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बहू, दामाद से लेकर समधन तक… जीतन राम मांझी ने 6 में से 3 ‘घरवालों’ को दिया टिकट


बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर सभी पार्टियों ने अपने उम्मीदवारों का ऐलान करना शुरू कर दिया है. इसी बीच पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की पार्टी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) ने भी छह विधानसभा प्रत्याशियों का ऐलान कर उन्हें सिंबल सौंप दिया है. इन सीटों में टेकरी, कुटुंबा, अतारी, इमामगंज, सिकंदरा और बाराचट्टी शामिल हैं.

इन उम्मीदवारों में सबसे ज्यादा चर्चा उनके खुद के परिवार की हो रही है. जीतन राम मांझी ने जिन छह प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है, उनमें से तीन प्रत्याशी उनके रिश्तेदार हैं. दरअसल HAM नेता ने अपने ही परिवार के बहू दीपा मांझी, दामाद प्रफुल्ल मांझी और समधन ज्योति कुमारी की उम्मीदवार के रूप में चुना है.

इन सीटों से परिवार को मांझी ने उतारा

इमामगंज सीट से लड़ रही दीपा मांझी, जीतन राम मांझी की बहू हैं. वहीं बाराचट्टी उम्मीदवार ज्योति देवी उनकी समधन हैं. इसके अलावा जमुई जिले के सिकंदरा से खड़े प्रत्याशी प्रफुल्ल कुमार मांझी, जीतन राम मांझी के दामाद हैं.

जीतन राम मांझी ने कहा कि हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा बिहार की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाएगी. हमारे प्रत्याशी जनता के बीच काम करने वाले जमीनी नेता हैं. HAM जनता के भरोसे के साथ चुनाव मैदान में उतर रही है. वहीं जानकार उनके इस फैसले को एक राजनीतिक रणनीति मान रहे हैं और इस फैसले को महागठबंधन के भीतर दबाव बढ़ाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है.

HAM की 100 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी

पार्टी के अध्यक्ष जीतन राम मांझी ने शुरुआत में 15 सीटों की मांग की थी और चेतावनी दी थी कि अगर उन्हें अपेक्षित हिस्सेदारी नहीं मिली तो HAM अकेले 100 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है. आखिर में गठबंधन में तालमेल बैठने के बाद, NDA ने HAM को 6 सीटें दीं, जो मांझी की मांग से कम है.

HAM के लिए यह सौदा मिक्स्ड सिग्नल देता है. 6 सीटें मिलने की खुशी है, लेकिन मांझी की अपेक्षाएं और दबाव भी कम नहीं. पार्टी ने शुरुआत से ही राजनीतिक पहचान बनाने के उद्देश्य से चुनाव लड़ा है और उसका लक्ष्य हारकर भी मान्यता प्राप्त दल बनना था. इस सीट‑विभाजन से HAM को न केवल क्षेत्रीय स्तर पर रणनीतिक फैसले लेने होंगे, बल्कि उसे यह दिखाना होगा कि वह अधिक सक्षम है. यदि HAM इन 6 सीटों में अच्छा प्रदर्शन करती है तो आगे की राजनैतिक बढ़त संभव है.

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