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‘अब कोर्ट पर ही भरोसा है’, हाई कोर्ट से मिली अंतरिम राहत पर बोले दालमंडी के लोग

'अब कोर्ट पर ही भरोसा है', हाई कोर्ट से मिली अंतरिम राहत पर बोले दालमंडी के लोग

दालमंडी चौड़ीकरण पर हाई कोर्ट की रोक

Dalmandi Project News: वाराणसी में दालमंडी सड़क चौड़ीकरण योजना के दायरे में आ रहे मकानों के ध्वस्तीकरण पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है. अगली सुनवाई तक विवादित भवन के खिलाफ ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं की जाएगी. यह आदेश न्यायमूर्ति सलील कुमार राय और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने अलीमुन निशा, जुल करनैन व राशिद जफर की अलग-अलग याचिका पर दिया है.

TV9 भारतवर्ष की टीम ने हाई कोर्ट में याचिका दायर करने वाली अलीमुन निशा के बेटे शकील अहमद और दालमंडी के दूसरे लोगों से इस मुद्दे पर बात की है. शकील अहमद ने बताया कि सीके 67/28 हमारा पुश्तैनी मकान है और इसमें कुछ दुकानें भी हैं. हम चार भाई और चार बहन की ये एकमात्र कॉमन प्रॉपर्टी है. 30-35 लोगों का परिवार इस मकान और दुकान की वजह से चलता है. अब प्रशासन ये चाहता है कि औने-पौने दाम पर इसको ले लिया जाए.

मकान को जर्जर घोषित करने का आरोप

जब हम इसके लिए तैयार नही हुए तो नगर निगम ने इसे जर्जर घोषित कर दिया, जबकि ये मकान बिल्कुल अच्छी हालत में है. अगल-बगल के मकान टूट गए हैं, लेकिन हमारा मकान बिल्कुल सुरक्षित है. प्रशासन के इसी रवैये के खिलाफ हमारी मां अलीमुन निशा हाई कोर्ट गईं. अब वहां से जो राहत मिली है उसके लिए हम हाई कोर्ट का धन्यवाद करते हैं. अब हमें कोर्ट पर ही भरोस है. दालमंडी व्यापार मंडल के अध्यक्ष फारुख खान कहते हैं कि हाई कोर्ट के इस फैसले से प्रशासन को भी सबक लेना चाहिए.

कम मुआवजा पर खफा लोग

फारुख ने कहा कि हम विकास के खिलाफ नही हैं, लेकिन हमारे साथ भी वही व्यवहार हो जो दूसरों के साथ हो रहा है. कॉरिडोर बनाते वक्त और इस समय भी गोदौलिया पर जो प्रोजेक्ट चल रहे हैं, उसकी वजह से जो लोग विस्थापित हुए उनको 1.6 लाख प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से मुआवजा मिला, जबकि दालमंडी के लोगों को 88 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से मुआवजा दिया जा रहा है. हमारे साथ सौतेला व्यवहार क्यों किया जा रहा है?

ये भी पढ़ें: दालमंडी ध्वस्तीकरण पर HC की रोक, 20 जुलाई तक यथास्थिति बनाए रखने का आदेश

याचिकाकर्ता के बेटे ने क्या कहा?

दालमंडी के ही एक दुकानदार ने कहा कि एक वर्ग को टारगेट किया जा रहा है. मुस्लिम समाज को हर तरह से परेशान किया जा रहा है. अब मटन-चिकन की दुकानें भी शहर के बाहर भेजी जा रही हैं. ये सब सिर्फ मुस्लिम लोगों को परेशान करने के लिए किया जा रहा है. याचिकाकर्ता अलीमुन निशा के बेटे शकील अहमद ने कहा कि हम विकास और चौड़ीकरण के खिलाफ नही है, लेकिन अगर हम लोगों को उचित मुआवजा नही मिलता है तो बताइए कि हम लोग कहां जाएंगे?

कोर्ट के आदेश के बाद 20 जुलाई 2026 तक विवादित परिसर के संबंध में यथास्थिति बनाए रखी जाएगी. कोर्ट ने प्रथम दृष्टया में मामले को विचारणीय मानते हुए सभी पक्षकारों से जवाब मांगा है. प्रतिवादियों को तीन सप्ताह में काउंटर एफिडेविट दाखिल करने और याचिकाकर्ता को उसके बाद दो सप्ताह में प्रत्युत्तर दाखिल करने का समय दिया गया है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि हाई कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया है कि 26 मई 2026 के नोटिस से संबंधित संपत्ति पर सभी पक्ष यथास्थिति बनाए रखेंगे.

अमित कुमार सिंह

अमित कुमार सिंह

पिछले 15 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय, 2008 सितम्बर में नई दुनियां अख़बार दिल्ली से पत्रकारिता शुरू की. अप्रैल 2009 में ज़ी मीडिया जॉइन किया. दिसंबर 2018 तक ज़ी मीडिया में बतौर ब्यूरो चीफ बनारस रहा. जनवरी 2019 से जनतंत्र टीवी में गए और 2021 तक जिम्मेदारी निभाई.

रोमिंग जर्नलिस्ट के तौर पर जनतंत्र टीवी के लिए स्पेशल करेस्पोंडेंट की हैसियत से दिल्ली, बिहार-झारखंड और लखनऊ में अपनी सेवाएं दीं. टीवी 9 यूपी का हिस्सा बनने से पहले न्यूज़ नेशन गोरखपुर में बतौर ब्यूरो चीफ़ की भूमिका में रहे. फिलहाल टीवी 9 यूपी (डिजिटल) के लिए बनारस से सेवाएं दे रहे हैं.

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