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नोएडा में मजदूरों का उग्र आंदोलन, अब तक कितना हुआ नुकसान?

नोएडा में मजदूरों का उग्र आंदोलन, अब तक कितना हुआ नुकसान?

प्रदर्शन के दौरान करीब 150 वाहनों को नुकसान पहुंचाया

Noida Workers Protest Turns Violent: नोएडा में श्रमिकों के उग्र प्रदर्शन ने शहर को गहरे नुकसान की स्थिति में ला खड़ा कर दिया है. वेतन वृद्धि की मांग को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन देखते ही देखते हिंसक रूप ले बैठा, जिसके चलते न सिर्फ कानून-व्यवस्था प्रभावित हुई, बल्कि औद्योगिक गतिविधियों पर भी गंभीर असर पड़ा. इस पूरे घटनाक्रम में बड़ी संख्या में वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया और सैकड़ों फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आई हैं.

प्रदर्शन के दौरान सबसे ज्यादा असर सड़कों पर खड़े और गुजर रहे वाहनों पर देखने को मिला. शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक करीब 150 वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया. इनमें लगभग 100 चार पहिया वाहन शामिल हैं, जिनमें कार और कुछ छोटे कमर्शियल वाहन भी हैं. वहीं करीब 50 दोपहिया वाहनों को भी भीड़ ने निशाना बनाया.

कई जगहों पर वाहनों में आग लगा दी गई, जिससे वे पूरी तरह जलकर खाक हो गए. वहीं कई वाहनों के शीशे तोड़ दिए गए, बॉडी को नुकसान पहुंचाया गया और उन्हें पलट दिया गया. इस तरह की घटनाओं से आम लोगों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ा.

300 से ज्यादा फैक्ट्रियों में तोड़फोड़

इस हिंसा का सबसे बड़ा असर औद्योगिक क्षेत्र पर पड़ा. जानकारी के मुताबिक करीब 300 फैक्ट्रियों और औद्योगिक इकाइयों में तोड़फोड़ की गई. कई जगह प्रदर्शनकारियों ने फैक्ट्री गेट तोड़े, ऑफिस के शीशे फोड़े और अंदर घुसकर मशीनों व अन्य सामान को नुकसान पहुंचाया. कुछ जगहों पर शोरूम और सर्विस सेंटर भी निशाने पर रहे, जहां खड़ी गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया.

इससे उद्योगपतियों और व्यापारियों को भारी आर्थिक झटका लगा है. इतने बड़े पैमाने पर हुई तोड़फोड़ और आगजनी को देखते हुए अनुमान लगाया जा रहा है कि हिंसा में करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है.

फैक्ट्रियों के इंफ्रास्ट्रक्चर, मशीनरी और स्टॉक को जो नुकसान पहुंचा है, उसका आकलन अभी किया जा रहा है, लेकिन शुरुआती रिपोर्ट्स इसे बेहद गंभीर आर्थिक क्षति बता रही हैं. उद्योग संगठनों का कहना है कि इस तरह की घटनाओं से निवेश पर भी असर पड़ता है और क्षेत्र की औद्योगिक छवि को नुकसान पहुंचता है.

कहां-कहां हुआ सबसे ज्यादा नुकसान?

नोएडा के कई औद्योगिक क्षेत्र इस हिंसा से प्रभावित हुए. खासतौर पर फेस-2, सेक्टर 63, 57, 58, 62 और ईकोटेक थर्ड के क्षेत्रों में प्रदर्शनकारियों ने जमकर हंगामा किया. कई जगह सड़कों पर जाम लगाया गया और पुलिस के साथ भी टकराव की स्थिति बनी.

सेक्टर 63 में तो हालात इतने बिगड़ गए कि थाने पर भी पथराव किया गया. इसके अलावा कई इंडस्ट्रियल एरिया में कंपनियों के बाहर खड़ी गाड़ियों और संपत्तियों को निशाना बनाया गया.

घटना के बाद पुलिस और प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया. बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई और संवेदनशील इलाकों में लगातार निगरानी रखी गई. अब तक 90 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है, जबकि 300 लोगों की पहचान की जा रही है.

साथ ही सरकार ने श्रमिकों की कुछ मांगों को मानते हुए न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी का फैसला भी लिया है, ताकि स्थिति को सामान्य किया जा सके. अधिकारियों का कहना है कि बातचीत के जरिए ही स्थायी समाधान निकाला जाएगा और किसी भी तरह की हिंसा से सिर्फ नुकसान ही होता है.

सरकार और प्रशासन की अपील

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन लगातार श्रमिकों से शांति बनाए रखने की अपील कर रहा है. साथ ही आज ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण में श्रमिकों को बातचीत के लिए बुलाया गया है, ताकि स्थायी समाधान निकाला जाए और किसी भी तरह की हिंसा को रोका जा सके.

नोएडा में हुआ यह उग्र प्रदर्शन न सिर्फ कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती बना, बल्कि इसने औद्योगिक ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचाया है. 150 से ज्यादा वाहनों और 300 से अधिक फैक्ट्रियों को नुकसान पहुंचना इस बात का संकेत है कि स्थिति कितनी गंभीर थी. अब सभी की नजर इस बात पर है कि प्रशासन कितनी तेजी से हालात को पूरी तरह सामान्य कर पाता है.

नदीम सैफी

नदीम सैफी

नदीम सैफी पिछले 11 साल से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. राजनीति व क्राइम की खबरों पर मजबूत पकड़ है. कई टीवी चेन्नल्स में बतौर रिपोर्टर काम कर चुके हैं. कोरोना काल में जब लोग घरों में कैद थे तब सड़कों पर उतरकर लोगों को ग्राउंड जीरो से रूबरू करवाया. नोएडा में एक दैनिक समाचार पत्र से शुरुआत की और R9 टीवी, नवतेज टीवी, प्राइम न्यूज़ व जनतंत्र टीवी में काम का अनुभव लिया. फिलहाल TV9 में बतौर डिजिटल रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हैं.

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