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बरेली हिंसा: डेढ़ साल से भीड़ नहीं जुटा पा रहा था मौलाना तौकीर रजा, इसलिए रची साजिश! गिरफ्तार ‘राजदार’ ने खोली पोल

बरेली हिंसा: डेढ़ साल से भीड़ नहीं जुटा पा रहा था मौलाना तौकीर रजा, इसलिए रची साजिश! गिरफ्तार 'राजदार' ने खोली पोल

मौलाना तौकीर राजा अरेस्ट

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में हाल ही में हुए बवाल की परतें अब खुलने लगी हैं. बरेली में उपद्रव के बाद इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल (आईएमसी) प्रमुख मौलाना तौकीर रजा खां को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. वहीं, तौकीर रजा के बेहद करीबी और आईएमसी के पूर्व जिलाध्यक्ष नदीम खां भी पुलिस की गिरफ्त में है. नदीम खां ने पुलिस की पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. नदीम ने पुलिस के सामने दावा किया है कि मौलाना डेढ़ साल से बरेली में अपने दम पर बड़ी भीड़ इकट्ठा नहीं कर पाए थे, इसी वजह से वह परेशान रहते थे.

नदीम खां ने पुलिस को बताया है कि मौलाना तौकीर रजा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुसलमानों के बीच फिर से अपनी पकड़ मजबूत करना चाहते थे. नदीम के मुताबिक, तौकीर रजा का मानना था कि मजहबी मुद्दों की आड़ लेकर वह खुद को मुस्लिम समाज का रहनुमा साबित कर सकते हैं. इसी मकसद से उन्होंने इस्लामिया मैदान में बड़ी भीड़ जुटाने की योजना बनाई.

पूर्व जिलाध्यक्ष ने पुलिस को बताया कि मौलाना का इरादा केवल धार्मिक संदेश देना नहीं था, बल्कि इसके पीछे राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं भी जुड़ी थीं. वह चाहते थे कि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस, सपा और बसपा जैसे दलों को दिखाया जाए कि वह मुस्लिम वोट बैंक को अपने इशारे पर खड़ा कर सकते हैं.

फर्जी पत्र और संगठन में फूट

पूछताछ में नदीम ने एक और बड़ा खुलासा किया. उसने बताया कि प्रदर्शन वाले दिन प्रशासन को गुमराह करने के लिए एक पत्र तैयार किया गया था, जिस पर आईएमसी के प्रदेश मीडिया प्रभारी लियाकत खां के फर्जी हस्ताक्षर कराए गए थे. इस काम में नफीस भी शामिल था और तीसरे शख्स से हस्ताक्षर कराए गए थे. यही पत्र पुलिस को सौंपा गया.

एसएसपी अनुराग आर्य ने बताया कि पूछताछ में साफ हुआ कि रात में पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों से नदीम और नफीस की बात हुई थी. फोन पर मौलाना तौकीर से राय लेने के बाद ही कार्यक्रम स्थगित करने का आश्वासन लिखा गया था. लेकिन जब यह पत्र पार्टी के ग्रुप में पहुंचा तो मौलाना ने खुद ही उस पर सवाल उठाए और इसे फर्जी करार दे दिया. इसके बाद मौलाना ने वीडियो जारी कर पूरे मामले को और उलझा दिया.

नदीम ने बताया कि संगठन के भीतर दो गुट बने हुए थे. एक तरफ नदीम और नफीस थे, जबकि दूसरी ओर मुनीर इदरीशी, अनीस सकलैनी और अहसानुल हक उर्फ चतुर्वेदी का गुट था. दोनों गुटों के बीच आपसी खींचतान पहले से चली आ रही थी. यही खींचतान आगे चलकर बवाल की वजह बनी.

आरोपियों पर बढ़ा शिकंजा

नदीम ने अपनी भूमिका को कम बताते हुए कहा कि भीड़ जुटाने का काम सीधे तौर पर मुनीर इदरीशी और नफीस ने किया था. उसका कहना था कि वह तो इस्लामिया मैदान की ओर जा रहे लोगों को शांत कराने की कोशिश कर रहा था और खुद मौलाना को भी समझा रहा था कि प्रशासन अनुमति नहीं दे रहा है, इसलिए मैदान नहीं जाना चाहिए.

हालांकि, पुलिस का मानना है कि नदीम भी इस पूरे घटनाक्रम का अहम हिस्सा था. बवाल के बाद वह शाहजहांपुर के कटरा इलाके में अपने मामा के घर भाग गया था. बाद में पकड़े जाने पर उसने पुलिस को जो जानकारी दी, उससे जांच में कई नई कड़ियां जुड़ गई हैं.

एसएसपी अनुराग आर्य ने कहा कि नदीम से मिली जानकारी आगे की जांच और अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी में मददगार साबित होगी. उन्होंने यह भी साफ किया कि अगर मौलाना की योजना कामयाब हो जाती तो नौ फरवरी 2024 की तरह एक बार फिर भड़काऊ तकरीर से हालात बिगड़ सकते थे.

सियासी महत्वाकांक्षा बनी वजह

पूरी जांच से साफ हो रहा है कि मौलाना तौकीर रजा का मकसद केवल धार्मिक भीड़ जुटाना नहीं था, बल्कि इसके पीछे सियासी महत्वाकांक्षाएं छिपी थीं. लंबे समय से बड़ी भीड़ न जुटा पाने से उनकी सियासी पकड़ कमजोर हो रही थी. यही वजह रही कि उन्होंने बरेली से एक बड़ा संदेश देने और खुद को मुस्लिम समाज का रहनुमा साबित करने की कोशिश की. फिलहाल पुलिस सभी गुटों की भूमिका की जांच कर रही है और जल्द ही अन्य आरोपियों पर भी शिकंजा कसने की तैयारी है.

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