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ईदगाह मस्जिद का सर्वे तो होगा, लेकिन औरंगजेब के करीबी की किताब में क्या सच लिखा है? | mathura Krishna Janmabhoomi and shahi idgah dispute book maasir e alamgiri asi survey

ईदगाह मस्जिद का सर्वे तो होगा, लेकिन औरंगजेब के करीबी की किताब में क्या सच लिखा है?

मथुरा की शाही ईदगाह मस्जिद

मथुरा की शाही ईदगाह मस्जिद पर गुरुवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट से ऐसा फैसला आया जिसे हिंदू पक्ष अपनी बड़ी जीत बता रहा है और कह रहा है कि अयोध्या सिर्फ झांकी है, अब काशी और मथुरा बाकी है. वो अयोध्या जिस पर वर्षों के इंतजार के बाद राम मंदिर बनकर तैयार है. काशी की वो ज्ञानवापी मस्जिद जिस पर ASI की रिपोर्ट खुलने का हर किसी को बेसब्री से इंतजार है, लेकिन उससे पहले ही अब ये फैसला भी सुना दिया गया है कि मथुरा की शाही ईदगाह मस्जिद परिसर का सर्वे होगा, जिसके बाद कई सवालों से पर्दा उठ जाएगा, क्या मथुरा की शाही ईदगाह मस्जिद को मंदिर तोड़कर बनाया गया है, क्या औरंगजेब ने मंदिर ध्वस्त करने के बाद शाही ईदगाह मस्जिद का निर्माण किया?

इस पूरे मामले को समझने के लिए हम पहले आपको बड़ी खबर बताते हैं, जो मथुरा की शाही मस्जिद से जुड़ी है. जिस पर आज बड़ा फैसला आया है. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एडवोकेट कमिश्नर से शाही मस्जिद के सर्वे कराए जाने को मंजूरी दे दी है. इसकी मांग विवाद के पक्षकार श्रीकृष्ण विराजमान की ओर से की गई थी. जिनका दावा है कि शाही मस्जिद के नीचे श्रीकृष्ण का जन्मस्थान है.

हाईकोर्ट के इस फैसले के साथ ईदगाह कमेटी की दलील कोर्ट ने खारिज कर दी है. कोर्ट ने अपने फैसले के पीछे ज्ञानवापी सर्वे पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को आधार बताया. हिंदू पक्ष के मुताबिक, औरंगजेब ने 1670 में केशवनाथ मंदिर तुड़वाया, जबकि मुस्लिम पक्ष का दावा है कि मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाने के सबूत नहीं हैं. हिंदू पक्ष के मुताबिक, मस्जिद के नीचे श्रीकृष्ण का जन्मस्थान है, लेकिन मुस्लिम पक्ष की दलील है कि तथ्यों को तोड़ मरोड़कर पेश किया जा रहा है.

मथुरा में 13.37 एकड़ जमीन को लेकर विवाद

हिंदू पक्ष के मुताबिक, हिंदुओं के पवित्र पूजा स्थल पर अवैध कब्जा किया गया, जबकि मुस्लिम पक्ष का तर्क है कि विवाद में प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट का पालन होना चाहिए.

दरअसल ये पूरा विवाद मथुरा में 13.37 एकड़ जमीन को लेकर है, जिसमें करीब 11 एकड़ ज़मीन पर श्रीकृष्ण जन्मस्थान मंदिर है, जबकि 2.37 एकड़ जमीन पर शाही ईदगाह मस्जिद है, लेकिन हिंदू पक्ष का दावा है मस्जिद मंदिर को तोड़कर बनाई गई इसलिए जमीन हिंदू पक्ष को दी जाए. हिंदू पक्ष ने कोर्ट में जो याचिका दायर की उसमें कई चौंकाने वाले और दिलचस्प दलीलें हैं.

‘मस्जिद के नीचे भगवान का गर्भ गृह’

हिंदू पक्ष के मुताबिक, शाही ईदगाह मस्जिद के नीचे भगवान का गर्भ गृह है. मस्जिद में मंदिर होने के प्रतीक मौजूद हैं. इन्हीं प्रतीक में से एक स्वास्तिक का चिह्न है. इसके अलावा शाही ईदगाह में हिंदू स्थापत्य कला के सबूत भी मौजूद होने के दावे किए हैं. मस्जिद में कमल के आकार के स्तंभ बने हैं और शेषनाग की छवि भी मौजूद है.

हालांकि सच क्या है ये वैज्ञानिक सर्वे के बाद ही सामने आएगा, लेकिन उससे पहले इस पर मजहबी घमासान छिड़ा है. इस खबर पर रिसर्च करते वक्त एक ऐसी किताब के बारे में पता चला, जो हिंदू पक्ष के दावों को और हवा देने का काम करती है. मासीर-ए-आलमगीरी किताब मिली है, जिसे औरंगजेब के करीबी बख्तारवर खान के मुंशी साकी मुस्ताद खान ने फारसी में लिखा था, जिसका बाद में जदुनाथ सरकार ने अंग्रेजी में अनुवाद किया.

मासीर-ए-आलमगीरी में क्या लिखा है?

मासीर-ए-आलमगीरी के पेज नंबर 60 पर साकी मुस्ताद खान ने लिखा था कि जनवरी 1670 में बादशाह औरंगजेब ने आदेश दिया कि मथुरा में जो केशवदेव मंदिर है उसे गिरा दिया जाए. जितनी भी मूर्तियां हैं, जिनमें कीमती जवाहरात जड़े हों, जो मंदिर में रखी थीं उन्हें आगरा लाया जाए और बेगम साहिबा मस्जिद की सीढ़ियों के नीचे दफ्न कर दिया जाए. यानी जिस शख्स ने ये सब कुछ अपनी आंखों से देखा था, उसे शब्दों में अपनी किताब में उतार दिया और इसमें उन्होंने मंदिर तोड़े जाने का भी जिक्र किया है. इस किताब में साकी मुस्ताद खान ने ये भी लिखा कि बाद में मथुरा का नाम तब बदलकर इस्लामाबाद रख दिया गया और इसके बाद हुक्म की तामील करने वालों को इनाम भी दिए गए.

ब्यूरो रिपोर्ट, TV9 भारतवर्ष

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