दक्षिण प्रशांत महासागर में आया 7.2 तीव्रता का भूकंप, सुनामी की चेतावनी जारी

दक्षिण प्रशांत महासागर में स्थित वानुअतु द्वीपसमूह के पास शनिवार, 24 अक्टूबर को 7.2 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया. इसके बाद प्रशांत सुनामी चेतावनी केंद्र ने सुनामी की चेतावनी जारी की. केंद्र के अनुसार, भूकंप के केंद्र से 300 किलोमीटर के दायरे में स्थित तटीय इलाकों में खतरनाक समुद्री लहरें उठने की आशंका है.
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) की शुरुआती जानकारी के मुताबिक, भूकंप समुद्र के भीतर 10 किलोमीटर की गहराई पर आया. इसी क्षेत्र में 6.9 तीव्रता की एक अन्य रीडिंग भी दर्ज की गई है. हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ये दो अलग-अलग भूकंप थे या एक ही घटना के शुरुआती आकलन में आया अंतर.
Notable quake, preliminary info: M 7.2 – 200 km W of Sola, Vanuatu https://t.co/QrOSC2qNYK
— USGS Earthquakes (@USGS_Quakes) October 24, 2026
सोला से करीब 200 किलोमीटर दूर था भूकंप का केंद्र
USGS के अनुसार, 7.2 तीव्रता के भूकंप का केंद्र वानुअतु के सोला शहर से लगभग 200 किलोमीटर पश्चिम में समुद्र के भीतर था. इसकी गहराई करीब 10 किलोमीटर दर्ज की गई. दूसरी रीडिंग में भूकंप की तीव्रता 6.9 बताई गई. इसका केंद्र पोर्ट-ओलरी से लगभग 197 किलोमीटर पश्चिम-उत्तर-पश्चिम में और गहराई 10 किलोमीटर थी. यह रीडिंग पहले भूकंप के करीब 25 सेकंड बाद दर्ज की गई.
दोनों रीडिंग दक्षिण प्रशांत महासागर के इसी क्षेत्र में उथली भूकंपीय गतिविधि की ओर इशारा करती हैं. हालांकि, शुरुआती आंकड़ों के आधार पर यह तय नहीं हो पाया है कि ये अलग-अलग भूकंप हैं या एक ही भूकंप के बारे में निगरानी एजेंसियों के शुरुआती अनुमानों में अंतर है.
तटीय इलाकों में सुनामी की आशंका
प्रशांत सुनामी चेतावनी केंद्र ने भूकंप के केंद्र से 300 किलोमीटर के दायरे में आने वाले तटीय क्षेत्रों में खतरनाक लहरें उठने की आशंका जताई है. समुद्र के भीतर आने वाले शक्तिशाली भूकंप से सुनामी का खतरा पैदा हो सकता है, खासकर जब समुद्र तल में अचानक बदलाव होता है. ऐसे में तटीय इलाकों पर संभावित प्रभाव का आकलन भूकंप की तीव्रता, गहराई और आबादी वाले क्षेत्रों से उसकी दूरी के आधार पर किया जाता है.
भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र में है वानुअतु
वानुअतु दक्षिण प्रशांत महासागर में स्थित द्वीपों का एक समूह है. यह क्षेत्र भूकंपीय रूप से सक्रिय है, क्योंकि यहां टेक्टोनिक प्लेटों की हलचल के कारण अक्सर भूकंप आते हैं. किसी बड़े भूकंप से होने वाला नुकसान उसकी तीव्रता और गहराई के अलावा आसपास के आबादी वाले क्षेत्रों की दूरी तथा स्थानीय इमारतों और बुनियादी ढांचे की स्थिति पर भी निर्भर करता है.
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