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फॉर्म-7 भरकर किसी का नाम कटवाया तो खैर नहीं! होगी जेल, UP में चुनाव आयोग के सख्त तेवर

फॉर्म-7 भरकर किसी का नाम कटवाया तो खैर नहीं! होगी जेल, UP में चुनाव आयोग के सख्त तेवर

वोटर लिस्ट से नाम कटने के विवाद पर चुनाव आयोग सख्तImage Credit source: PTI (फाइल फोटो)

एसआईआर (SIR) पर जारी बवाल के बीच उत्तर प्रदेश में गलत तरीके से किसी का नाम कटवाने का फार्म-7 भरने वालों पर चुनाव आयोग ने एक्शन लेने की बात कही है. यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने प्रदेश भर के जिला निर्वाचन अधिकारियों को फार्म-7 में जानबूझकर झूठा कथन या मिथ्या घोषणा करने पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया है. उन्होंने बताया कि मिथ्या घोषणा करने पर 1 साल तक के कारावास या जुर्माने या दोनों से दंडित करने का प्रावधान है.

उन्होंने यह भी निर्देश दिए हैं कि इन विधिक प्रावधानों और आयोग के दिशा-निर्देशों का प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि आमजन को फार्म-7 दाखिल करते समय सही और तथ्यपरक जानकारी देने और मिथ्या घोषणा करने के विधिक परिणामों के प्रति जागरूक किया जा सके.

यूपी में वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने का विशेष अभियान शुरू

यूपी में मतदाता सूची को दुरुस्त करने और नए मतदाताओं को जोड़ने के लिए शनिवार, 17 अक्टूबर से विशेष मतदाता पंजीकरण अभियान की शुरुआत हो गई है. इस अभियान के तहत विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची से बाहर हुए लोगों को दोबारा नाम जुड़वाने का मौका दिया जा रहा है. इसके अलावा 18 साल की उम्र पूरी कर चुके युवा भी मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज करा सकते हैं. प्रदेश के विभिन्न शहरों में बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) निर्धारित केंद्रों पर बैठकर लोगों से आवेदन प्राप्त कर रहे हैं. केंद्रों पर नए मतदाता बनने और मतदाता सूची में अपना नाम दोबारा दर्ज कराने के लिए लोग पहुंच रहे हैं.

इस अभियान को 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची में नाम जोड़ने की अहम कवायद के तौर पर देखा जा रहा है. हालांकि मुख्य निर्वाचन अधिकारी के मुताबिक, प्रदेश में मतदाताओं की संख्या और आबादी के अनुपात के बीच अंतर को देखते हुए अधिक से अधिक पात्र लोगों को मतदाता सूची में शामिल करने पर जोर दिया जा रहा है. अभियान में विशेष रूप से महिलाओं और युवाओं पर फोकस किया जा रहा है, क्योंकि मतदाता सूची में इनका प्रतिनिधित्व अपेक्षित अनुपात से कम है.

करीब 2 करोड़ मतदाताओं को जोड़ने की उम्मीद

यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा के मुताबिक, प्रदेश की आबादी के हिसाब से मतदाताओं की संख्या करीब 16 करोड़ होनी चाहिए थी, जबकि SIR के बाद तैयार मतदाता सूची में लगभग साढ़े 14 करोड़ मतदाताओं के नाम सामने आए. इस तरह दोनों आंकड़ों के बीच करीब डेढ़ करोड़ का अंतर है. निर्वाचन अधिकारी ने पात्र मतदाताओं को जोड़ने की जरूरत पर जोर दिया है. वहीं, अभियान से जुड़े विवरण में करीब दो करोड़ नए मतदाताओं को जोड़ने की उम्मीद जताई जा रही है.

इस अभियान का उद्देश्य उन सभी पात्र लोगों को मतदाता सूची में शामिल करना है, जिनका नाम किसी कारण से सूची में नहीं है. इनमें SIR के दौरान नाम कटने वाले मतदाता, पहली बार वोटर बनने वाले युवा और अन्य पात्र नागरिक शामिल हैं. अभियान के दौरान फॉर्म-6 के माध्यम से नए मतदाता के रूप में रजिस्ट्रेशन कराया जा सकता है. हालांकि, पात्रता और आवेदन से जुड़े दस्तावेजों का सत्यापन निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया जाएगा.

SIR से अलग है ये प्रक्रिया

मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने स्पष्ट किया कि वर्तमान विशेष मतदाता पंजीकरण अभियान SIR से अलग प्रक्रिया है. उन्होंने बताया कि SIR के दौरान इस्तेमाल किए जा रहे फॉर्म-6 और अब सामान्य मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 की प्रक्रिया में अंतर है.

उनके मुताबिक, अब पहले की तरह सामान्य मतदाता पंजीकरण की प्रक्रिया अपनाई जा रही है. इसमें आधार कार्ड के माध्यम से जन्मतिथि और पते से संबंधित जानकारी देने की व्यवस्था में बदलाव किया गया है. SIR के दौरान आधार कार्ड को जन्मतिथि के प्रमाण के रूप में स्वीकार नहीं किया जा रहा था और जन्म प्रमाणपत्र, हाईस्कूल की मार्कशीट सहित अन्य दस्तावेजों के विकल्प दिए गए थे. अब आवेदन प्रक्रिया में पहले वाली व्यवस्था के अनुरूप बदलाव किए गए हैं.

17 और 24 अक्टूबर को विशेष अभियान

निर्वाचन अधिकारी के मुताबिक, फिलहाल 17 और 24 अक्टूबर को विशेष अभियान चलाया जा रहा है. इसका प्रमुख उद्देश्य SIR के दौरान छूटे या हटाए गए पात्र मतदाताओं और मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने से वंचित लोगों को अवसर देना है. हालांकि, इस दौरान फॉर्म-7 और फॉर्म-8 भी लिए जा रहे हैं.

उन्होंने बताया कि इसके बाद सामान्य विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SSR) की प्रक्रिया भी होगी. इसमें सभी राजनीतिक दलों के साथ मतदाता सूची साझा की जाएगी और आपत्तियां दर्ज कराने के लिए निर्धारित समय दिया जाएगा. निर्वाचन अधिकारी ने यह भी कहा कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया किसी एक जाति विशेष तक सीमित नहीं है. जिन लोगों के नाम कटे हैं, उनमें सभी जातियों के लोग शामिल हैं.

आजमगढ़ में एक युवक के 10 जगह वोटर लिस्ट में नाम होने पर जांच

मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर समाजवादी पार्टी की ओर से उठाए गए सवालों के बीच आजमगढ़ का एक मामला भी चर्चा में है. आरोप है कि आजमगढ़ विधानसभा क्षेत्र के विकास यादव नामक युवक का नाम 10 जगह मतदाता सूची में दर्ज है. इस मामले को लेकर सपा ने सवाल उठाए थे.

मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने कहा, ‘यह एक विशिष्ट मामला है और इसकी जांच कराई जा रही है. आजमगढ़ के जिला निर्वाचन अधिकारी को जांच के निर्देश दिए गए हैं. जांच पूरी होने के बाद वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाएगी. अगर किसी की गलती या अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी’.

निर्वाचन अधिकारी के मुताबिक, अलग-अलग समय पर आवेदन आने और उन्हें जमा किए जाने के कारण ऐसी स्थिति पैदा होने की आशंका हो सकती है. उन्होंने कहा कि डुप्लीकेट मतदाताओं को रोकने के लिए लगातार काम किया जा रहा है. हालांकि, एक व्यक्ति के नाम पर कई जगह प्रविष्टियां होने के मामले में जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि गड़बड़ी किस स्तर पर और कैसे हुई.

अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मतदाता सूची में कथित गलतियों को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि जब आम लोग चुनाव आयोग की गलतियां पकड़ सकते हैं, तो पूरे विभाग और अत्याधुनिक तकनीक की व्यवस्था होने के बावजूद आयोग खुद अपनी गलतियां क्यों नहीं पकड़ पा रहा है?

अखिलेश यादव ने सवाल किया कि चुनाव आयोग आंकड़ों को सही-गलत की कसौटी पर परखे बिना प्रकाशित क्यों कर रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि आयोग मतदाताओं के मामलों में ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी’ के आधार पर त्रुटियां पकड़ रहा है, लेकिन अपने आंकड़ों की तार्किक गलतियों को क्यों नहीं पकड़ पा रहा है या उन्हें पकड़ने की कोशिश क्यों नहीं की जा रही है. उन्होंने इसे जनता से जुड़ा अहम सवाल बताया.

अखिलेश के आरोपों पर यूपी CEO ने क्या कहा?

अखिलेश यादव के आरोपों पर जवाब देते हुए मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने कहा कि चुनाव आयोग मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया में AI तकनीक का इस्तेमाल नहीं करता है. हालांकि, डुप्लीकेट मतदाताओं के नाम हटाने का काम समय-समय पर किया जाता है. उन्होंने कहा कि आजमगढ़ के विकास यादव के नाम पर 10 जगह वोट दर्ज होने के मामले की जांच जिला निर्वाचन अधिकारी कर रहे हैं. जांच पूरी होने के बाद वास्तविक स्थिति सामने रखी जाएगी. उन्होंने दोहराया कि मतदाता सूची में डुप्लीकेट नाम न रहें, इसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं.

अखिलेश की 100 विधानसभा क्षेत्रों में गड़बड़ी की शिकायत की भी जांच

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि अखिलेश यादव की ओर से मतदाता सूची को लेकर की जाने वाली शिकायतों को गंभीरता से लिया जाता है. उन्होंने बताया कि सपा अध्यक्ष ने करीब 100 विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूची में गड़बड़ी होने की शिकायत की है, जिसकी जांच की जा रही है. रिणवा के मुताबिक, मतदाता सूची में गड़बड़ी का कारण हमेशा किसी राजनीतिक दल का हस्तक्षेप या जानबूझकर की गई कार्रवाई नहीं होता. आवेदन भरने या जानकारी दर्ज करने में भी गलतियां हो सकती हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया में किसी विशेष जाति को निशाना नहीं बनाया जा रहा है.

SIR के रिकॉर्ड पर भी निर्वाचन अधिकारी ने दी सफाई

एसआईआर और उसके बाद दोबारा मतदाता पंजीकरण अभियान चलाए जाने पर उठ रहे सवालों के जवाब में निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि इस प्रक्रिया का रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाएगा. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि वर्तमान में साल 2003 की मतदाता सूची के रिकॉर्ड की जरूरत पड़ रही है. इसी तरह आज तैयार होने वाले रिकॉर्ड भी आने वाले सालों में काम आएंगे. उन्होंने भरोसा दिलाया कि मतदाता पंजीकरण से संबंधित रिकॉर्ड भविष्य में भी उपयोग के लिए सुरक्षित रहेगा.

महिलाओं और युवाओं को जोड़ने पर विशेष जोर

निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि मतदाता सूची में महिलाओं और युवाओं की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. आंकड़ों के अनुपात के हिसाब से इन वर्गों के अधिक पात्र लोगों को मतदाता सूची में शामिल करने की जरूरत है. इसी उद्देश्य से विशेष अभियान चलाया जा रहा है.

प्रदेश में चल रही इस कवायद का असर 2027 के विधानसभा चुनाव में देखने को मिल सकता है. अगर बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम सूची में जुड़ते हैं, तो चुनाव से पहले मतदाता आधार का विस्तार होगा. हालांकि नए मतदाताओं की वास्तविक संख्या और डुप्लीकेट प्रविष्टियों से जुड़े सवालों पर स्थिति जांच, सत्यापन और आगे की पुनरीक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी.

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पंकज चतुर्वेदी

पंकज चतुर्वेदी

पंकज चतुर्वेदी को पत्रकारतिा के क्षेत्र में एक दशक से ज्यादा का अनुभव है. देश और उत्तरप्रदेश की राजनीति को कवर करते आ रहे हैं. दिल्ली में अमर उजाला और पंजाब केसरी से पत्रकारिता की यात्रा की शुरुआत हुई.  दिल्ली में 2 साल की पत्रकारिता के बाद मिट्टी की खुशबू यूपी खींच लाई और तब से राजधानी लखनऊ में ही पत्रकारिता हो रही है. 2017 में यात्रा को विस्तार देते हुए इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े. राजनीतिक खबरों में गहरी रुचि और अंदर की खबर को बाहर लाने का हुनर, साथ ही यूपी की ब्यूरोकेसी में खास पकड़.  पत्रकारिता का फलसफा खबरों को खबर के रूप में ही जनता तक पहुंचाना.

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