उत्तर प्रदेशभारत

ताकि न टूटे रिश्तों की डोर… कानपुर में प्री वेडिंग शूट की तर्ज पर होगी प्री मैरिज काउंसलिंग

ताकि न टूटे रिश्तों की डोर... कानपुर में प्री वेडिंग शूट की तर्ज पर होगी प्री मैरिज काउंसलिंग

(साकेंतिक तस्वीर)

आधुनिक युग में बदलते सामाजिक परिवेश और जीवनशैली के कारण वैवाहिक रिश्तों की स्थिरता पर लगातार प्रश्न उठने लगे हैं. आज अनेक परिवार छोटी-छोटी बातों पर बिखर रहे हैं. पति-पत्नी के मामूली विवाद कभी-कभी इतने गहरे हो जाते हैं कि मामला थाने या कचहरी तक पहुंच जाता है. कुछ मामलों में तो विवाह के कुछ ही महीनों बाद तलाक की नौबत आ जाती है. इस चिंताजनक स्थिति को देखते हुए अब प्रोबेशन विभाग ने एक महत्त्वपूर्ण कदम उठाने का निर्णय लिया है. विभाग जल्द ही सखी-वन स्टॉप सेंटर में प्री मैरिज काउंसलिंग की सुविधा शुरू करने जा रहा है.

इस नई पहल का उद्देश्य शादी से पहले युवक और युवतियों को सफल एवं संतुलित वैवाहिक जीवन के लिए मानसिक रूप से तैयार करना है. विभाग ने इस दिशा में विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर लिया है और प्रारंभ में यह सुविधा सप्ताह में दो दिन के लिए उपलब्ध कराई जाएगी. इसके बाद परिणामों और आवश्यकताओं के आधार पर इसे नियमित किया जाएगा.

विवाह से पहले समझनी होगी रिश्ते की नींव

वन स्टॉप सेंटर में होने वाली यह काउंसलिंग पूरी तरह वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण पर आधारित होगी. शादी तय होने के बाद होने वाले दंपतियों को इस सत्र में बुलाया जाएगा, जहां काउंसलर उन्हें एक-दूसरे के स्वभाव, आचार-विचार, आदतों और व्यवहार से परिचित कराएंगे. यह सत्र उन्हें यह समझने में मदद करेगा कि उनके विचारों में कितनी समानता और सामंजस्य है. कई बार रिश्तों की टूटन का कारण एक-दूसरे के व्यक्तित्व को न समझ पाना होता है. इस पहल से दंपती यह सीख पाएंगे कि जीवन में मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन उनसे संवाद, सम्मान और धैर्य के साथ निपटाना ही सफल विवाह की कुंजी है.

जिला प्रोबेशन अधिकारी विकास सिंह के अनुसार, आज के समय में कई वैवाहिक विवाद ऐसे कारणों से उत्पन्न हो रहे हैं, जिन्हें समय रहते सुलझाया जा सकता है. प्री मैरिज काउंसलिंग का उद्देश्य इन्हीं छोटी गलतफहमियों को रोकना है. हम चाहते हैं कि युवक और युवतियां शादी को सिर्फ एक सामाजिक बंधन नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और साझेदारी के रूप में समझें.

Sakhi

अध्ययन और केस स्टडी से सीख

काउंसलिंग के दौरान दंपतियों को वास्तविक जीवन से जुड़ी केस स्टडी भी बताई जाएंगी. इनमें ऐसे उदाहरण होंगे, जहां मामूली बातों पर हुए विवाद बड़े झगड़ों में बदलकर घर की देहरी पार कर कानूनी लड़ाई का रूप ले चुके हैं. इन केस स्टडी के माध्यम से दंपती यह जान सकेंगे कि भावनात्मक असंवेदनशीलता और संवाद की कमी रिश्तों को किस हद तक प्रभावित कर सकती है. काउंसलर उन्हें यह बताएंगे कि एक-दूसरे की भावनाओं की कद्र करके, सहनशीलता और पारिवारिक मूल्यों का सम्मान करते हुए वैवाहिक जीवन को सुखद बनाया जा सकता है.

विशेषज्ञों और छात्रों की मदद

इस योजना को सफल बनाने के लिए प्रोबेशन विभाग जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से संपर्क करने वाला है. यहां पर मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल से बात करके यह अनुरोध किया जाएगा कि मनोविज्ञान कोर्स के दो वरिष्ठ छात्र सप्ताह में दो दिन वन स्टॉप सेंटर में उपस्थित रहे. ये छात्र काउंसलिंग टीम का हिस्सा बनकर वास्तविक सत्रों में भाग लेंगे और काउंसलिंग प्रक्रिया में व्यवहारिक सहयोग देंगे. इससे न केवल युवाओं को बेहतर मार्गदर्शन मिलेगा, बल्कि छात्रों को भी वैवाहिक मनोविज्ञान से जुड़े व्यावहारिक अनुभव हासिल होंगे.

जिला प्रोबेशन अधिकारी विकास सिंह ने बताया कि प्रारंभिक चरण में दो दिन के लिए यह व्यवस्था लागू होगी. यदि इसकी प्रतिक्रिया सकारात्मक रही और लाभार्थियों की संख्या बढ़ी, तो विभाग इस परियोजना को नियमित करने के लिए महिला निदेशालय को प्रस्ताव भेजेगा. विभाग का लक्ष्य है कि आने वाले समय में हर जिले के वन स्टॉप सेंटर में यह सेवा निरंतर उपलब्ध हो और इसे विवाह प्रक्रिया का अहम अंग बनाया जाए.

नई मानसिकता की ओर समाज

विशेषज्ञ मानते हैं कि जैसे हर क्षेत्र में प्रशिक्षण और तैयारी आवश्यक होती है, वैसे ही विवाह जैसे जीवन के महत्त्वपूर्ण निर्णय से पहले मानसिक और भावनात्मक तैयारी भी जरूरी है. प्री मैरिज काउंसलिंग उसी दिशा में एक सकारात्मक कदम है. इससे विवाह के प्रति दृष्टिकोण अधिक वास्तविक और परिपक्व बनेगा. जब दोनों पक्ष एक-दूसरे की सोच, अपेक्षाओं और सीमाओं को समझेंगे, तो एक मजबूत रिश्ते की नींव रखी जा सकेगी. समाज में आज विवाह को लेकर कई मिथक और पूर्वधारणाएं प्रचलित हैं. नई पहल इन धारणाओं को बदलते हुए एक स्वस्थ संवाद की शुरुआत करेगी. यह पहल न केवल विवाह संस्था को मजबूत करेगी बल्कि उन घरों में भी शांति और संतोष का वातावरण ला सकती है, जो अब तक अनजाने में झगड़ों के दायरे में आ रहे थे.

कानपुर में शुरू होने जा रही यह पहल यदि सफल रही, तो यह मॉडल प्रदेश के अन्य जिलों में भी लागू किया जा सकेगा. प्री मैरिज काउंसलिंग सिर्फ एक सेवा नहीं, बल्कि बदलते समाज की एक नई जरूरत बनकर उभर रही है जहां शादी अब केवल एक रस्म नहीं, बल्कि आपसी समझ और परिपक्वता की साझेदारी है.

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button