिन ससुराल में प्रताड़ना और आपसी मनमुटाव के चलते रिश्ता टूटने की कगार पर आ गया. लंबी कानूनी लड़ाई के बाद जब शनिवार कोर्ट से तलाक के कागज मिले तो पिता ने अपनी बेटी को वापस घर लाने का अनोखा फैसला किया.

ब्लैक कलर की टी-शर्ट पहनी

आमतौर पर समाज में बेटी का तलाक होना एक ‘कलंक’ या ‘दुख’ की बात मानी जाती है, लेकिन डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा ने इसे अपनी बेटी की ‘आजादी’ और ‘नई शुरुआत’ के रूप में मनाया. डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा और परिवार के अन्य लोगों ने एक ब्लैक कलर की टी-शर्ट पहनी थी, जिस पर बड़े अक्षरों में लिखा था- ‘I Love My Bitiya’.

जैसे ही बेटी अपनी कार से घर पहुंची तो पिता ने ढोल-नगाड़े बजवाए. परिवार के सदस्यों ने नाचते हुए और फूल बरसाते हुए बेटी का स्वागत किया. सोशल मीडिया पर इस स्वागत की तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं. लोग पिता की हिम्मत और सोच की सराहना कर रहे हैं.

क्या बोले रिटायर्ड जज पिता?

पिता डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा ने कहा, “मैंने आठ साल पहले अपनी इकलौती बेटी की शादी आर्मी के मेजर के साथ की थी. लेकिन मेरी बेटी ससुराल में खुश नहीं थी. उसे परेशान किया जाता था. अगर मेरी बेटी शादी के बाद खुश नहीं थी तो उसे खुश रखना मेरा फर्ज है. मैंने कोई एलिमनी या सामान नहीं लिया. सिर्फ अपनी बेटी को वापस घर लाया हूं.

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