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पढ़ाई में टॉपर, 60 लाख का पैकेज, नाम से छपे मेडिकल रिसर्च पेपर… 100 में से 99 नंबर लाने वाला डॉक्टर आदिल कैसे बन गया आतंकी?

पढ़ाई में टॉपर, 60 लाख का पैकेज, नाम से छपे मेडिकल रिसर्च पेपर... 100 में से 99 नंबर लाने वाला डॉक्टर आदिल कैसे बन गया आतंकी?

डॉक्टर आदिल अहमद राठर को पुलिस ने सहारनपुर से गिरफ्तार किया था.

अक्सर कम पढ़े लिखे और बेरोजगार युवाओं को अपने नापाक मंसूबों में शामिल करने वाले आतंकी आकाओं ने अब अपना पैंतरा बदल दिया है. आतंक का नया मॉड्यूल वॉइट कॉलर आंतकी मॉड्यूल के तौर पर उभर कर आया है. 10 नवंबर को लाल किला के पास कार में ब्लास्ट के पीछे भी वॉइट कॉलर आंतकी मॉड्यूल का ही हाथ था, जिसमें पढ़ें लिखे डॉक्टर, प्रोफेसर और इंजिनियर शामिल थे. आतंकी साजिश का ब्लू प्रिंट बनाने से लेकर अंजाम देने तक सभी का अलग-अलग रोल फिक्स था.

ब्लास्ट में 15 लोगों की मौत

बीते 10 नवंबर को लाल किले के पास हुए ब्लास्ट में 15 लोगों की जान चली गई. इस घटना ने पूरे देश को हिला कर रख दिया. जांच एजेंसियों की जांच-जपड़ताल में जो बातें सामने निकल कर आई हैं, वो और भी हैरान कर देने वाली हैं. i20 कार में विस्फोटक भर फिदायीन हमला कर लोगों की जान लेना वाला आतंकी कोई आम आदमी नहीं, बल्कि पढ़ा-लिखा पेशेवर डॉक्टर उमर था. सिर्फ डॉक्टर उमर ही नहीं, इस पूरे सफेदपोश आंतकी मॉड्यूल में ज्यादातर पढ़े-लिखे डॉक्टर थे.

TV9 भारतवर्ष के हाथ सहारनपुर से पकड़े गए डॉ. अदिल अहमद राठर के स्कूली और मेडिकल की पढ़ाई के दस्तावेज लगे हैं, जिन्हें देखकर यकीन कर पाना मुश्किल है कि पढ़ाई में इतना तेज रहा शख्स इतना कट्टरपंथी और आतंकी मानसिक का कैसे हो सकता है?

अनंतनाग के सरकारी मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर रहा

पढ़ने में होशियार आतंकी डॉ. आदिल अहमद राठर के सेकेंडरी क्लास में मैथ सब्जेक्ट में 100 में से 99 नंबर और साइंस में 100 में से 98 नंबर आए थे. इतना ही नहीं उसने अव्वल दर्जे से MBBS और मेडिसिन में MD की डिग्री भी की हुई थी. 2022 में अनंतनाग के सरकारी मेडिकल कॉलेज में सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर भी रहा. यहीं से आदिल ने सहारनपुर का रुख किया.

आदिल की काबिलियत को देखते हुए फेमस मेडिकेयर अस्पताल प्रशासन ने 5 गुना तनख्वाह पर उसको नौकरी दी. आतंकी डॉ. आदिल को अपने अस्पताल में नौकरी पर रखने वाले मनोज मिश्रा उसकी हकीकत जानकर हैरान और परेशान हैं. उनके लिए यकीन कर पाना मुश्किल है कि इतना पढ़ा-लिखा और अपने पेशे का माहिर डॉक्टर आतंकवादी कैसे हो सकता है.

फेमस अस्पताल से पहले वी-ब्रॉस अस्पताल में था डॉक्टर

फेमस अस्पताल से पहले आदिल सहारनपुर के ही वी-ब्रॉस अस्पताल में नौकरी करता था. अस्पताल की वाइस प्रेसिडेंट डॉ. ममता के मुताबिक, आदिल समय और अपने काम को लेकर पंचुअल था. मरीजों और अस्पताल स्टाफ के साथ उसका व्यवहार बहुत अच्छा था. काम के अलावा किसी से बात ही नहीं करता था. मरीज न होने पर एकांत पसंद आदिल अपने टैबलेट पर उर्दू और कश्मीरी भाषा में वीडियो देखता रहता था. दूसरों के आने पर बंद कर देता था.

250 रुपए की जींस पहनता, शेयर्ड ऑटो में करता सफर

डॉ. ममता के मुताबिक, आदिल ने ऑनलाइन नौकरी के लिए एप्लाई किया था. वो स्वभाव से बेहद कंजूस था. हर महीने चार लाख रुपए से ज्यादा कमाने के बावजूद वो महज 250 की जींस पैंट पहनता था, शेयर्ड ऑटो में अस्पताल आता-जाता और अपनी सैलरी डोनेट करने का दावा करता था. साढ़े तीन महीने में ही बिना नोटिस दिए ज्यादा सैलरी का हवाला देते हुए फेमस अस्पताल में चला गया.

अब सवाल ये उठता है कि अब तक कम पढ़े-लिखे लोगों का ब्रेन वॉश कर अपने नापाक मंसूबों को अंजाम देने के लिए इस्तेमाल करने वाले आतंकी संगठन अब कैसे पढ़े-लिखे डॉक्टर जैसे पेशेवर लोगों को आतंक की राह पर चलने के लिए तैयार कर रहे हैं?

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