उत्तर प्रदेशभारत

कैसे पानी बन गया ‘जहर’? किसी को ब्रेन ट्यूमर तो कोई जन्म से दिव्यांग, कहानी कानपुर के जाना गांव की

कैसे पानी बन गया 'जहर'? किसी को ब्रेन ट्यूमर तो कोई जन्म से दिव्यांग, कहानी कानपुर के जाना गांव की

कानपुर के जाना गांव की कहानी

पानी…जो जिंदगी की सबसे बुनियादी जरूरत है. लेकिन सोचिए, अगर वही पानी किसी गांव के लिए ज़िंदगी नहीं, बीमारी बन जाए तो? उत्तर प्रदेश के कानपुर के जाना गांव की यही सच्चाई है, जहां गंगा का पानी पीने से लोग डरने लगे हैं. नदी में बह रहे जहरीले नालों ने पूरे इलाके को बीमारी के साए में धकेल दिया है.

क्या सिस्टम की लापरवाही से गंगा का पानी जहरीला हो रहा है? ये सवाल इसलिए हैं, क्योंकि कानपुर के ‘जाना’ गांव में लोग गंभीर बीमारियों का शिकार हो रहे हैं. महाराजपुर के जाना गांव में जितने लोग हैं, उतनी ही कहानियां इनके दर्द की हैं. कोई चल नहीं पाता, कोई बोल नहीं पाता, कोई जन्म से ही दिव्यांग है और कोई धीरे-धीरे मौत की तरफ बढ़ रहा है.

कई बच्चे जन्म से ही दिव्यांग…बेबसी की कहानियां

अर्नब… जिसे सिस्टम ने तोहफे में एक जन्मजात दिव्यांगता दी. रवि… जिसके पैरों ने चलने से पहले ही हार मान ली. कविता, जिसकी आंखों में किताबों के सपने थे, लेकिन दिव्यांगता ने सिर्फ़ मजबूरी दी है. इस वीरान होती ज़िंदगी और इन टूटते सपनों के पीछे एक ही वजह है…जहरीला पानी. वही पानी, जो ज़िंदगी देने के लिए होता है, यहां बेबसी बांट रहा है.

News 2025 12 10t135606.770

सोनू, जिसे तेज बुखार हुआ और जांच में पता चला कि उसे ब्रेन ट्यूमर है. गांव का 25 वर्षीय दीपक, जो मछली पकड़ने का जाल बनाता है, कमर से नीचे का हिस्सा खो चुका है. किशनपाल, जिनकी स्किन पर भयानक घाव हैं, मदद मांगते-मांगते थक चुके हैं. इन सभी की एक ही कहानी है—पानी ने इन्हें बीमार कर दिया.

टेनरियों से निकलता ज़हर, गंगा में बहता कचरा

कानपुर की 400 से ज्यादा टेनरी रोज़ 5 करोड़ लीटर जहरीला कचरा गंगा में उड़ेल रही हैं. जाजमऊ इलाके में सिर्फ 9 MLD कचरे का ट्रीटमेंट होता है, जबकि करीब 40 MLD सीधे गंगा में बह जाता है. यहां का पानी काला और लाल हो चुका है. जिस जगह पर नाले गंगा में गिरते हैं, वहां बदबू इतनी कि लोग मुंह पर रुमाल बांधते हैं. पानी इतना जहरीला है कि मछलियां तक मर रही हैं. बेबस गांव वाले कहते हैं—जानते हैं मर जाएंगे, पर यहां रहना मजबूरी है.

टेनरी वह कारखाना या कार्यशाला होती है, जहां जानवरों की कच्ची खाल को केमिकल रिएक्शन के जरिए टिकाऊ चमड़े में बदल दिया जाता है. इस प्रक्रिया में खाल से बाल, मांस और चर्बी हटाकर उसे सड़ने से बचाया जाता है, ताकि बाद में उसी चमड़े का उपयोग जूते बैग जैसे उत्पाद बनाने में किया जा सके. ऐसे कई टेनरी कारखाने कानपुर में मौजूद हैं.

News 2025 12 10t135630.231

गाववालों का कहना है कि गांव के लोग मजबूरी में वही पानी पीते हैं. किसी के घर में शुद्ध पानी का इंतजाम नहीं है. लखनऊ से मदद नहीं आती है. जिसे बताओ वो भगा देता है कोई सुनने वाला नहीं है.

हाल ही में गांव के 570 लोगों के सैंपल लिए गए थे, जिनमें 555 में कोई न कोई बीमारी निकलकर आई. इनमें से कई लोगों में किडनी, लिवर और स्किन की गंभीर समस्याएं मिलीं. पानी में आर्सेनिक और क्रोमियम की मात्रा खतरनाक स्तर पर पाई गई.

टंकी है, पर पानी नहीं

स्थानीय विधायक सतीश महाना का कहना है कि उन्होंने पानी की टंकी बनवा दी है, ताकि हैंडपंप से निकलने वाले जहरीले पानी को गांववाले न पिएं. लेकिन जब टीवी9 की टीम मौके पर पहुंची तो वो टंकी सूखी मिली. उसमें पानी की एक बूंद भी नहीं मिली.

CMO डॉ. हरिदत्त नेमी ने कहा कि कुछ समय पहले इस इलाके में एक मेडिकल कैंप लगा था, जिसमें जांच के दौरान लोगों के शरीर में मरकरी और क्रोमियम की मात्रा ज्यादा पाई गई थी. लेकिन हाल के दिनों में जो कैंप लगे थे, उनमें ऐसी कोई बात कभी सामने नहीं आई.

News 2025 12 10t135744.643

आर्सेनिक और क्रोमियम कितना खतरनाक?

  • आर्सेनिक: कैंसर, गैंग्रीन, हार्ट अटैक, लिवर-स्टमक की समस्या
  • क्रोमियम: किडनी-लिवर फेलियर, जन्मजात दिव्यांगता, बच्चों में ट्यूमर

2024 में कानपुर के डीएम ने NGT यानी नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में हलफनामा दिया. इस हलफनामे में साफ तौर पर बताया गया था कि जाजमऊ और पनकी औद्योगिक क्षेत्र में कैंप लगे थे. इस कैंप में जो लोग आए उनको लिवर और सांस से जुड़े रोग थे. इलाके में डॉक्टरों की भारी कमी की भी बात कही गई. खून में क्रोमियम-मरकरी की मौजूदगी की जांच के लिए मशीनों की कमी बात कही गई थी.

IIT कानपुर की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कानपुर की टेनरियां बहुत सारा गंदा और जहरीला पानी गंगा नदी में डालती हैं, जिससे पानी और मिट्टी खराब होती है. इस जहरीले पानी में खतरनाक केमिकल्स क्रोमियम होता है, जो लोगों और जानवरों की सेहत के लिए बहुत खराब है. गांव के लोग दस्त, स्किन रोग, गर्भपात, पशु मृत्यु, दूध की कमी जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं और जीवन पर ​गहरा असर पड़ा है.

यहां देखिए पूरी ग्राउंड रिपोर्ट…

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button