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कौशांबी से गिरफ्तार सुहैल का लाल किला ब्लास्ट से क्यों जुड़ रहा नाम? जासूसी के आरोप में अब तक 15 अरेस्ट

कौशांबी से गिरफ्तार सुहैल का लाल किला ब्लास्ट से क्यों जुड़ रहा नाम? जासूसी के आरोप में अब तक 15 अरेस्ट

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में पाकिस्तान के लिए जासूसी करने वाले एक बड़े नेटवर्क का हाल ही में खुलासा हुआ है. जांच आगे बढ़ने के साथ ही गिरफ्तारियों का आंकड़ा भी बढ़ता जा रहा है. पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े 9 और संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है, जिससे इस मामले में कुल गिरफ्तारियों की संख्या 15 तक पहुंच गई है. पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी हैं.

यह कार्रवाई 14 मार्च को ट्रांस हिंडन क्षेत्र में सामने आए जासूसी रैकेट के खुलासे के बाद की गई है. शुरुआती कार्रवाई में कौशांबी थाने की पुलिस ने 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया था, जिनमें एक महिला भी शामिल थी. जांच आगे बढ़ने पर अलग-अलग राज्यों से 9 और संदिग्धों को पकड़ा गया है.

लाल किला ब्लास्ट से कनेक्शन

सूत्रों के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए संदिग्धों में शामिल सुहैल ने कथित तौर पर लाल किले के पास हुए एक विस्फोट के बाद मौके पर पहुंचकर वहां की तस्वीरें लीं और वीडियो बनाए और उन्हें लगातार पाकिस्तान भेजता रहा. उसे पहले से ही इस घटना की जानकारी दी गई थी और उसे निर्देश मिला था कि घटना स्थल की हर गतिविधि को रिकॉर्ड कर अपने आकाओं तक पहुंचाए.

आरोप है कि विस्फोट के बाद सुहैल ने मौके पर मौजूद घायलों और मृतकों के वीडियो भी बनाए. इतना ही नहीं, वह अस्पताल तक भी पहुंचा, जहां उसने घायलों के नाम, उनकी स्थिति और अस्पताल के अंदर के दृश्य रिकॉर्ड किए. ये सभी जानकारियां और वीडियो उसने पाकिस्तान में बैठे अपने संपर्कों को भेजीं. काम पूरा करने के बाद उसने अपने मोबाइल फोन को तोड़कर नष्ट कर दिया, ताकि कोई सबूत न बच सके.

सुहैल ने दो सीलबंद पार्सल दुबई भेजे थे

सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान में बैठे सरफराज नामक व्यक्ति ने संभल निवासी सुहैल को इस काम के लिए निर्देश दिए थे. जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि सुहैल ने दो सीलबंद पार्सल दुबई भेजे थे, जो उसे दिल्ली में सरफराज के एक सहयोगी द्वारा दिए गए थे. इन पार्सलों को उसने अपने आधार कार्ड के जरिए भेजा, लेकिन इनमें क्या सामग्री थी, इसका अभी तक पता नहीं चल पाया है.

फिलहाल, सभी गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है. एजेंसियां यह जानने की कोशिश कर रही हैं कि सैन्य ठिकानों, रेलवे स्टेशनों और अन्य संवेदनशील स्थानों की वीडियो और जानकारी पाकिस्तान भेजने के पीछे उनका असली मकसद क्या था और इस नेटवर्क की जड़ें कहां तक फैली हुई हैं.

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