इजरायल पहुंचे पीएम मोदी, नेतन्याहू के बयान से इस्लामी देशों में खौफ, पाकिस्तान को क्यों सता रहा डर?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय दौरे पर बुधवार (25 फरवरी 2026) को इजरायल पहुंचे. पीएम मोदी का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिकी धमकियों के बीच मिडिल ईस्ट में एक और जंग की संभावना गहरा गई है. ऐसे में पूरी दुनिया खासकर अरब देश इस दौरे के दौरान होने वाली डील पर नजर बनाए हुए हैं. इजरायल पहुंचने के बाद पीएम मोदी ने कहा, ‘मैं द्विपक्षीय चर्चाओं और भारत-इजरायल मित्रता को मजबूत करने वाले सार्थक परिणामों की आशा करता हूं.’
पीएम मोदी के दौरे से क्यों डरा है पाकिस्तान?
गाजा में इजरायल के एक्शन से फिलहाल इस्लामिक देशों में नाराजगी है. दूसरी ओर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ रोज सैन्य कार्रवाई की धमकी दे रहे हैं. ऐसे में मिडिल ईस्ट दोहरा संघर्ष छिड़ सकता है. पीएम मोदी के इस दौरे पर पाकिस्तानी मीडिया खुद के लिए खतरे की घंटी बता रहा है. पाकिस्तानी अखबर डॉन ने लिखा, ‘भारत-इजरायल के बीच कूटनीतिक संबंध 1992 में बहाल हुए. पीएम मोदी के सत्ता में आने के बाद दोनों देश एक-दूसरे के और ज्यादा करीब आए.’
डॉन ने लिखा कि पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इजरायल ने अपनी ड्रोन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल पाकिस्तान के खिलाफ डिफेंस स्ट्रैटजी के रूप में किया था. पाकिस्तानी टीवी चैनल जियो न्यूज ने पीएम मोदी के इजरायल दौरे को लेकर एक शो किया, जिसका टाइटल था, ‘पीएम मोदी का इजरायल दौरा पाकिस्तान के लिए खतरे की घंटी.’ नेतन्याहू ने पीएम मोदी के दौरे से पहले हेक्सागन एलायंस का जिक्र किया था, जिसे लेकर पाकिस्तानी मीडिया चिंता जताई जा रही है.
नेतन्याहू के बयान से इस्लामी देशो में खौफ
नेतन्याहू ने कट्टर शिया और सुन्नी एक्सिस को खतरा बताया. उन्होंने भारत, ग्रीस, साइप्रस और कुछ अरब, एशियाई और अफ्रीकी देशों के साथ एक ग्रुप बनाने की बात कही. पाकिसतान की संसद ने मंगलवार (24 फरवरी 2026) को नेतन्याहू के इस बयान के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया था.
मिडिल ईस्ट मॉनिटर ने लिखा, ‘भारत ने 2018 से इजरायल के साथ अपने रिश्तों को फिलीस्तीन से अलग करके देखने लगा है. भारत भले ही फिलीस्तीन को एक राष्ट्र के रूप में समर्थन करता है, लेकिन साथ ही साथ इजरायल के साथ अपनी साझेदारी को और गहरा भी कर रहा है. भारत ने गाजा में मानवीय सहायता और सीजफायर की अपील तो की, लेकिन तत्काल युद्धविराम की मांग वाली यूएन के प्रस्तावों से दूरी बना ली.’
इस्लामिक देशों की मीडिया का रिएक्शन
अल जजीरा ने लिखा, ‘2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से भारत-इजरायल के संबंधों में बदलाव आया है. भारत एशिया में चीन के बाद इजरायल का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है. नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत इजरायल का सबसे बड़ा हथियार बन गया है. दोनों ही देश इस्लामी आतंकवाद को बड़ा खतरा मानते हैं. वेस्ट बैंक में इजरायल की कार्रवाइयों की आलोचना करने वाले प्रस्ताव का भारत ने समर्थन तो किया, लेकिन शुरुआत में झिझक भी दिखाई थी.’
पीएम मोदी इससे पहले जुलाई 2017 में इजरायल दौरे पर पहुंचे थे. पीएम मोदी के तय शेड्यूल के अनुसार वो केनेसेट (इजरायली संसद) को भी संबोधित करेंगे. ऐसा करने वाले वे पहले भारतीय प्रधानमंत्री होंगे. वे भारतीय समुदाय के कार्यक्रम में भी शामिल होंगे और टेक्नोलॉजी प्रदर्शनी का भी हिस्सा बनेंगे.



