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राम मंदिर ट्रस्ट के कितने अधिकार और शक्तियां? आवेदन कर सुप्रीम कोर्ट से मांगी जानकारी

राम मंदिर ट्रस्ट के कितने अधिकार और शक्तियां? आवेदन कर सुप्रीम कोर्ट से मांगी जानकारी

राम मंदिर और सुप्रीम कोर्ट.

श्रीराम जन्मभूमि मामले में सुप्रीम कोर्ट के 9 नवंबर 2019 के फैसले को लेकर एक स्पष्टीकरण आवेदन दाखिल किया गया है. ⁠आवेदन एडवोकेट प्रकाश अवस्थी की ओर से दाखिल की गई है, जिसमें 2019 के फैसले के पैरा 804 और 805 की व्याख्या और स्पष्टीकरण मांगा गया है.

खुद को राम भक्त बताते हुए एडवोकेट ने अपने आवेदन में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन, अधिकार, प्रबंधन, मंदिर संपत्तियों के स्वामित्व और ट्रस्टियों की शक्तियों को स्पष्ट करने की मांग की गई है.

आवेदन में कहा गया है कि ट्रस्ट का संचालन पारदर्शिता, जवाबदेही और पेशेवर प्रशासन के सिद्धांतों के अनुरूप होना चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट से मांगा स्पष्टीकरण

⁠आवेदनकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से यह स्पष्ट करने का अनुरोध किया है कि क्या ट्रस्ट को सार्वजनिक धर्मार्थ के रूप में कार्य करना चाहिए या वह एक निजी स्वायत्त ट्रस्ट है? आवेदन में निर्मोही अखाड़ा की ट्रस्ट के प्रबंधन में भूमिका को लेकर भी स्पष्ट निर्देश देने की मांग की गई है.

आवेदन में मंदिर की भूमि और अन्य संपत्तियों के स्वामित्व पर भी सुप्रीम कोर्ट से स्पष्टीकरण मांगा गया है. आवेदन में ट्रस्ट और मंदिर प्रशासन के लिए स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति (Independent Expert Committee) गठित करने का अनुरोध किया गया है, जो पेशेवर और धार्मिक परंपराओं के अनुरूप प्रशासनिक ढांचा सुझाए.

आवेदन में यह भी मांग की गई है कि ट्रस्ट पर लोक जवाबदेही (Public Accountability) के मानक लागू किए जाएं तथा सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) की धारा 2(h) की प्रयोज्यता पर भी सुप्रीम कोर्ट स्पष्ट करे.

आवेदनकर्ता ने खुद को श्रद्धालु बताया

आवेदनकर्ता ने स्वयं को सुप्रीम कोर्ट का Advocate-on-Record और भगवान श्रीराम का श्रद्धालु बताया है तथा कहा है कि उन्होंने मंदिर में दर्शन और दान भी किया है. आवेदन में यह भी उल्लेख है कि याचिकाकर्ता मूल अयोध्या विवाद के पक्षकार नहीं थे, इसलिए वर्तमान आवेदन दाखिल करने की अनुमति भी मांगी गई है. इस आवेदन के साथ 9 नवंबर 2019 के सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले की प्रति भी संलग्न की गई है.

बता दें कि राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी की घटना सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने एसआईटी गठन का आदेश दिया है. मामले में आठ आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है. और एसआईटी जांच जारी है. इस बीच आरोपों के बीच महामंत्री चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है. वहीं विपक्षी पार्टियों ने ट्र्स्ट की भूमिका पर सवाल उठाया है. कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में पूरे मामले की जांच की मांग की है.

ये भी पढ़ें- गृह मंत्रालय ने राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े रिकॉर्ड को गोपनीय श्रेणी में रखा, CIC ने भी फैसले पर लगाई मुहर

अभिजीत ठाकुर

अभिजीत ठाकुर

अभिजीत ठाकुर ने दिल्ली विश्वविद्यालय से पढ़ाई की है. 2014 में पत्रकारिता की शुरुआत Zee Media से हुई. दिल्ली में रिपोर्टिंग की. 2018 में ETV भारत के नेशनल ब्यूरो में बतौर रिपोर्टर जॉइन किया. इस दौरान संघ (RSS-VHP), शिक्षा, कृषि, पर्यटन के साथ किसान और मजदूरों के मुद्दों पर रिपोर्टिंग की. 2022 में TV9 भारतवर्ष जॉइन किया और दिल्ली ब्यूरो का हिस्सा रहे. इस दौरान उत्तराखंड, हिमाचल, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान,महाराष्ट्र, बिहार और झारखंड में कई बड़ी खबरों और इवेंट्स कवर करने का अवसर मिला. 2025 में लखनऊ ब्यूरो की जिम्मेदारी के साथ दिल्ली से लखनऊ भेजा गया. 17 साल दिल्ली में रहने के बाद अब कर्मस्थली यूपी की राजधानी है. अब उत्तर प्रदेश की राजनीति, सरकार और जनता से जुड़े मुद्दों की रिपोर्ट जनता तक पहुंचाते हैं.

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