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बाहर आएगा ‘डायना’ का हत्यारा, राज्यपाल ने माफ की सजा; 24 साल से गाजीपुर की जेल में बंद

साल 1997 में न्यूजीलैंड से भारत घूमने आई डायना की हत्या उसके टूरिस्ट गाइड ने करके अपने ही घर के कमरे में दफन कर दी थी. गिरफ्तारी के बाद उसकी निशानदेही पर कंकाल बरामद हुआ था. उसे मौत की सजा सुनाई गई थी. बाद में दोषी के मृत्यु दंड को कठोर कारावास में बदल दिया गया था. अब इस मामले में दोषी धर्मदेव यादव की सजा को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने अपने विशेषाधिकार का प्रयोग करते हुए माफ कर दिया है. इसका मतलब है कि अब हत्या के दोषी धर्मदेव यादव की बाकी की सजा माफ हो गई है.

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में 1997 में एक दर्दनाक मामला सामने आया था. टूरिस्ट गाइड धर्मदेव यादव ने न्यूजीलैंड की रहने वाली डायना राउटले क्लेयर की हत्या कर दी थी. डायना उन दिनों भारत घूमने आई थी और वाराणसी पहुंचकर वहां एक गेस्ट हाउस में रुकी हुई थी. धर्मदेव यादव गाजीपुर के वृंदावन गांव का रहने वाला है जो टूरिस्ट गाइड के रूप में काम करता था. वह डायना से घुल मिल गया और उसे घुमाने के बहाने गाजीपुर लेकर पहुंचा और फिर अपने घर पर ही उसकी हत्या कर शव को घर में ही दफन कर दिया था.

जब धर्मदेव यादव की गिरफ्तारी हुई थी तो उसकी निशानदेही पर उसके घर से ही डायना का कंकाल बरामद हुआ था. उस कंकाल का जब डीएनए परीक्षण किया गया तो डायना के कंकाल होने की पुष्टि हुई थी. तब वाराणसी सत्र न्यायालय के तत्कालीन जज ने 25 फरवरी 2003 को धर्मदेव यादव को दोषी करार देते हुए मृत्यु दंड की सजा सुनाई थी. जबकि उसके अन्य सहयोगी को दोष मुक्त कर दिया था.

SC ने मृत्यु दंड को हटाया

वाराणसी सत्र न्यायालय के द्वारा मृत्यु दंड की सजा सुनाए जाने के बाद उच्च न्यायालय इलाहाबाद में भी इस दंड के आदेश को बहाल रखा था. बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने 2014 में मृत्यु दंड को 20 वर्ष से कठोर कारावास में बदल दिया था. वहीं अब तक धर्मदेव यादव करीब 24 वर्ष 3 महीने की सजा पूरी कर चुका है और इस दौरान जेल में उसका आचरण संतोषजनक पाया गया है. दया याचिका समिति ने उसकी रिहाई के पक्ष में संस्तुती की है.

सजा हुई माफ

इसी के आधार पर उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने अपने विशेषाधिकार का प्रयोग करते हुए उनकी शेष सजा को माफ कर दिया है. साथ ही आदेश में यदि कहा है कि यदि बंदी किसी अन्य केस में वंचित न हो तो जिला मजिस्ट्रेट के अनुसार उसके दो जमानदार और व्यक्तिगत मचल का जमा करने पर उसे कारागार से मुक्त कर दिया जाए.

वही इस मामले पर जिला अधिकारी अविनाश कुमार ने बताया कि यदि शासन का कोई भी इस तरह का आदेश आता है तो उस पर कार्रवाई जरूर किया जाएगा. वहीं जिला प्रोबेशन अधिकारी संजय सोनी ने बताया की दया माफी के इस तरह के लगातार मामले आते रहते हैं. इसके पहले भी कई मामले गाजीपुर में आ चुके हैं. जिसको लेकर विभाग के द्वारा कार्यवाही कर उसे आगे बढ़ाया जाता है.

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