उत्तर प्रदेशभारत

कभी भाजपा से अलग होकर सपा से सांसद बने थे बृजभूषण सिंह, इस बार कैसे पूरी करेंगे कसम?

कभी भाजपा से अलग होकर सपा से सांसद बने थे बृजभूषण सिंह, इस बार कैसे पूरी करेंगे कसम?

उत्तर प्रदेश की सियासत के दबंग नेता बृजभूषण शरण सिंह

उत्तर प्रदेश की सियासत में कद्दावर नेताओं में शुमार किए जाने वाले बृजभूषण शरण सिंह एक बार फिर से अपने बयान को लेकर चर्चा में हैं. उन्होंने एक दिन पहले कहा था कि अगर वह जिंदा रहे तो एक बार फिर सांसद बनकर लोकसभा जरूर जाएंगे. साथ ही खुलकर अखिलेश यादव की तारीफ भी की. इस बयान के बाद सियासी गलियारे में चर्चा तेज हो गई है कि क्या वह फिर से लोकसभा चुनाव लड़ेंगे. अगर चुनाव लड़ेंगे तो आखिर किस पार्टी से.

पिछले साल लोकसभा चुनाव से पहले कुछ महिला पहलवानों की ओर से बृजभूषण शरण सिंह पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया गया था. मामले ने इस कदर तूल पकड़ा कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने आम चुनाव में उनका टिकट काट दिया और कैसरगंज सीट से टिकट नहीं दिया. हालांकि पार्टी ने उनकी जगह उनके बेटे करण भूषण सिंह को टिकट दे दिया था. करण आगे चुनाव जीतने में भी कामयाब रहे थे.

जिंदा रहा तो फिर सांसद बनूंगाः बृजभूषण

कैसरगंज के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह का अपने क्षेत्र में खासा दबदबा माना जाता है. यौन शोषण के आरोप का सामना करने वाले बृजभूषण ने एक चैनल के साथ पॉडकास्ट में कहा कि लोकसभा से उन्हें साजिश के तहत अपमानित करते हुए हटाया गया. उन्होंने दावा करते हुए कहा कि अगर वह जिंदा रहे तो एक बार फिर से सांसद बनकर लोकसभा जाएंगे.

फिर से लोकसभा चुनाव लड़ने की बात करते हुए बृजभूषण सिंह ने कहा, “मैं जरूर लोकसभा से निकाले जाने के अपमान का घाव जरूर भरूंगा. लेकिन चुनाव कहां से लड़ना होगा, यह जनता तय करेगी.” उन्होंने यह भी कहा, “मेरी कोशिश यही रहेगी कि बीजेपी के टिकट से ही फिर से लोकसभा जाऊं.” उनका यह भी कहना है कि बीजेपी अगर उनके बेटे को भी टिकट देती है तो भी वह चुनाव लड़ेंगे.

अखिलेश का एहसान नहीं भूलूंगाः बृजभूषण

हालांकि बेटे को टिकट दिए जाने के बाद भी खुद के चुनाव लड़ने के ऐलान से सियासी पारा बढ़ गया है क्योंकि उन्होंने इसी पॉडकास्ट में समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की भी खुलकर तारीफ कर दी. उन्होंने अखिलेश की तारीफ में कहा, “मैं जब खराब दौर से गुजर रहा था, तब अखिलेश यादव ने मेरे खिलाफ एक शब्द नहीं कहा. मैं उनका यह एहसान कभी नहीं भूलूंगा.”

बृजभूषण की ओर से अखिलेश की तारीफ यूं ही नहीं हैं. वह बीजेपी से पहले सपा में रह चुके हैं और साइकिल के सहारे लोकसभा भी जा चुके हैं. ऐसे में उनका सपा के साथ पुराना नाता रहा है. बीजेपी के साथ मामला सही नहीं बैठने पर उनके अखिलेश के खेमे में जाने का विकल्प बना रहेगा.

देवीपाटन मंडल में बृजभूषण का दबदबा

विवादों में रहने वाले दबंग नेता बृजभूषण शरण सिंह को हर कोई अपने खेमे में लेने को तैयार रहता है. उत्तर प्रदेश के एक बड़े हिस्से में उनका दबदबा माना जाता है. शिक्षा क्षेत्र में उन्होंने काफी काम किया है. बताया जाता है कि उन्होंने यूपी के देवीपाटन मंडल के चार जिलों- गोंडा, बलरामपुर, बहराइच और श्रावस्ती में 5 दर्जन से भी अधिक डिग्री कॉलेजों और इंटर कॉलेज खोल रखे हैं और मालिक भी हैं. सिर्फ देवीपाटन ही नहीं बल्कि अयोध्या मंडल और बस्ती मंडल में भी उनके कई शैक्षणिक संस्थान हैं.

गोंडा में 8 जनवरी 1957 को जन्मे बृजभूषण सिंह को छात्र जीवन से ही पहलवानी का शौक हुआ करता था. पहलवानी करने के अलावा वह कुश्ती के लिए दंगल का आयोजन भी शुरू से ही कराया करते थे. 90 के दशक में देश में राम मंदिर का मुद्दा जब आया तो वह भी इसमें शामिल हो गए. बृजभूषण 1985 से ही राम मंदिर आंदोलन का हिस्सा बन गए थे. साल 1992 में बाबरी विंध्वस में भी उनका नाम आया, हालांकि 2020 में उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया गया. वह विश्व हिंदू परिषद के दिग्गज नेता अशोक सिंघल के काफी करीबी रहे हैं. कहा जाता है कि सिंघल की वजह से ही वह बीजेपी में आए थे.

बृजभूषण नेगोंडा से शुरू की संसदीय पारी

साल 1991 के लोकसभा चुनाव में वह गोंडा संसदीय सीट से चुनाव जीतने में कामयाब रहे. हालांकि अगले चुनाव तक उनके खिलाफ कई मामले दर्ज कर लिए गए थे. ऐसे में वह 1996 का चुनाव वह नहीं लड़ सके और उनकी जगह बीजेपी ने पत्नी केतकी सिंह को उतारा, वह विजयी रहीं. 1998 में भी केतकी सिंह को जीत मिली. हालांकि 1999 के चुनाव में बृजभूषण फिर से चुनावी मैदान में उतरे और बीजेपी के टिकट पर गोंडा से विजयी हुए.

साल 2004 के चुनाव में बृजभूषण ने गोंडा सीट छोड़ दी और पास के बलरामपुर लोकसभा सीट से मैदान में उतरने का फैसला लिया. इस बार भी वह अपनी चुनावी वैतरणी पार करने में कामयाब रहे. हालांकि 2009 के लोकसभा चुनाव आने तक बीजेपी के साथ उनके रिश्ते थोड़े तल्ख हो गए थे. इस बीच यूपीए के पक्ष में वोटिंग करने की वजह से बीजेपी ने बृजभूषण को पार्टी से निकाल दिया.

जब बीजेपी छोड़ सपा से जुड़े बृजभूषण

बीजेपी से बाहर किए जाने के बाद बृजभूषण ने 2008 में समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया. अगले साल 2009 के चुनाव में वह कैसरगंज सीट से बेहद आसान मुकाबले में चुनाव जीतने में कामयाब रहे. 2014 के चुनाव से पहले नरेंद्र मोदी के केंद्र में आने से देश की सियासी फिजा काफी बदल गई थी. बृजभूषण अब फिर से बीजेपी में वापस आ चुके थे.

पार्टी ने उन्हें कैसरगंज सीट उतारा, और उन्होंने चुनाव में सपा प्रत्याशी विनोद कुमार सिंह उर्फ पंडित सिंह को 78 हजार से अधिक मतों से हरा दिया. बृजभूषण का जलवा अपने क्षेत्र में हमेशा से बना रहा और इसका असर परिणाम पर भी दिखा. 2019 में जब वह कैसरगंज सीट से मैदान में उतरे तो उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के चंद्रदेव राम यादव को 2.61 लाख से अधिक वोटों से हरा दिया.

कैसे कसम पूरी कर पाएंगे बृजभूषण

साल 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले बृजभूषण यौन शोषण के आरोपों से घिर गए. महिला पहलवानों की ओर से लगाए गए आरोपों में इस तरह उलझे कि वह चुनावी मैदान में उतर नहीं पाए. बीजेपी ने भी उन्हें टिकट नहीं दिया और उनके बेटे को मैदान में उतार दिया. अब वह फिर से चुनावी समर में उतरने की योजना बनाते दिख रहे हैं, उनकी योजना कुछ ऐसी है कि बेटे को टिकट दिए जाने के बाद भी वह खुद चुनाव लड़ने का दावा कर रहे हैं. लोकसभा चुनाव में अभी काफी वक्त है, लेकिन इंतजार करना होगा कि यूपी में 8 से 10 लोकसभा सीटों पर असर रखने वाले दबंग बृजभूषण किसके टिकट से चुनाव लड़ते हैं और अपनी कसम कैसे पूरी कर पाते हैं.

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button