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खामेनेई, ईरानी यूनिवर्सिटी और लखनऊ… भारत में मुस्लिमों के प्रदर्शन की क्या है कहानी ?

खामेनेई, ईरानी यूनिवर्सिटी और लखनऊ… भारत में मुस्लिमों के प्रदर्शन की क्या है कहानी ?

वैश्विक राजनीति और धार्मिक पहचान जब एक साथ जुड़ते हैं, तो सड़क पर भावनाएं उतर आती हैं. ईरान और अमेरिका ने ईरान पर संयुक्त सैन्य हमला किया, जिसमें ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई समेत कई लोगों की मौत हो गई. इस हमले के बाद भारत और खासकर उत्तर प्रदेश में अमेरिका और इजराइल के विरोध में सड़कों पर शिया मुसलमानों का हुजूम दिख रहा है.

विरोध प्रदर्शन और मातम की तस्वीरें देश के अलग-अलग हिस्सों से आ रही है, लेकिन ईरान के सुप्रीम नेता अयातुल्ला अली खामनेई की मौत के बाद लखनऊ के छोटे और बड़े इमामबाड़ा के पास बड़ी संख्या में महिलाएं बच्चे और बुजुर्ग पहुंचे. उनके हाथों में खामनेई की तस्वीर और आंखों में आंसू थे. यह मातम और विरोध की ऐसी तस्वीर थीं, जिसने अयातुल्ला खामनेई और लखनऊ के संबंधों को लेकर सोचने पर विवश कर दिया कि आखिर खामेनेई, ईरानी यूनिवर्सिटी और लखनऊ के बीच क्या संबंध है.

विरोध और मातम की कहानी

इन संबंधों, विरोध प्रदर्शन और मातम को समझने के लिए TV9 भारतवर्ष ने लखनऊ में शिया धर्मगुरु और अखिल भारतीय शिया निजी कानून बोर्ड (एआईएसपीएलबी) के अध्यक्ष मौलाना मोहम्मद मिर्ज़ा यासूब अब्बास से विस्तृत बात की. इस दौरान मौलाना अब्बास ने जो बताया उससे सुप्रीम नेता अयातुल्ला अली खामनेई का लखनऊ से रिश्ता, यह विरोध और मातम की पूरी कहानी समझ में आ जाती है.

‘ये सिर्फ धार्मिक मामला है…’

शिया धर्मगुरु यासूब अब्बास ने कहा कि ये सिर्फ धार्मिक मामला है. ईरान और लखनऊ का कोई और संपर्क नहीं है. उन्होंने कहा कि जैसे वेटिकन में पोप सबसे बड़ा है. दुनिया में उनके अनुयायी हैं और जैसे भारत में शंकराचार्य हैं और पूरे विश्व में उनके मानने वाले फैले हुए हैं, उसी तरह शिया समुदाय के लोग ईरान के सुप्रीम नेता अयातुल्ला अली खामेनेई हैं और पूरी दुनिया में उनको मानने वाले हैं.

‘खामेनेई हर वो बात कहते थे जो इस्लाम में है’

उन्होंने कहा कि खामेनेई हर वो बात कहते थे जो इस्लाम में है वो इस्लाम के खिलाफ बात नहीं करते थे. क्योंकि वो इस्लामिक स्पिरिचुअल लीडर थे. उन्होंने कहा कि खामेनेई मजहबी पेशवा थे मजहब की बात करते थे. उन्होंने कहा कि सुन्नी भी साथ आ रहे हैं कई मौलानाओं ने प्रोटेस्ट किया है. उन्होंने कहा कि ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की बात हर कोई मानता था. भारत के मुस्लिम भी ईरान के कुम में जाकर धार्मिक शिक्षा ग्रहण करते हैं.

शियाओं के लिए ईरान में यूनिवर्सिटी

मौलाना मोहम्मद मिर्ज़ा यासूब अब्बास ने कहा कि देशभर के शिया समाज के जो मुस्लिम हैं उसके लिए एक स्पेसिफिक यूनिवर्सिटी ईरान में हैं. जहां सिर्फ भारत के नहीं दुनियाभर से भी लोग जाते थे. उन्होंने बताया कि वहां धार्मिक पढ़ाई तो करते ही हैं. लेकिन वहां के रूलर्स का एक सब्जेक्ट भी पढ़ाया जाता है. जो मौलवी और मौलाना होते हैं. उन्होंने कहा कि वे बहुत धार्मिक हैं लेकिन प्रचार प्रसार सब जो पढ़कर आते हैं.उन्हीं को हम लोग अपना धार्मिक नेता मानते हैं. उन्होंने बताया कि चूंकी अधिकतर शिया मौलवी और मौलाना ईरान की उस यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करते हैं इसलिए ईरान को हम लोग अपना धार्मिक स्थल मानते हैं. उन्होंने बताया कि खामनेई साहब के बारे में भी एक सब्जेक्ट अलग से पढ़ाया जाता है.

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