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UP: फर्जी कंपनियां बनाईं… डकार गए 200 करोड़ रुपए; ऐसे हुआ GST फर्जीवाड़े का खुलासा

UP: फर्जी कंपनियां बनाईं… डकार गए 200 करोड़ रुपए; ऐसे हुआ GST फर्जीवाड़े का खुलासा

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में साइबर क्राइम सेल और एसआईटी ने जीएसटी चोरी के एक बड़े सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है. इस दौरान टीम ने करीब 200 करोड़ रुपये की फर्जी बिलिंग के मुख्य आरोपी पुनीत को आगरा से गिरफ्तार किया है. आरोप है कि पुनीत ने कागजों पर दर्जनों फर्जी फर्में बनाकर सरकारी राजस्व को भारी चूना लगाया है. एसपी क्राइम सुभाष चंद्र गंगवार के पुलिस लाइन में मामला का खुलासा करते हुए बताया कि आरोपी ने बिना किसी वास्तविक माल की आवाजाही के केवल ‘इनपुट टैक्स क्रेडिट’ (ITC) का अवैध लाभ उठाने के लिए करोड़ों के ट्रांजेक्शन दिखाए है.

गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 11 मोबाइल फोन, 12 एटीएम, 29 चेकबुक, 32 रबर स्टांप और भारी मात्रा में फर्जी दस्तावेज बरामद किए हैं. मुरादाबाद पुलिस की कार्रवाई जीएसटी विभाग द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के बाद की गई है. पुलिस अब आरोपी के नेटवर्क और उससे जुड़े अन्य संदिग्धों की तलाश में जुटी है, जिससे इस रैकेट के फर्जीवाड़े का गहराई से पता लगाया जा सके.

Gst Scam

2009 से जुड़ी फर्जीवाड़े की जड़ें

मुरादाबाद पुलिस की एसआईटी टीम ने जांच में खुलासा हुआ कि इस फर्जीवाड़े की जड़ें साल 2019 से जुड़ी हैं, जब आरोपी दिल्ली में कपड़ों का व्यापार करता था. वहां उसकी मुलाकात सिद्दीकी नामक व्यक्ति से हुई, जिसने पुनीत और उसकी पत्नी के दस्तावेजों का उपयोग कर पहली फर्म बनाई थी. लॉकडाउन के बाद जब आर्थिक लाभ बंद हुआ, तो पुनीत ने स्वयं कमान संभाल ली थी. पुलिस के अनुसार, पुनीत ने आर.के. इंटरनेशनल और मैग्ना एंटरप्राइजेज जैसी कई फर्जी फर्म विकसित कीं थी.

200 करोड़ के संदिग्ध लेने के मिले सबूत

इन फर्मों के जरिए मुख्य रूप से लकड़ी के व्यापार के फर्जी बिल तैयार किए जाते थे, लेकिन वास्तव में कोई माल खरीदा या बेचा नहीं जाता था, बल्कि केवल जीएसटी यूजर आईडी का उपयोग कर कागजी लेनदेन दर्शाया जाता था, ताकि भारी-भरकम आईटीसी रिफंड प्राप्त किया जा सके. पुलिस इस नए ठगी के गेम को देखकर काफी हैरान है. पुलिस की जांच में सामने आया आरोपी ने विभिन्न बैंक खातों के जरिए करीब 200 करोड़ रुपये का संदिग्ध लेनदेन किया है.

काली कमाई को ऐसा किया वैध

इसमें एक फर्म से 88 करोड़ और दूसरी से 57 करोड़ रुपये का ट्रांजैक्शन शामिल है. इस काली कमाई को वैध दिखाने के लिए आरटीजीएस (RTGS) और एनईएफटी (NEFT) का सहारा लिया जा रहा था. पुलिस को मौके से 32 फर्जी किरायानामे भी मिले हैं, जिनका उपयोग फर्जी पतों पर जीएसटी रजिस्ट्रेशन के लिए किया जाता था. आरोपी के खिलाफ पहले से ही कई धोखाधड़ी के मामले दर्ज हैं.

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