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उस्माद हादी की हत्या, यूनुस सरकार पर शक, ISI भी शामिल? बांग्लादेश में बवाल की 3 थ्योरी

बांग्लादेश में पिछले वर्ष जुलाई में हुए विद्रोह के प्रमुख नेताओं में से एक शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद ढाका सहित कई जिलों में हिंसा की घटनाएं बढ़ गई है. मोहम्मद यूनुस ने जैसे ही इंकलाब मंच के नेता हादी की मौत की पुष्टि की वैसे ही पूरे देश के विभिन्न भागों में हमले, तोड़फोड़ और आगजनी तेज हो गई. इंकलाब मंच ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर बताया कि बांग्लादेश के युवा नेता शरीफ उस्मान हादी को उनके परिवार के अनुरोध पर शनिवार (20 दिसंबर 2025) को देश के राष्ट्रीय कवि काजी नजरुल इस्लाम के बगल में दफनाया जाएगा.

ढाका लाया गया उस्मान हादी का शव 

उस्मान हादी के शव को ढाका लाया जा चुका है. बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा, ’20 दिसंबर को उनके जनाजे की नमाज संसद भवन में पढ़ी जाएगी. उनके जनाजे की नमाज संसद भवन के साउथ प्लाजा में शनिवार दोपहर 2:30 बजे होगी. जो लोग उनके जनाजे की नमाज में शामिल होना चाहते हैं, उनसे खास तौर पर अपील है कि वे कोई बैग या भारी सामान न ले जाएं.’ इस दौरान संसद भवन और आस-पास के इलाकों में ड्रोन उड़ाना पूरी तरह से मना किया गया है.

द डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक बिमान बांग्लादेश के प्रवक्ता बोशरा इस्लाम ने बताया कि उस्मान हादी का शव लेकर एक फ्लाइट हजरत शाहजलाल इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर शाम करीब 5:48 बजे लैंड हुई. सिंगापुर के चांगी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से फ्लाइट बीजी 585 ने सिंगापुर के समयानुसार शाम 4:03 बजे  टेकऑफ किया.

बांग्ला संस्कृति पर उपद्रवियों का हमला

उस्मान के लिए हमदर्दी का नाटक करने वाले कट्टरपंथी शेख हसीना पर हत्या करवाने का आरोप लगा रहे हैं. इसी बहाने एक बार फिर भारत और बांग्ला संस्कृति के खिलाफ माहौल बनाया जा रहा है. इसी का नतीजा है कि भीड़ ने बांग्ला कल्चरल सेंटर पर धावा बोल दिया. उस्मान हादी को भारत-विरोधी बयानबाजी और आवामी लीग विरोध के लिए जाना जाता था. हादी ने ही ग्रेटर बांग्लादेश का नक्शा जारी करके सेवन सिस्टर्स स्टेट को बांग्लादेश का हिस्सा बताया था.

उस्मान हादी की मौत के पीछे ISI और यूनुस का हाथ?

वहीं बांग्लादेश की यूनुस सरकार हादी की हत्या का पॉलिटिकल माइलेज लेने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही है. मोहम्मद यूनुस हादी की हत्या पर शोक जताते हैं. लेकिन सच तो यह भी है कि जिस दिन हादी को गोली मारी गई उसी दिन उसके समर्थकों ने अल्टीमेटम दे दिया था. हादी के समर्थक सिर्फ उसके हत्या से गुस्से में नहीं हैं बल्कि यूनुस सरकार के खिलाफ भी गुस्से में हैं. जो अभी तक हादी के हत्यारों को पकड़ नहीं पाई है.

एक थ्योरी तो यह भी चल रही है कि उस्मान हादी के हत्या का दोष भारत पर मढ़ना यूनुस सरकार और बांग्लादेशी कट्टरपंथी जमातों की सोची समझी साजिश है. हादी के पॉलिटिकल मर्डर में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का हाथ होने का भी शक है. बांग्लादेश में हादी की हत्या के शक की सुई यूनुस सरकार की ओर भी घूम रही है क्योंकि कई ऐसी बातें हैं जो हादी की हत्या में यूनुस सरकार पर सवाल खड़े करती हैं. 

बांग्लादेश में बवाल की 3 थ्योरी

पहली तो यह कि उस्मान हादी मोहम्मद यूनुस के लिए राजनीतिक चुनौती बन चुका था. दूसरी वजह यह है कि हादी ने कई बार सार्वजनिक मंचों से यूनुस सरकार की आलोचना की थी. तीसरी वजह यह है कि उस्मान हादी खुद भारत विरोधी कट्टरपंथी नेता होने के साथ ही बांग्लादेशी युवाओं में भी काफी लोकप्रिय था. उस्मान हादी की हत्या के पीछे यह थ्योरी बड़ी तेजी से चल रही है कि यूनुस सरकार को उस्मान हादी से बगावत का डर था क्योंकि उस्मान हादी और उसके संगठन के लोगों को अंतरिम सरकार में कोई जगह नहीं दी गई. उल्टा उस्मान हादी के संगठन इंकलाब मंच पर बैन लगा दिया गया और जब उस्मान हादी ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान किया तो उसका कत्ल करवा दिया.

बांग्लादेश में अब की बार शरिया सरकार बनाने के लिए तमाम कट्टरपंथियों ने हाथ मिला लिया है. इसका उस्मान हादी की हत्या से कनेक्शन जोड़ने वाला यह वीडियो देखिए. एक तरफ उस्मान हादी की हत्या के बाद बांग्लादेश जल रहा है और दूसरी ओर ढाका में कट्टरपंथियों की भीड़ भारत के खिलाफ नारे लगा रही है. इस्लामिक शरिया कानून की कॉल दे रही है. गैर मुसलमानों को धमकियां दी जा रही है और यूनुस सरकार ऐसे कट्टरपतियों के लिए रेड कारपेट बिछा रही है. उस्मान हादी की हत्या का इल्जाम भारत और शेख हसीना पर लगाया जा रहा है, लेकिन भारत या शेख हसीना उस्मान हादी का पॉलिटिकल मर्डर क्यों करवाएंगी?

आवामी लीग पर चुनाव लड़ने पर पूरी तरह से प्रतिबंध

यूनुस सरकार ने तो 10 मई 2025 को आवामी लीग के सभी गतिविधियों पर बैन लगा दिया था. 12 मई 2025 को बांग्लादेश इलेक्शन कमीशन ने आवामी लीग का पार्टी रजिस्ट्रेशन सस्पेंड कर दिया था. यानी आवामी लीग फरवरी में होने वाला चुनाव लड़ने से पूरी तरह से अयोग्य हो गया. मतलब शेख हसीना की आवामी लीग पर तो बांग्लादेश में चुनाव लड़ने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा हुआ है. तो उस्मान हादी की मौत से आवामी लीग को पॉलिटिकल फायदा होने का सवाल ही नहीं उठता. फिर से यह एक अटकलबाजी होगी. अगर यह माना जाए कि शेख हसीना का वजूद, उनकी पार्टी का वजूद और उनके लोगों का वजूद बांग्लादेश में पिछले एक सवा साल में लोग समाप्त प्राय हो चुका है तो कैसे उनके लोग किसी की हत्या तक करने में समर्थ होंगे यह भी कहना कठिन होगा.

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