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नौकरी 22000 की, अयोध्या में आलीशान घर और हॉस्टल… टेंपो चलाने वाला टिन्नू यादव कैसे बना ‘करोड़पति’? चंपत राय का खास

नौकरी 22000 की, अयोध्या में आलीशान घर और हॉस्टल... टेंपो चलाने वाला टिन्नू यादव कैसे बना 'करोड़पति'? चंपत राय का खास

रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव पर गंभीर आरोप लग रहे हैं.

Ayodhya Ram Mandir Donation Row: अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की रकम और जेवरों में गबन के आरोपों के बाद रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव का नाम सुर्खियों में है. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के करीबी सहयोगी माने जाने वाले टिन्नू यादव को लेकर कई तरह के दावे और आरोप सामने आ रहे हैं. हालांकि, अब तक इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. वहीं मामले की जांच के लिए गठित 3 सदस्यीय SIT टीम ने भी अपनी जांच-पड़ताल शुरू कर दी है. आज SIT की टीम अयोध्या राम मंदिर पहुंची. इस दौरान ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और गोपालजी राव मंदिर परिसर में मौजूद रहे. आइए जानते हैं चंपत राय के खासमखास टिन्नू यादव के बारे में…

बता दें कि टिन्नू यादव का परिवार अयोध्या के नया घाट इलाके में रहता था. उसके पिता नया घाट पर चाय की दुकान चलाते थे. 1990 के दशक में टिन्नू यादव टेंपो चलाने का काम करता था. इसी दौरान उसकी मुलाकात श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति से जुड़े महेश नारायण से हुई, जिन्होंने उसे अपना ड्राइवर रख लिया. महेश नारायण के साथ काम करते हुए टिन्नू यादव का कारसेवकपुरम और राम मंदिर आंदोलन से जुड़े लोगों के बीच आना-जाना शुरू हुआ. इसी दौरान उसने संगठन के कई प्रमुख पदाधिकारियों के साथ संपर्क बना लिया.

चंपत राय के करीब कैसे पहुंचा?

साल 2002 में महेश नारायण के निधन के बाद टिन्नू यादव की भूमिका बदलने लगी. इसके बाद उसने चंपत राय के साथ काम करना शुरू किया. संगठन से जुड़े विभिन्न वाहनों का संचालन संभाला. समय के साथ उसकी पहचान एक भरोसेमंद सहयोगी के रूप में बनने लगी. राम मंदिर निर्माण की प्रक्रिया शुरू होने के बाद उसकी जिम्मेदारियां और बढ़ गईं. मंदिर परिसर में व्यवस्थाओं के संचालन, कर्मचारियों के समन्वय और अन्य प्रशासनिक कार्यों में उसकी सक्रिय भूमिका बताई जाती है.

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मंदिर निर्माण के साथ बढ़ी जिम्मेदारी

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जब राम मंदिर निर्माण कार्य शुरू हुआ तो टिन्नू यादव ट्रस्ट के वेतनभोगी कार्यकर्ता के रूप में जुड़ा. उसे मासिक वेतन (करीब 22000 रुपए) भी दिया जाता था. हालांकि, ट्रस्ट के भीतर उसकी भूमिका केवल एक कर्मचारी तक सीमित नहीं रही. मंदिर परिसर से जुड़े कई लोगों का दावा है कि सुरक्षा व्यवस्था, प्रबंधन और विभिन्न प्रशासनिक गतिविधियों में उसकी महत्वपूर्ण भागीदारी रही. उसे वॉकी-टॉकी समेत वे सभी सुविधाएं उपलब्ध थीं, जो प्रमुख प्रबंधन कर्मियों को दी जाती हैं.

टिन्नू ने नाका क्षेत्र में बनवाया नया घर

टिन्नू यादव की संपत्तियों को लेकर बात करें तो जांच-पड़ताल के दौरान पता चला कि नाका क्षेत्र में उसका दो मंजिला मकान है, जो अभी नया बना है. ये मकान एक कोचिंग सेंटर के पास. वर्तमान में इसको हॉस्टल के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है. स्थानीय लोगों के मुताबिक, करीब 1500 वर्गफीट में बने इस मकान में कुल 14 कमरे हैं. इनमें ग्राउंड फ्लोर पर 9 कमरे और पहली मंजिल पर 5 कमरे बनाए गए हैं. नीचे लड़के और ऊपर लड़कियां किराये पर रहकर पढ़ाई करती हैं. हर एक कमरे का मासिक किराया करीब 2700 रुपए है. इस हिसाब से हर महीने 37 हजार रुपए तक किराया टिन्नू को मिलता था. स्थानीय प्रॉपर्टी कारोबारियों के अनुसार, जिस इलाके में यह मकान बना है, वहां जमीन की कीमत करीब 2500 से 3000 रुपए प्रति वर्गफीट के बीच बताई जाती है.

राम मंदिर से 1.5 किलोमटीर दूर टिन्नू यावद का पुराना घर

नए मकान के अलावा टिन्नू यादव का पुश्तैनी घर भी अयोध्या के स्वर्गद्वारी मोहल्ले में स्थित है. तुलसी पार्क के पीछे बना यह मकान राम मंदिर परिसर से करीब डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर है. बाहर से देखने पर यह घर संकरा दिखाई देता है और इसकी चौड़ाई करीब सात फीट बताई जाती है, लेकिन यह तीन मंजिला बना है. घर पर मौजूद परिजनों से बातचीत में जानकारी मिली कि टिन्नू के परिवार में उनका एक बेटा है, जबकि उनकी एक बेटी का कुछ वर्ष पहले निधन हो चुका है. बेटा रवि यादव लोक निर्माण विभाग (PWD) में संविदा कर्मचारी के रूप में कार्यरत है.

चढ़ावे की रकम बैंक तक पहुंचाने की जिम्मेदारी

राम मंदिर ट्रस्ट के एक पूर्व लेखा ने दावा किया कि मंदिर की दान पेटियों से प्राप्त नकदी की गिनती एक निर्धारित प्रक्रिया के तहत होती थी. उनके अनुसार, गिनती के बाद धनराशि को सुरक्षित लॉकर में रखा जाता था और अगले दिन उसे बैंक में जमा कराने की जिम्मेदारी टिन्नू यादव निभाता था. महिपाल सिंह का यह भी दावा है कि दान में प्राप्त सोने-चांदी और अन्य आभूषणों का पूरा रिकॉर्ड हमेशा स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं था. हालांकि, दूसरी ओर टिन्नू यादव का पक्ष रहा है कि सभी जेवरात और नकदी नियमानुसार बैंक में जमा कराए जाते रहे हैं.

जांच के घेरे में पूरा मामला

राम मंदिर चढ़ावा विवाद को लेकर अभी तक किसी पुलिस थाने में औपचारिक FIR दर्ज नहीं हुई है, लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर दिया है. SIT अब चढ़ावे की गिनती, जेवरों के रिकॉर्ड, बैंक जमा प्रक्रिया और संबंधित कर्मचारियों की भूमिकाओं की जांच कर रही है. इस बीच, टिन्नू यादव का नाम विवाद के केंद्र में आ गया है. हालांकि, उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी.

Ashutosh Pathak

Ashutosh Pathak

सन् 2016 से पत्रकारिता के पेशे में कदम रखा. अयोध्या राम जन्मभूमि विवाद से लेकर सुप्रीम कोर्ट के सुप्रीम फैसले तक और अब राम जन्मभूमि पर राम मंदिर के निर्माण तक का बारीकियों से अध्ययन और रिपोर्टिंग कर रहा हूं.

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