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सुप्रीम कोर्ट की मेरठ के पूर्व कमिश्नर को फटकार, पूछा- सेंट्रल मार्केट ध्वस्तीकरण को किस आधार पर रोका?

सुप्रीम कोर्ट की मेरठ के पूर्व कमिश्नर को फटकार, पूछा- सेंट्रल मार्केट ध्वस्तीकरण को किस आधार पर रोका?

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के मेरठ में सेंट्रल मार्केट क्षेत्र की 44 संपत्तियों को तुरंत सील करने का निर्देश दिया. एससी के आदेश के बाद आवास एवं विकास परिषद की टीम ने बुधवार से अवैध संपत्तियों को सील करने की कार्रवाई शुरू कर दी है. इस दौरान आवास विकास की टीम को भारी विरोध का सामना करना पड़ा. इस बीच कुछ समय के लिए संपत्तियों सील करने की कार्रवाई को भी रोकना पड़ा. टीम अभी तक दो अस्पताल, दो स्कूल समेत आठ अवैध निर्माण सील किए हैं.

बिना स्वीकृत लेआउट के आवासीय परिसरों को व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में अनाधिकृत रूप से परिवर्तित करने से संबंधित एक अवमानना ​​याचिका की सुनवाई न्यायमूर्ति जेबी परदीवाला और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने की है. इस दौरान न्यायमूर्ति मेरठ के पूर्व डिविजनल कमिश्नर ऋषिकेश भास्कर यशोद के आचरण पर कड़ी आपत्ति जताई, जो खुद कोर्ट रूम में मौजूद थे. बेंच ने सवाल किया कि उन्होंने किस अधिकार के तहत मेरठ के सेंट्रल मार्केट क्षेत्र में कुछ व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को फिलहाल ना ढहाने का आदेश जारी करके अनधिकृत निर्माण के खिलाफ पहले के न्यायिक निर्देशों की अवहेलना की. इस पर कोर्ट ने पूर्व डिविजनल कमिश्नर को फटकार लगाई है.

मेरठ कमिश्नर ने क्या कहा था?

दरअसल, पिछले साल 27 अक्टूबर, 2025 को मेरठ कमिश्नर ने आदेश पारित किया था कि सेंट्रल मार्केट क्षेत्र में दुकानों को और ध्वस्त न किया जाए क्योंकि मास्टर प्लान में प्रस्तावित संशोधन के माध्यम से इन दुकानों को बाजार गली का दर्जा दिया जाएगा. उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद के अध्यक्ष श्री पी गुरुप्रसाद ने न्यायालय को बताया कि मेरठ आयुक्त द्वारा 27 अक्टूबर को पारित आदेश के मद्देनजर विध्वंस कार्य नहीं किया जा सकता. 2 अप्रैल को न्यायालय ने कहा था कि वह मेरठ मंडल आयुक्त द्वारा 27 अक्टूबर 2025 को पारित आदेश से अत्यंत विचलित है. अतः तत्कालीन आयुक्त को 6 अप्रैल को न्यायालय के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया गया था.

आवास विकास के अधिकारियों पर लगाए आरोप

वहीं, व्यापारियों का आरोप है कि आवास विकास परिषद ने 70 करोड़ रुपए भू उपयोग परिवर्तन शुल्क के रूप में लिए हैं. पहले उसका हिसाब दिया जाए. उन्होंने आवास विकास परिषद के अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए. यह आदेश आवासीय भूखंडों को अवैध रूप से व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, स्कूलों और अस्पतालों में परिवर्तित किए जाने के बाद दिया गया, जिनमें से कई बिना स्वीकृत योजनाओं और बुनियादी अग्नि सुरक्षा उपायों के संचालित हो रहे थे.

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