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US Attacks Iran Nuclear Sites: जब दुनिया गहरी नींद में थी, उसी समय अमेरिका ने ईरान पर अब तक का सबसे बड़ा हवाई हमला कर दिया. रविवार की सुबह अमेरिकी वायुसेना ने ईरान के तीन प्रमुख परमाणु ठिकानों- फोर्डो, नतांज और इस्फहान को अपना निशाना बनाया. इस हमले में अत्याधुनिक B-2 स्टील्थ बॉम्बर्स और GBU-57 बंकर बस्टर बम का इस्तेमाल किया गया, जो करीब 30,000 पाउंड वजनी होता है.
F-22 रैप्टर फाइटर जेट्स की रही अहम भूमिका
यह बम इतने शक्तिशाली हैं कि जमीन के अंदर छिपे ठिकानों को भी पूरी तरह तबाह कर सकते हैं. ईरान पर किए गए हमले में B-2 स्पिरिट स्टील्थ बॉम्बर्स और F-22 रैप्टर फाइटर जेट्स की भूमिका अहम रही. ये दोनों विमान अपनी रडार से बचने की खास तकनीक के लिए जाने जाते हैं, जिससे दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम इन्हें ट्रैक नहीं कर पाते.
B-2 बॉम्बर्स से परमाणु ठिकानों को बनाया गया निशाना
B-2 बॉम्बर्स का उपयोग ईरान के भूमिगत परमाणु ठिकानों को निशाना बनाने के लिए किया गया. जनकारी के अनुसार, हर B-2 विमान में दो शक्तिशाली ‘बंकर बस्टर’ बम लगे थे, जिनकी मदद से ईरान के गहरे सुरक्षा वाले एटमी ठिकानों को भी पूरी तरह नष्ट कर दिया गया.
जॉइंट डायरेक्ट अटैक म्यूनिशन का किया गया इस्तेमाल
ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले में अमेरिका ने JDAM यानी जॉइंट डायरेक्ट अटैक म्यूनिशन का इस्तेमाल किया. ये स्मार्ट बम होते हैं, जो GPS की मदद से बहुत सटीक तरीके से निशाना लगाते हैं. इससे पहले अमेरिका ने ALCM (एयर लॉन्च्ड क्रूज मिसाइलें) भेजीं, जिनका काम था ईरान के रडार और संचार सिस्टम को पहले ही खत्म करना. इससे ईरान की सुरक्षा व्यवस्था कमजोर हो गई और उसे हमले का पता ही नहीं चला.
ईरान के ड्रोन और मिसाइल भंडारों को खत्म करने के लिए अमेरिका ने स्पेशल ऑपरेशन्स कमांड (SOCOM) के जरिए सर्जिकल स्ट्राइक की. इन खास अभियानों में अमेरिका ने ‘एमक्यू-9 रीपर ड्रोन’ का इस्तेमाल किया, जो ‘हेलफायर’ मिसाइलों से लैस होते हैं. ये ड्रोन ऊंचाई से उड़ते हैं, दुश्मन को बिना खबर दिए सटीक निशाना लगाते हैं और छोटे से ठिकाने को भी पूरी तरह तबाह करने में सक्षम होते हैं.
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